टप्पेबाजी : बाजार से लौटते समय महिला को बनाया निशाना
Thu, Oct 29, 2026
बातों में उलझाकर जेवर उतरवाने का आरोप, 10 दिन बाद दर्ज हुई रिपोर्ट
उन्नाव। बाजार से खरीदारी कर घर लौट रही महिला को रास्ते में बातों में उलझाकर जेवर उतरवा लेने का मामला सामने आया है। महिला का आरोप है कि एक महिला समेत चार लोगों ने उसे नशीला पदार्थ सुंघाया और इसके बाद तीन अंगूठियां, सोने की चेन और पेंडल लेकर भाग गए। घटना 18 अक्टूबर की शाम की बताई गई है। मामले में 28 अक्टूबर को बांगरमऊ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई है। छोटी जमुनिहा बंगर गांव निवासी छेदाना उर्फ कुसमा पत्नी छेदी लाल के मुताबिक, वह 18 अक्टूबर को बांगरमऊ बाजार से घर लौट रही थीं। शाम करीब चार बजे वह बैंक ऑफ इंडिया की सीढ़ियों के पास पहुंचीं, तभी एक महिला और तीन पुरुष उनके पीछे लग गए। आरोप है कि चारों ने बातचीत के दौरान उन्हें अपने झांसे में ले लिया। इसके बाद नशीला पदार्थ सुंघाकर उनके हाथ की तीन अंगूठियां उतरवा लीं। महिला का कहना है कि उनके पर्स में रखी सोने की चेन और पेंडल भी निकलवा लिया गया। वारदात के बाद चारों वहां से चले गए। पीड़िता के अनुसार, होश आने पर उन्होंने आसपास के लोगों को पूरी बात बताई। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी देखी गई, जिसमें एक महिला और अन्य संदिग्ध नजर आने की बात तहरीर में कही गई है। पीड़िता ने पुलिस से फुटेज की जांच कराकर जेवर बरामद कराने की मांग की। पुलिस ने 28 अक्टूबर को तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अस्पताल प्रकरण में डीएम सख्त : जांच टीम गठित करने के निर्देश
Thu, Oct 29, 2026
सीएमओ बोले- अस्पताल का लाइसेंस जारी करने का सवाल ही नहीं उठता, अस्पताल अब भी सील
उन्नाव। सील किए जा चुके उत्तम हॉस्पिटल को नए नाम से दोबारा शुरू कराने के लिए 3.50 लाख रुपये मांगने के आरोपों पर प्रशासन ने जांच शुरू कराने की तैयारी की है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर उठे सवालों पर डीएम घनश्याम मीना ने गंभीरता दिखाई है। उन्होंने सीडीओ को टीम गठित कर पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने आरोपों को खारिज किया है। सीएमओ डॉ. एके शर्मा का कहना है कि संबंधित अस्पताल अभी भी सील है और उसे दोबारा चलाने की कोई अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में रुपये मांगने का आरोप बेबुनियाद है। दरअसल, शेखपुर नरी स्थित उत्तम हॉस्पिटल को जुलाई में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम ने सील कर दिया था। अस्पताल संचालक देवकांत उत्तम पर अस्पताल में काम करने वाली युवती से दुष्कर्म और पुलिस से शिकायत करने पर उसकी हत्या करने का आरोप है। अस्पताल संचालक की पत्नी के नाम पर पंजीकृत था। कार्रवाई के बाद से अस्पताल बंद है।
डीएम ने सीडीओ को सौंपी जांच की जिम्मेदारी
मामला तब चर्चा में आया, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हुआ। इसमें स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के कार्यालय में अस्पताल का नाम बदलकर नए सिरे से पंजीकरण कराने को लेकर बातचीत होती दिखाई दे रही है। वीडियो वायरल करने वालों ने आरोप लगाया कि अस्पताल को दोबारा शुरू कराने के लिए अधिकारी ने 3.50 लाख रुपये मांगे। वीडियो सामने आने के बाद मामला प्रशासन तक पहुंचा। डीएम घनश्याम मीना ने इसे गंभीरता से लेते हुए सीडीओ को जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं। जांच में वीडियो की सत्यता और उसमें लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जाएगी।
