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एम्बुलेंस बनी 'देवदूत' का प्रसूति कक्ष : बरेली में 102 स्टाफ ने चलती गाड़ी में कराया सुरक्षित प्रसव, जच्चा-बच्चा सकुशल

मुनीश गुप्ता

Fri, Nov 28, 2025
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सरकारी स्वास्थ्य सेवा पर बढ़ा भरोसा, परिजनों ने 'जीवनदायिनी प्रयास' के लिए स्टाफ को सराहा

बरेली, उत्तर प्रदेश : सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता का एक अद्भुत उदाहरण बुधवार देर रात बरेली में देखने को मिला, जब 102 एम्बुलेंस के प्रशिक्षित स्टाफ ने विषम परिस्थितियों में एक प्रसूता का चलती गाड़ी को सड़क किनारे रोककर सुरक्षित प्रसव कराया। यह घटना न केवल सरकारी एम्बुलेंस सेवा की महत्ता को रेखांकित करती है, बल्कि इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) और पायलट के व्यावसायिक कौशल और कर्तव्यनिष्ठा को भी दर्शाती है।

🤰🏻 घटनाक्रम: रात 3 बजे की आपातकालीन कॉल

यह हृदयस्पर्शी घटना बरेली के ब्लॉक क्यारा अंतर्गत ग्राम फतेहपुर की है। बुधवार को अर्धरात्रि के बाद, लगभग तड़के 3 बजे, 29 वर्षीय सीता पत्नी दिनेश पाल को असहनीय प्रसव पीड़ा शुरू हुई। ग्रामीण क्षेत्र में तत्काल मदद की आवश्यकता को समझते हुए, प्रसूता के पति ने तुरंत आशा कार्यकत्री सुनीता के माध्यम से 102 कॉल सेंटर पर सूचना दी।

सूचना मिलते ही, UP32EG7240 नंबर की 102 एम्बुलेंस बिना किसी देरी के गांव पहुंची। स्टाफ ने तुरंत प्रसूता को अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया शुरू की।

🛣️ चलती एम्बुलेंस में गूंजी किलकारी

गांव से जिला अस्पताल ले जाने के दौरान, प्रसूता सीता की पीड़ा अत्यधिक बढ़ गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि अस्पताल पहुँचना संभव नहीं होगा। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए, एम्बुलेंस पर तैनात इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) अवनीश ने तुरंत निर्णय लिया। उन्होंने पायलट अरुण को निर्देश दिया कि एम्बुलेंस को तत्काल सड़क किनारे सुरक्षित स्थान पर रोका जाए।

सड़क किनारे रुकी एम्बुलेंस पल भर में एक आपातकालीन प्रसूति कक्ष (Delivery Room) में बदल गई। EMT अवनीश ने अपने प्रशिक्षण और अनुभव का उपयोग करते हुए, पूरी कुशलता और धैर्य के साथ एम्बुलेंस के भीतर ही प्रसव की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।

जच्चा-बच्चा पूरी तरह सुरक्षित

ईश्वर और स्टाफ की मेहनत रंग लाई—एम्बुलेंस में एक स्वस्थ बच्चे की किलकारी गूंज उठी। प्रसव के बाद, जच्चा (सीता) और नवजात शिशु दोनों को पूरी तरह सुरक्षित पाया गया। प्राथमिक उपचार देने के बाद, स्टाफ ने बच्चे को उसके खुशी से झूमते परिजनों की गोद में सौंपा।

इसके उपरांत, माँ और बच्चे को आगे की देखभाल के लिए तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के स्टाफ नर्स ने भी दोनों को सुरक्षित और स्वस्थ घोषित किया।

🙏🏻 परिजनों ने स्टाफ को बताया 'देवदूत'

इस सुखद परिणाम से परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने एम्बुलेंस स्टाफ—EMT अवनीश और पायलट अरुण—की जमकर प्रशंसा की। भावुक परिजनों ने इस प्रयास को "जीवन दायनी प्रयास" बताते हुए उनकी कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की।

इस अवसर पर, एम्बुलेंस स्टाफ ने अपनी सेवा भावना को व्यक्त करते हुए कहा, "किसी भी दशा में जनसुरक्षा व सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है।"

💡 निष्कर्ष और महत्व

यह घटना दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश में सरकारी 102 एम्बुलेंस सेवा सिर्फ एक परिवहन का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए एक विश्वसनीय जीवनरक्षक इकाई के रूप में कार्य कर रही है। प्रशिक्षित स्टाफ की तत्काल निर्णय लेने की क्षमता और मानवीय दृष्टिकोण ने इस महत्वपूर्ण क्षण को एक यादगार और सफल घटना बना दिया है, जिससे आमजन का सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर भरोसा और मजबूत हुआ है।

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