आग से सबक नहीं : नोटिस के बाद भी बेखौफ चल रहीं 12 असुरक्षित कमर्शियल बिल्डिंगें
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Fri, Jul 3, 2026
लखनऊ हादसे के बाद भी जिम्मेदार विभागों की सुस्ती बनी चिंता का कारण
उन्नाव। लखनऊ के भीषण अग्निकांड ने प्रदेशभर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है, लेकिन उन्नाव में हालात अब भी जस के तस हैं। शहर की जिन 12 व्यावसायिक इमारतों को अग्निशमन विभाग ने असुरक्षित मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति की थी, वे आज भी बिना जरूरी मानकों को पूरा किए संचालित हो रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभाएगा। करीब दो महीने पहले अग्निशमन विभाग ने इन भवनों में अग्नि सुरक्षा मानकों की कमी पाए जाने पर बिजली विभाग को उनके विद्युत कनेक्शन काटने के लिए नोटिस भेजी थी। कुछ संस्थानों के कनेक्शन काटे भी गए, लेकिन बाद में यह कहते हुए दोबारा जोड़ दिए गए कि संबंधित संस्थाएं जल्द ही व्यवस्थाएं दुरुस्त कर अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त कर लेंगी।हालांकि दो महीने बीत जाने के बाद भी इन भवनों की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। सभी प्रतिष्ठान पहले की तरह संचालित हो रहे हैं और विभागीय कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रही है। अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिन 12 भवनों को नोटिस जारी की गई थी, उनमें होटल, शॉपिंग मॉल और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल हैं, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसके बावजूद अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। इस मामले में अधिशासी अभियंता विद्युत पीडी नगर हिमांशु गौतम ने बताया कि संस्थानों के बिजली कनेक्शन काटे गए थे और उन्हें कमियां दूर करने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है। हालांकि बिजली विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि यह कार्रवाई करीब दो महीने पहले की गई थी। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि 10 दिन की मोहलत आखिर दो महीने तक कैसे बढ़ गई। बताया जा रहा है कि नोटिस पाने वाले संस्थानों में होटल शिव इन, होटल न्यू भजन, सिटी कार्ट, वी-मार्ट, ड्रीम पैलेस और आभा कॉन्टिनेंटल समेत कुल 12 प्रतिष्ठान शामिल हैं। इनमें रोजाना सैकड़ों लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में यदि किसी भी तरह की अग्नि दुर्घटना होती है तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। लखनऊ की दर्दनाक घटना के बाद भी उन्नाव में प्रशासन और संबंधित विभागों की निष्क्रियता कई सवाल खड़े कर रही है। असुरक्षित घोषित भवनों पर न तो प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही इनके संचालन पर रोक लगाई गई। ऐसे में आम जनता की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे है, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
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