कार्रवाई : बिना काम भुगतान के मामलें में गिरी गाज, डिप्टी सीवीओ भी हटाए गए
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Wed, Mar 18, 2026
विधान परिषद में मामला उठने के बाद तेज हुई कार्रवाई
अधूरे काम के बावजूद पूरा भुगतान, अन्य जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई की तैयारी
उन्नाव। जिले में पशु चिकित्सालयों के कायाकल्प के नाम पर खर्च किए गए सरकारी बजट में गड़बड़ी सामने आने के बाद अब कार्रवाई का दायरा बढ़ता जा रहा है। जिलास्तरीय जांच में दोषी पाए गए डिप्टी सीवीओ डॉ. संजय चतुर्वेदी को शासन ने लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। इस कार्रवाई को जांच रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया अहम कदम माना जा रहा है।यह मामला पहले भी सुर्खियों में रहा है। 18 जनवरी को विधान परिषद में इस मुद्दे को उठाते हुए कार्रवाई में हो रही देरी पर नाराजगी जताई गई थी। इसके बाद शासन स्तर पर हलचल तेज हुई और अब क्रमवार कार्रवाई की जा रही है। दरअसल, मार्च 2025 में जिले के 16 ब्लॉकों में स्थित पशु चिकित्सालयों के मरम्मत और रंग-रोगन के लिए करीब 13.80 लाख रुपये का बजट जारी किया गया था। उद्देश्य था कि अस्पतालों की स्थिति सुधरे और पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं मिलें। लेकिन जांच में सामने आया कि कई जगह काम पूरा होने से पहले ही भुगतान कर दिया गया। शहर के एक पशु चिकित्सालय में तो बिना कोई कार्य कराए ही करीब 90 हजार रुपये जारी कर दिए गए। वहीं सिकंदरपुर कर्ण, अचलगंज और सुमेरपुर क्षेत्रों में भी अधूरे कार्य पाए गए। कई स्थानों पर टाइल्स तक नहीं लगीं, लेकिन कागजों में पूरा काम दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया। सिर्फ निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि सामान की खरीद में भी गंभीर अनियमितताएं मिलीं। जांच में पाया गया कि सामान्य उपयोग की वस्तुएं बाजार भाव से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं। उदाहरण के तौर पर 30 रुपये की झाड़ू 300 रुपये में और 100 रुपये का डस्टर 1000 रुपये में खरीदा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी गौरांग राठी के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। इसमें जिला विकास अधिकारी, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता और कोषाधिकारी शामिल थे। समिति की रिपोर्ट में कई स्तरों पर लापरवाही और वित्तीय गड़बड़ियों की पुष्टि हुई। जिलाधिकारी ने रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन सीवीओ डॉ. महावीर सिंह, डिप्टी सीवीओ डॉ. संजय चतुर्वेदी और पशु चिकित्साधिकारी शरद शाक्य के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी थी। इनमें से तत्कालीन सीवीओ पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। डिप्टी सीवीओ पर कार्रवाई में देरी को लेकर एमएलसी डॉ. मान सिंह ने विधान परिषद में सवाल उठाया था। इसके बाद 17 मार्च 2026 को पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. मेमपाल सिंह ने आदेश जारी करते हुए डॉ. संजय चतुर्वेदी को लखनऊ निदेशालय से संबद्ध कर दिया। इस प्रकरण में सीवीओ कार्यालय की वरिष्ठ सहायक व प्रभारी अकाउंटेंट प्रीति श्रीवास्तव को नवंबर 2025 में ही निलंबित किया जा चुका है। वहीं, जांच में नाम आने के बाद पशु चिकित्साधिकारी शरद शाक्य पर भी जल्द कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।जिला पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई जिलाधिकारी द्वारा भेजी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है और शासन स्तर पर आगे की प्रक्रिया जारी है। पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में निगरानी कितनी कमजोर है। बिना काम भुगतान, अधूरे निर्माण और खरीद में गड़बड़ी जैसे मामलों ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। इसके अलावा स्लाटरों मे भी पशु विभाग की निगरानी और मीट फैक्ट्रियों के संचालकों को लाभ पहुंचाने को लेकर भी सवाल उठते हुए आए है अब देखना होगा कि बाकी जिम्मेदारों पर कब तक कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर किस तरह रोक लगाई जाती है।
Tags :
Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news
विज्ञापन
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन