NH पर तड़पता रहा घायल, पुलिस एक घंटे देर से पहुँची : तेज रफ्तार की कीमत,एक युवक घायल, दूसरा बाइक छोड़ फरार; सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल
मुनीश गुप्ता
Fri, Nov 28, 2025
उत्तर प्रदेश बरेली : दरअसल जनपद के फरीदपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुक्रवार की सुबह रफ्तार और लापरवाही का एक खौफनाक मंज़र देखने को मिला, जिसने न सिर्फ एक युवक को गंभीर रूप से घायल कर दिया, बल्कि सड़क सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रातः 10 बजे, फरीदपुर क्षेत्र में हरियाली पंप के सामने, रोजमर्रा की तरह ट्रैफिक सामान्य गति से चल रहा था। इसी दौरान, फरीदपुर से द्वारिकेश की ओर जा रहे पंकज पुत्र नन्हू निवासी केसरपुर की मोटरसाइकिल को पीछे से आ रही एक अनियंत्रित और तेज गति वाली बाइक ने ज़ोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि पंकज अपनी बाइक से उछलकर दूर जा गिरे और सड़क पर खून से लथपथ तड़पने लगे।
तेज रफ्तार का भूत और मानवता का पलायन
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर मारने वाला दूसरा बाइक चालक इतनी हड़बड़ी में था कि उसने घायल को देखने की ज़हमत भी नहीं उठाई। दुर्घटना की भयावहता देख वह अपनी मोटरसाइकिल मौके पर ही छोड़कर तुरंत फरार हो गया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि तेज रफ्तार का शौक रखने वाले अक्सर जिम्मेदारी के नाम पर शून्य होते हैं।
एक घंटा इंतज़ार और तड़पता जीवन
हादसे की आवाज़ सुनकर आस-पास के लोग तुरंत मौके पर जमा हो गए। लोगों ने तत्काल पीआरबी 112 और एम्बुलेंस को सूचित किया। एम्बुलेंस तो जल्द ही मौके पर पहुँच गई, लेकिन यहाँ एक अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई। स्थानीय लोगों ने पुलिस की मौजूदगी के बिना घायल को अस्पताल भेजने से साफ़ इनकार कर दिया, जिसके कारण घायल पंकज सड़क पर तड़पता रहा और कीमती समय बर्बाद होता रहा।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सूचना दिए जाने के पूरे एक घंटे बाद पीआरबी 112 के कर्मी मौके पर पहुँचे। इसके बाद, पुलिस की देखरेख में घायल पंकज को उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र फरीदपुर भेजा गया।
सवाल यह है: क्या एक सड़क दुर्घटना में, जहाँ जीवन-मरण का प्रश्न हो, कागज़ी कार्यवाही के लिए इतना लंबा इंतज़ार जायज़ है? अगर एम्बुलेंस मौजूद थी, तो प्राथमिक उपचार और तत्काल अस्पताल ले जाने में एक घंटे की देरी क्यों हुई? यह घटना हमारी आपातकालीन सेवाओं की धीमी प्रतिक्रिया को उजागर करती है, जहाँ हर मिनट कीमती होता है।
⚠️ आपके लिए सबक: सड़क पर कैसे बनें ज़िम्मेदार?
यह दुर्घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि हम सबके लिए एक चेतावनी है। भारत में हर साल लाखों लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं। इस घटना से हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण सबक सीखने चाहिए:
1. गति नहीं, सुरक्षा जीवन है:
तेज गति (Over-speeding): दुर्घटना का मुख्य कारण अक्सर तेज गति होती है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर अपनी गति सीमा का सख्ती से पालन करें। याद रखें, आप कुछ मिनट बचाने के लिए अपनी और दूसरों की जान को खतरे में डालते हैं।
2. फ़ॉलोइंग डिस्टेंस का महत्व:
सुरक्षित दूरी बनाएँ: सड़क पर हमेशा आगे चल रहे वाहन से उचित दूरी बनाए रखें। पंकज को पीछे से टक्कर लगी, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि टक्कर मारने वाले चालक ने "सेफ फ़ॉलोइंग डिस्टेंस" (Safe Following Distance) के नियम का उल्लंघन किया था। ब्रेक लगाने के लिए पर्याप्त समय देना अनिवार्य है।
3. 'गोल्डन आवर' को समझें (Golden Hour):
तत्काल सहायता: दुर्घटना के बाद का पहला घंटा 'गोल्डन आवर' कहलाता है। इस दौरान घायल को सही इलाज मिलने से जान बचने की संभावना सबसे अधिक होती है। लोगों को पुलिस के इंतज़ार के बजाय, एम्बुलेंस की मदद से तत्काल घायल को नजदीकी अस्पताल पहुँचाना चाहिए। जीवन बचाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
फ़रार होना अपराध: हादसे के बाद मौके से भाग जाना न सिर्फ कानूनी अपराध है, बल्कि यह अमानवीय कृत्य भी है। दुर्घटना में शामिल होने पर रुकें और मदद करें।
रोड पर हर कदम जिम्मेदारी का प्रतीक होना चाहिए। आपकी एक छोटी सी लापरवाही किसी का जीवन तबाह कर सकती है। सुरक्षित चलें, ज़िम्मेदार बनें!
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