गांव की कमाई बढ़ाने का प्लान : कटहादल नारायणपुर में 2.42 करोड़ से बनेगा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स
Fri, Feb 6, 2026
26 दुकानों के निर्माण से हर महीने करीब 39 हजार रुपये की आय, डीएम ने दी अनुमति
उन्नाव। गांवों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार की शॉपिंग कॉम्प्लेक्स योजना अब जमीन पर उतरती दिख रही है। इसी कड़ी में सिकंदरपुर कर्ण ब्लॉक की ग्राम पंचायत कटहादल नारायणपुर को आय सृजन की इस योजना में शामिल किया गया है। यहां पंचायत की जमीन पर आधुनिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा, जिससे हर महीने ग्राम पंचायत को नियमित आमदनी होगी। योजना के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्र में कुल 26 दुकानें बनाई जाएंगी। इन दुकानों को किराये पर दिया जाएगा, जिससे पंचायत को हर माह करीब 39 हजार रुपये की आय होने का अनुमान है। यह पैसा सीधे ग्राम पंचायत के खाते में जाएगा और गांव के विकास कार्यों पर खर्च किया जा सकेगा। डीपीआरओ आलोक सिन्हा के मुताबिक, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण पंचायत की उपलब्ध भूमि पर किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 2.42 करोड़ रुपये की लागत आएगी। निर्माण से पहले ग्रामसभा की खुली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जहां सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से इसे मंजूरी दे दी। इसके बाद जिलाधिकारी से भी निर्माण की अनुमति मिल चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि दुकानों का निर्माण पूरा होने के बाद उन्हें नियमानुसार किराये पर आवंटित किया जाएगा। प्रत्येक दुकान से लगभग 1500 रुपये प्रतिमाह किराया लिया जाएगा। इससे ग्राम पंचायत को स्थायी आय का एक मजबूत स्रोत मिलेगा। इस राशि का उपयोग सड़क, नाली, साफ-सफाई, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने में किया जा सकेगा। शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनने से स्थानीय व्यापारियों को भी फायदा होगा। गांव के लोगों को रोजमर्रा की जरूरत का सामान पास में ही मिल सकेगा, जिससे उन्हें कस्बों या शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। साथ ही दुकानों के संचालन से ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। कुल मिलाकर यह योजना न सिर्फ ग्राम पंचायत की आर्थिक हालत मजबूत करेगी, बल्कि गांव के समग्र विकास को भी नई रफ्तार देगी। प्रशासन को उम्मीद है कि ऐसे प्रयोग आगे चलकर अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी मिसाल बनेंगे।
मौरंग खदानों में कानून बेबस..? : ओवरलोडिंग बेखौफ जारी
Sat, Jan 31, 2026
उत्तर प्रदेश फतेहपुर
: किशनपुर थाना क्षेत्र के संगोलीपुर मड़ैयन मौरंग खदान से हो रही ओवरलोडिंग अब महज़ अवैध खनन नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की खुली परीक्षा बन चुकी है। दिन हो या रात, नियमों की धज्जियाँ उड़ाते ट्रक और ट्रैक्टर सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं, और जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं।स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के बयानों से यह साफ़ होता है कि शाम ढलते ही “बिना रवन्ना” वाहनों का काफिला निकल पड़ता है।
विजयीपुर–नरैनी मार्ग से लेकर खागा तहसील के सामने तक ओवरलोड वाहनों की कतारें इस बात की गवाही देती हैं कि यह सब बिना किसी संरक्षण के संभव नहीं। हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। कभी-कभार चालान, कभी प्रतीकात्मक छापेमारी—लेकिन असली खेल जस का तस चलता रहता है। महीनों पहले STF की कार्रवाई से उम्मीद जगी थी कि माफिया पर नकेल कसेगी, मगर वह उम्मीद भी जल्द ही दम तोड़ गई।
ओवरलोडिंग से सड़कें जर्जर हो रही हैं, दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इसके बावजूद यदि हालात नहीं बदलते, तो सवाल लाज़िमी है—क्या यह लापरवाही है या मिलीभगत? और यदि सब कुछ “सेटिंग” के दम पर चल रहा है, तो आम जनता आखिर किससे न्याय की उम्मीद करे?
उन्नाव की मिठास को मिली पहचान : ओडीओसी में चुना गया चकलवंशी का रसगुल्ला
Sun, Jan 25, 2026
पैकिंग से लेकर मार्केटिंग तक हर स्तर पर मिलेगी सरकारी मदद
उन्नाव। उन्नाव की पहचान अब सिर्फ इतिहास और गंगा किनारे बसे घाटों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मिठास के स्वाद से भी देश और दुनिया में पहुंचेगी। जिले के चकलवंशी इलाके के मशहूर रसगुल्ले को प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना एक जिला एक व्यंजन (ओडीओसी) के तहत चुना गया है। इसका मकसद स्थानीय व्यंजनों को नई पहचान देना और उन्हें वैश्विक बाजार तक पहुंचाना है।
प्रदेश सरकार ने पहले से चल रही एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना की तर्ज पर अब व्यंजनों को भी ब्रांड के रूप में विकसित करने की पहल की है। इसके तहत हर जिले से एक खास मिठाई या पारंपरिक खाद्य पदार्थ चुना जा रहा है, ताकि स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों को बड़ा बाजार मिल सके। उन्नाव से इस सूची में चकलवंशी का रसगुल्ला अपनी अलग पहचान और स्वाद के चलते आगे आया है। जानकारी के मुताबिक, उद्योग विभाग ने पहले चरण में चकलवंशी के रसगुल्ले और कचौड़ी गली के समोसे का प्रस्ताव भेजा था। विस्तृत परीक्षण और गुणवत्ता मानकों के बाद रसगुल्ले को अंतिम रूप से चयनित किया गया है। अब इसे एक ब्रांड के तौर पर विकसित किया जाएगा। उपायुक्त उद्योग करुणा राय के अनुसार, रसगुल्ले को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से प्रमाणन दिलाया जाएगा, ताकि देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इसकी बिक्री में किसी तरह की दिक्कत न आए। इसके साथ ही कारोबार से जुड़े लोगों को भारतीय पैकेजिंग संस्थान के माध्यम से आधुनिक पैकेजिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे मिठाई की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रह सके। सरकार की योजना यहीं तक सीमित नहीं है। रसगुल्ले के कारोबार को बढ़ाने के लिए व्यापारियों को 25 प्रतिशत सब्सिडी पर ऋण की सुविधा भी दी जाएगी। आधुनिक पैकिंग, बेहतर मार्केटिंग और ब्रांडिंग के जरिए इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित किया जाएगा। भविष्य में चकलवंशी के रसगुल्ले की जीआई टैगिंग कराने की भी तैयारी है, जिससे इसकी पहचान और कानूनी सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी। स्थानीय मिठाई कारोबारियों का मानना है कि इस पहल से न सिर्फ उनके व्यवसाय को नया आयाम मिलेगा, बल्कि चकलवंशी और उन्नाव का नाम भी देश-दुनिया में पहुंचेगा। पारंपरिक स्वाद अब आधुनिक पैकिंग और सरकारी सहयोग के साथ नए बाजार की ओर कदम बढ़ाने को तैयार है।