फर्जी बिल लगाया... अब संस्पेंड : सरकारी खजाने को चूना लगाने के आरोप में पशु चिकित्साधिकारी पर कार्रवाई
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Thu, Jul 23, 2026
बिना डीजल खरीदे 4,220 रुपये का भुगतान लेने का आरोप, विभागीय जांच शुरू
उन्नाव। सरकारी धन के इस्तेमाल में गड़बड़ी करना सिकंदरपुर कर्ण क्षेत्र में तैनात पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शरद शाक्य को भारी पड़ गया। पशुपालन विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आरोप है कि उन्होंने डीजल खरीदे बिना ही 4,220 रुपये का बिल-वाउचर लगाकर सरकारी भुगतान हासिल कर लिया। जांच में मामला सामने आने के बाद विभाग ने इसे वित्तीय अनियमितता मानते हुए कार्रवाई की है।
डीजल खरीदा नहीं, बिल लगा दिया
विभागीय जांच में सामने आया कि डॉ. शरद शाक्य ने सरकारी काम के नाम पर डीजल खरीद का बिल प्रस्तुत किया था। बिल के आधार पर 4,220 रुपये का भुगतान भी ले लिया गया। हालांकि जांच में डीजल खरीद से संबंधित तथ्यों पर सवाल उठे और मामला संदिग्ध पाया गया। आरोप है कि वास्तव में डीजल खरीदा ही नहीं गया था, इसके बावजूद सरकारी भुगतान लेने के लिए बिल और वाउचर प्रस्तुत किए गए।
छह नवंबर 2025 को शुरू हुई थी कार्रवाई
डॉ. शाक्य के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत छह नवंबर 2025 को विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई थी। मामले की जांच के लिए पशुपालन विभाग कानपुर मंडल के तत्कालीन अपर निदेशक ग्रेड-2 को जांच अधिकारी बनाया गया था। उन्हें एक महीने के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपनी थी। हालांकि तय समय बीतने के बाद भी रिपोर्ट शासन को नहीं भेजी गई।
वित्तीय नियमों की अनदेखी का आरोप
विभाग ने इस पूरे मामले को सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़ी गंभीर अनियमितता माना है। निलंबन आदेश में वित्तीय नियमों के उल्लंघन के साथ ही सरकारी दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही का भी आरोप लगाया गया है। विभाग का मानना है कि सरकारी धन से जुड़े मामलों में दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया का सही होना बेहद जरूरी है। ऐसे में फर्जी या गलत बिल के आधार पर भुगतान लेना गंभीर मामला माना गया।
रिपोर्ट नहीं आई तो शासन ने फिर मांगी
जांच रिपोर्ट लंबित रहने पर शासन ने 20 मार्च 2026 को तत्काल रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बावजूद जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को नहीं भेजी गई। इसके बाद निदेशक प्रशासन एवं विकास, पशुपालन विभाग ने शासन को अपनी रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट में जांच में देरी को गंभीर मामला बताते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई थी।
जांच अधिकारी पर भी कार्रवाई का फैसला
शासन ने माना कि विभागीय जांच को समय से पूरा न करना और रिपोर्ट उपलब्ध न कराना गंभीर लापरवाही है। इसी आधार पर तत्कालीन जांच अधिकारी, अपर निदेशक ग्रेड-2, पशुपालन विभाग कानपुर मंडल के खिलाफ भी उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक नियमावली के तहत कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। अब विभागीय जांच की जिम्मेदारी पूर्व जांच अधिकारी से हटाकर मंडलायुक्त, लखनऊ मंडल को दी गई है। शासन ने नए जांच अधिकारी को मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
निलंबन के साथ विभागीय जांच शुरू
निलंबन के बाद अब डॉ. शरद शाक्य के खिलाफ विभागीय जांच चलेगी। जांच में यह देखा जाएगा कि बिल किस आधार पर लगाया गया, भुगतान की प्रक्रिया में किन स्तरों पर सत्यापन हुआ और इसमें किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका तो नहीं थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोष तय होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री से सवाल के बाद मामला फिर चर्चा में आया
इस मामले को लेकर पत्रकारों ने प्रभारी मंत्री धरमपाल सिंह से भी सवाल उठाए थे। इसके बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आया और विभागीय स्तर पर कार्रवाई तेज हुई। अब संबंधित पशु चिकित्साधिकारी के निलंबन के बाद विभागीय जांच पर सबकी नजर है। जांच पूरी होने के बाद यह भी साफ होगा कि केवल बिल लगाने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी तय होती है या भुगतान प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई होती है।फिलहाल निलंबन के बाद विभागीय जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
निलंबन के दौरान मिलेगा जीवन निर्वाह भत्ता
निलंबन अवधि में डॉ. शरद शाक्य को वित्तीय नियमों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें प्रमाणित करना होगा कि निलंबन के दौरान वह किसी अन्य सेवा, व्यवसाय या रोजगार में शामिल नहीं हैं। जांच पूरी होने के बाद यह तय होगा कि डीजल बिल से जुड़े मामले में उनकी जिम्मेदारी कितनी है और विभागीय जांच को प्रभावित करने के आरोप में उनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
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