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फतेहपुर पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह के 3 सदस्य पकड़े : धोखाधड़ी कर चावल गायब करने के आरोप में हुई गिरफ्तारी

THE LUCKNOW TIMES

Thu, Apr 16, 2026
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यूपी के फतेहपुर जिले की बिंदकी पुलिस ने धोखाधड़ी और संगठित अपराध में संलिप्त एक अंतरराज्यीय गिरोह के तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई चावल गायब करने के एक मामले में की गई है।

अभियुक्तों के कब्जे से गायब किए गए चावल की बिक्री से प्राप्त ₹80,500/- नकद, 09 आधार कार्ड, 06 पैन कार्ड, 02 आरसी, एक वाहन परमिट, 03 एटीएम कार्ड, 06 मोबाइल फोन, 03 सिम कार्ड, 04 चेकबुक, 01 फास्ट टैग, 02 पासबुक, 01 बिल्टी, 08 पॉकेट डायरी और घटना में प्रयुक्त ट्रक बरामद किया गया है।

यह मामला 31 मार्च 2025 को बिंदकी थाने में निर्मल शंकर गुप्ता (पार्टनर, मेसर्स उमाशंकर मिल्स, ललौली रोड, बिंदकी) द्वारा दी गई तहरीर से संबंधित है। उन्होंने बताया था कि 23 मार्च 2025 को उनके गोदाम से ट्रक संख्या JH12L8838 पर 300 कुंतल 65 किलोग्राम खंडा चावल (कीमत लगभग ₹8,14,762/-) लोड कराया गया था।

चालक को वैध दस्तावेज (आईडी, आरसी, डीएल, पैन कार्ड) प्रस्तुत कर यह चावल पटना, बिहार भेजा जाना था। हालांकि, निर्धारित समय तक माल गंतव्य स्थान पर नहीं पहुंचा और चालक का मोबाइल फोन भी बंद हो गया।

इस संबंध में बिंदकी थाने में मु0अ0सं0 130/2025 धारा 316(2)/318(4) बीएनएस के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया था।

गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में राजेंद्र कुमार (पुत्र चरित्र सिंह, निवासी ग्राम कनोखर, थाना ओबरा, जनपद औरंगाबाद, बिहार), इंद्रदेव कुमार उर्फ गणेश कुमार (पुत्र जोधन प्रसाद, निवासी 23, टावर गली, थाना राजीवनगर, पटना) और रामानुज कुमार (पुत्र दिनेश प्रसाद, निवासी सती स्थान, मसौढ़ी, पटना, बिहार) शामिल हैं।

गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर, अभियोग में धारा 338/336 (1)/340(2)/317 (2) बीएनएस की वृद्धि की गई है। सभी अभियुक्तों को आज 16 अप्रैल 2026 को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने बताया कि उनका गिरोह संगठित रूप से कार्य करता है, जिसका संचालन ओमेंद्र नामक व्यक्ति करता है। गिरोह के सदस्य फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर ट्रांसपोर्टरों से संपर्क करते थे।

गिरोह द्वारा ट्रक पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर माल लोड कराया जाता था और फिर उसे निर्धारित स्थान पर न पहुंचाकर कम कीमत पर बेच दिया जाता था। इस प्रकार प्राप्त धनराशि को वे आपस में बांट लेते थे। उक्त प्रकरण में भी इसी प्रकार की कार्यप्रणाली अपनाई गई थी।

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