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तत्कालीन डीआईजी पर हमले में 16 मुलजिम दोषी : 15 साल बाद तत्कालीन डीआईजी पर हमला करने के मामले में अदालत ने 16 आरोपियों को दोषी करार दिया

आलम वारसी

Tue, Mar 24, 2026
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मुरादाबाद के मैनाठेर कांड के 15 वर्ष बाद तत्कालीन डीआईजी पर हमला करने के मामले में अदालत ने 16 आरोपियों को दोषी करार दिया है। चार आरोपियों की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है। तब मैनाठेर थाना क्षेत्र में दस घंटे तक बवाल चला था और डीआईजी समेत 20 से ज्यादा पुलिस कर्मी जख्मी हुए थे।मुरादाबाद में 6 जुलाई 2011 को एक दर्दनाक घटना हुई थी, जब मैनाठेर थाना क्षेत्र में छेड़छाड़ के एक मामले में पुलिस की दबिश को गई पुलिस पर हमला हुआ था। भीड़ ने पुलिस पर धार्मिक पुस्तक के अपमान का आरोप लगाया और उग्र रूप धारण कर लिया। भीड़ ने मैनाठेर थाने, चौकी और वाहनों को आग के हवाले कर दिया और तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह को बुरी तरह पीट कर घायल कर दिया।

डीआईजी को जान बचाने के लिए पेट्रोल पंप में घुसना पड़ा, लेकिन भीड़ ने उन्हें वहां से भी निकाल लिया और उनकी लाठी डंडों से पिटाई की। डीआईजी ने अपनी पिस्टल से हवाई फायरिंग करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने उनकी पिस्टल भी लूट ली। इस घटना में डीआईजी बुरी तरह घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मैनाठेर के असालत नगर बघा निवासी छेड़छाड़ के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 6 जुलाई 2011 को दबिश दी थी। इसी दौरान आरोपी पक्ष के लोगों ने पुलिस पर धार्मिक पुस्तक के अपमान का आरोप लगाया। धार्मिक पुस्तक की बात फैली तो माहौल तनावपूर्ण हो गया भीड़ ने उग्र रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते एक वर्ग के लोग सड़कों पर उतर आए और मुरादाबाद-संभल मार्ग पर तीन स्थानों पर जाम लगा दिया। हिंसक भीड़ ने मैनाठेर थाने पर हमला बोल दिया। आग लगा दी। वहीं डींगरपुर में भीड़ ने पुलिस चौकी और पीएसी के वाहनों को आग के हवाले कर दिया। घटना की सूचना मिलने पर तत्कालीन डीएम राजशेखर और डीआईजी अशोक कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे। दोनों अधिकारी एक ही वाहन से डींगरपुर तिराहे पर पहुंचे, जहां भीड़ द्वारा पीएसी वाहन को जलाते देख उन्होंने लोगों को समझाने की कोशिश की। इसी दौरान उग्र भीड़ ने अचानक हमला कर दिया। उपद्रवियों ने डीआइजी व अन्य पुलिसकर्मियों को निशाना बना लिया। बताया जाता है कि डीआईजी के साथ मौजूद पुलिसकर्मी भी हालात बिगड़ते देख पीछे हट गए, तत्कीलन डीएम भी डीआईजी को भीड़ में घिरा देखकर वहां से बच कर निकल गए। भीड़ ने डीआईजी को इतना पीटा कि वह बुरी तरह घायल हो गए। डीआईजी को दिल्ली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनका काफी दिन तक इलाज चला। घटना के बाद वह करीब तीन महीने तक बिस्तर पर रहे। यह घटना आज भी मुरादाबाद के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में याद की जाती है।

डीआईजी जान बचाने के लिए डीआइजी पेट्रोल पंप के एक कमरे में घुस गए थे। भीड़ ने पेट्रोल पंप के कमरे का दरवाजा तोड़कर डीआइजी को बाहर निकाल लिया। इसके बाद उनकी लाठी डंडों से पीटा। डीआइजी ने अपनी पिस्टल से हवाई फायरिंग करना प्रयास किया तो भीड़ ने पिस्टल भी लूट ली थी। उधर से भी फायरिंग शुरू हो गई। जिससे डीआईजी लहूलुहान होकर गिर गए उनको गोली भी लगी। डीआइजी को मरा समझकर उपद्रवी वहां से हटे। बवालियों ने कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की थी। साथ ही मैनाठेर पुलिस चौकी में आग लगा दी थी। पुलिस की गाड़ी को आग लगाते हुए पीएसी के एक मिनी ट्रक को पहले पलटा और फिर कुछ मिनट बाद उसमें भी आग लगा दी।मुरादाबाद जिले के करीब 15 साल पुराने बहुचर्चित मैनाठेर कांड में एडीजे-2 कृष्ण कुमार सिंह की अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर हमले में 16 मुलजिमों को दोषी करार दिया है। इस मामले में चार आरोपियों की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है। अदालत 27 मार्च को दोषियों को सजा सुनाएगी।

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मुरादाबाद।।तत्कालीन डीआईजी पर हमले में 16 लोग दोषी करार

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