सीएमओ बोले, अस्पताल सील है तो लाइसेंस कैसे जारी होगा
मामले में सीएमओ डॉ. एके शर्मा ने रुपये मांगने के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि उत्तम हॉस्पिटल अभी भी सील है। ऐसे में उसे दोबारा संचालित करने के लिए लाइसेंस जारी करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कराई जा रही है। वीडियो में दिखाई दे रहे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने भी रुपये मांगने के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि बातचीत में कहीं भी रुपयों की मांग नहीं की गई।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
अब प्रशासनिक जांच में यह देखा जाएगा कि वायरल वीडियो में दिखाई गई बातचीत किस संदर्भ में हुई थी और अस्पताल के नए नाम से पंजीकरण कराने की बात किस आधार पर की जा रही थी। साथ ही 3.50 लाख रुपये मांगने के आरोपों की भी पड़ताल होगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग अस्पताल के सील होने और रुपये मांगने की बात को गलत बता रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नोट: द लखनऊ टाइम्स वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
बंदियों के हुनर से जगमगाएगी रामनगरी : जिला कारागार में तैयार हो रहे पांच हजार दीये
Thu, Oct 29, 2026
बंदी तैयारी में जुटे, कालिंदी गाय के दूध से तैयार घी भी साथ जाएगा
उन्नाव। जेल की चारदीवारी के भीतर इस बार दीपावली की तैयारी कुछ अलग अंदाज में हो रही है। यहां बंदियों के हाथों से तैयार मिट्टी के दीये अयोध्या की रोशनी का हिस्सा बनेंगे। जिला जेल प्रशासन ने पांच हजार दीये भेजने की तैयारी की है। इसके साथ जेल की गौशाला में रहने वाली कालिंदी नाम की गाय के दूध से तैयार करीब पांच किलो घी भी अयोध्या भेजा जाएगा।जेल प्रशासन की इस पहल में बंदियों का हुनर सामने आ रहा है। मिट्टी को आकार देकर दीये बनाने के काम में छह कुशल बंदी जुटे हैं। इसके लिए बाहर से मिट्टी मंगाई गई है। बंदी चाक की मदद से एक-एक दीया तैयार कर रहे हैं। लक्ष्य है कि दीपावली तक दीयों की खेप तैयार करके अयोध्या पहुंचा दी जाए।
हुनर को मिला काम, चाक पर आकार ले रहे दीये
दीये बनाने के लिए ऐसे बंदियों को जिम्मेदारी दी गई है, जिन्हें मिट्टी के बर्तन बनाने का अनुभव है। चाक पर मिट्टी को आकार देने से लेकर दीये तैयार करने तक का काम उनकी देखरेख में चल रहा है। पांच हजार दीयों का लक्ष्य पूरा करने के लिए काम किया जा रहा है। तैयार होने के बाद इनका इस्तेमाल अयोध्या में दीपावली पर रोशनी के लिए किया जाएगा।
गौशाला की कालिंदी भी बनेगी तैयारी का हिस्सा
जिला जेल परिसर में बनी गौशाला में कई गायें हैं, जिनमें कुछ दूध देती हैं। इनमें कालिंदी नाम की गाय के दूध से करीब पांच किलो घी तैयार किया गया है। जेल प्रशासन इस घी को भी दीयों के साथ अयोध्या भेजने की तैयारी कर रहा है। इस तरह उन्नाव जिला जेल से मिट्टी के दीयों के साथ गौशाला में तैयार घी भी रामनगरी पहुंचेगा। जेल अधीक्षक नीरज देव ने गुरुवार शाम करीब चार बजे इस संबंध में जानकारी दी। प्रशासन की योजना के मुताबिक, दीपावली के मौके पर बंदियों के हाथों से तैयार दीयों को अयोध्या भेजा जाएगा।