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कविता में दिखा समाज का आईना : हंसी, संवेदना और सवालों से सजी काव्य संध्या

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Mon, Nov 2, 2026
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आचमन के वार्षिकोत्सव में कवियों ने रचनाओं से बांधा समां, देर रात तक चली महफिल

उन्नाव। टूटते पारिवारिक रिश्ते, बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़। सोमवार को शहर के प्रकाश गेस्ट हाउस में आयोजित साहित्यिक संस्था आचमन के 27वें वार्षिकोत्सव में कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिए समाज से जुड़े मुद्दों को मंच पर उठाया। किसी ने हास्य-व्यंग्य से श्रोताओं को गुदगुदाया तो किसी की भावुक कविता ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कवियों ने देर रात तक अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधे रखा।
कार्यक्रम की शुरुआत सदर विधायक प्रतिनिधि प्रखर गुप्ता ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर की। इस दौरान राम प्रसाद वर्मा सरस की पुस्तक मुक्तक मणिकाएं और अवधेश श्रीवास्तव की पुस्तक मौन स्मृतियां का विमोचन किया गया। शाम सात बजे शुरू हुए कवि सम्मेलन में गिरीश अवस्थी ने वाणी वंदना के साथ काव्य गोष्ठी का आगाज किया। चंदन राय ने प्रेम और श्रृंगार से जुड़ी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। उनकी पंक्तियां 'जो मेरे पास आना नहीं चाहता, मैं भी उसको बुलाना नहीं चाहता' श्रोताओं को पसंद आईं। रतलाम से आईं कवयित्री सुमित्रा सरल ने प्रेम और रिश्तों पर आधारित रचना सुनाई। उनकी प्रस्तुति पर भी खूब सराहना मिली। चित्रकूट के सुनील सौम्य ने मुक्तक और छंद प्रस्तुत किए। राधेश्याम भारती ने पिता के सम्मान और उपेक्षा पर आधारित रचना के जरिए परिवारों में बदलते रिश्तों की तस्वीर सामने रखी। उनकी कविता में बेटों की अनदेखी और पड़ोसी कल्लू की सेवा का प्रसंग श्रोताओं को भावुक कर गया। राजस्थान से आए राष्ट्रीय कवि अशोक चारण ने पेपर लीक के मुद्दे पर रचना सुनाकर व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने युवाओं के भविष्य, परिवारों की उम्मीदों और आर्थिक परेशानियों को कविता के जरिए सामने रखा। उनकी रचनाओं में राजनीतिक व्यंग्य और भारत-पाकिस्तान संबंधों का संदर्भ भी रहा। कार्यक्रम में राम प्रसाद वर्मा सरस ने पहली बार अपने मुक्तक और गीत प्रस्तुत किए। अलग-अलग विषयों पर कवियों की रचनाओं ने श्रोताओं को कभी भावुक किया तो कभी व्यवस्था पर सोचने को मजबूर किया।

कवियों को स्मृति सम्मान से नवाजा

समारोह में चंदन राय को श्याम प्रकाश श्रीवास्तव स्मृति सम्मान, राधेश्याम भारती को शिवाकांत शुक्ला स्मृति सम्मान, रामकिशोर तिवारी को देवकीनंदन अवस्थी स्मृति सम्मान और सुमित्रा सरल को सर्वरंजनी श्रीवास्तव स्मृति सम्मान दिया गया। अशोक चारण को माता प्रसाद मिश्र स्मृति सम्मान, सुनील सौम्य को सुखदेव प्रसाद गुप्त सम्मान और गिरीश अवस्थी को आचमन सम्मान प्रदान किया गया।

रामकिशोर तिवारी ने किया संचालन

बाराबंकी से आए रामकिशोर तिवारी ने कवि सम्मेलन का संचालन किया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति के दौरान झांसी की रानी पर आधारित पंक्तियां सुनाकर श्रोताओं में उत्साह भरा। मंच संचालन के साथ उनकी काव्य प्रस्तुति भी कार्यक्रम का खास हिस्सा रही।

अतिथियों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद अध्यक्ष श्वेता भानु मिश्रा और जिला पंचायत अध्यक्ष शकुन सिंह सहित प्रोफेसर मनोज श्रीवास्तव, डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डॉ. रामनरेश, डॉ. केके मिश्रा, विमल द्विवेदी, रामदेव शुक्ल और प्रशांत कटियार मंटू सहित कई लोग मौजूद रहे।

पूर्व पदाधिकारियों को दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के समापन पर संस्था के पूर्व अध्यक्ष डॉ. गणेश प्रसाद मिश्रा, संरक्षक शैलेंद्र कुमार सिंह और जयकृष्ण पांडेय कोविद को श्रद्धांजलि दी गई। महामंत्री राम प्रसाद वर्मा सरस ने आयोजन में सहयोग करने वाले अतिथियों, कवियों और संस्था के सदस्यों के प्रति आभार जताया।

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Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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