होली से पहले बाजारों में रौनक : महंगाई पर भारी पड़ा त्योहार का उत्साह
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Mon, Mar 2, 2026
रंग, पिचकारी और पकवानों की खरीद में दिनभर जुटे लोग, गन्ना 50 रुपये तक बिका
उन्नाव। रंगों के त्योहार होली से एक दिन पहले सोमवार को शहर के बाजार पूरी तरह त्योहार के रंग में रंगे नजर आए। सुबह से ही मुख्य चौराहों, बाजारों और मोहल्लों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। हालात यह रहे कि कई जगहों पर शाम तक जाम जैसे हालात बन गए और दुकानों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची। शहर के बड़े व्यापारिक इलाकों में रंग-गुलाल की ढेरियां सजी थीं। अलग-अलग पैकेटों में गुलाल, हर्बल रंग और बच्चों के लिए आकर्षक पैकिंग वाले कलर खूब बिके। पिचकारी की दुकानों पर बच्चों की सबसे ज्यादा भीड़ दिखी। कार्टून कैरेक्टर वाली पिचकारी, टैंक मॉडल और बड़ी फैंसी गन बच्चों को खूब भा रही थीं। कई बच्चे अपनी पसंद की पिचकारी लेने के लिए जिद करते नजर आए। कपड़ों की दुकानों और रेडीमेड शोरूम में भी रौनक कम नहीं थी। होली मिलन और रिश्तेदारी में जाने के लिए लोग नए कपड़े खरीदते दिखे। दुकानदारों के मुताबिक दोपहर बाद बिक्री में और तेजी आई। महिलाओं ने घरों में बनने वाले पकवानों की तैयारी के लिए रेडीमेड चिप्स, पापड़, नमकीन और मिठाइयों की जमकर खरीदारी की। किराना दुकानों पर सूखे मेवे और मसालों की मांग भी बढ़ी रही। हालांकि इस बार महंगाई साफ तौर पर महसूस की गई। रंग, पिचकारी और खाने-पीने के सामान के दाम पिछले साल की तुलना में अधिक रहे। कई ग्राहकों ने दाम ज्यादा होने की शिकायत भी की, लेकिन त्योहार की खुशी के आगे लोग ज्यादा मोलभाव करते नहीं दिखे। दुकानदारों ने भी मांग अधिक होने का हवाला देकर कीमतों में खास रियायत नहीं दी। सोमवार को सुबह शुरू हुआ खरीदारी का सिलसिला रात करीब 10 बजे तक चलता रहा। बाजारों में देर शाम तक रौनक बनी रही और पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।
गन्ने की बिक्री में उछाल, 50 रुपये तक पहुंची कीमत
होली पूजन के लिए गन्ने की मांग इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में रही। शहर के अलग-अलग स्थानों पर गन्ने की अस्थायी दुकानें सजी थीं। विक्रेताओं ने प्रति गन्ना 40 से 50 रुपये तक कीमत वसूली। कई लोगों ने इसे महंगा बताया, लेकिन परंपरा निभाने के लिए खरीदारी में कमी नहीं आई। धार्मिक मान्यता के अनुसार गन्ने में गेहूं और चने की बालियां बांधकर होलिका की परिक्रमा की जाती है। इसी आस्था के चलते लोगों ने दाम की परवाह किए बिना गन्ना खरीदा। दूकानदारों के अनुसार साल में यह एक ऐसा मौका होता है जब बिक्री अचानक बढ़ जाती है और कुछ ही घंटों में पूरा स्टॉक खत्म हो जाता है। कुल मिलाकर, महंगाई की चर्चा के बावजूद उन्नाव में होली की तैयारी पूरे उत्साह के साथ दिखाई दी। बाजारों की रौनक ने साफ कर दिया कि त्योहार लोगों के लिए सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि मिल-जुलकर खुशी बांटने का अवसर भी है।
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