जनगणना 2027 की तैयारियां तेज : इस बार होगी पूरी तरह डिजिटल
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Sat, Feb 28, 2026
22 मई 2026 से शुरू होगा मकान सूचीकरण, फरवरी 2027 में होगी जनसंख्या गणना
उन्नाव। देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद मानी जाने वाली जनगणना 2027 की तैयारी अब जिले में जमीन पर उतरने लगी है। कलेक्ट्रेट के पन्नालाल सभागार में एडीएम वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता में जनगणना से जुड़े अधिकारियों को विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। बैठक का मकसद साफ था, इस बार की प्रक्रिया पारंपरिक तरीके से अलग होगी और पूरी व्यवस्था डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित रहेगी।
दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया
प्रशिक्षण में बताया गया कि जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी। पहला चरण 22 मई से 20 जून 2026 तक चलेगा। इस दौरान मकानों की सूची तैयार की जाएगी और प्रत्येक भवन का विवरण दर्ज किया जाएगा। दूसरे चरण की शुरुआत 9 फरवरी 2027 से होगी, जो 28 फरवरी 2027 तक चलेगा। इस चरण में परिवारों और व्यक्तियों से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पहले चरण में मकान सूचीकरण और भवन गणना सबसे अहम काम होगा, क्योंकि इसी आधार पर आगे की जनसंख्या गणना की रूपरेखा तय होगी।
अधिकारियों की जिम्मेदारी तय
जिला जनगणना प्रभारी उमाशंकर ने प्रशिक्षण सत्र में तहसीलदारों और अधिशासी अधिकारियों की भूमिका विस्तार से समझाई। उन्हें चार्ज अधिकारी के रूप में क्षेत्रवार जिम्मेदारी दी जाएगी। फील्ड ट्रेनरों की तैयारी, प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति, उनका डाटा तैयार करना और उसे ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी रहेगी। साथ ही यह भी बताया गया कि मकान सूचीकरण के काम की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
जिला स्तरीय समन्वय समिति गठित
जनगणना को सुचारु ढंग से पूरा कराने के लिए जिला स्तरीय जनगणना समन्वय समिति का गठन किया गया है। यह समिति पूरे अभियान की निगरानी करेगी और विभागों के बीच तालमेल बनाए रखेगी। प्रशासन का फोकस है कि समयसीमा के भीतर सभी तैयारियां पूरी हों।
पहली बार डिजिटल और स्वगणना का विकल्प
इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी खासियत इसका डिजिटल स्वरूप है। प्रबंधन और निगरानी सीएम एमएस पोर्टल के जरिए की जाएगी। खास बात यह है कि पहली बार परिवारों को वेब पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प मिलेगा। यानी लोग चाहें तो घर बैठे अपनी गणना खुद कर सकते हैं। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि स्वगणना के बाद भी संबंधित प्रगणक मौके पर जाकर जानकारी का सत्यापन करेंगे और उसे अंतिम रूप देंगे। इससे आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित की जाएगी।
क्यों अहम है यह कवायद
जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही केंद्र और राज्य सरकारें नीतियां बनाती हैं, योजनाओं का बजट तय होता है और संसाधनों का बंटवारा होता है। ऐसे में प्रशासन इस प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और सटीकता के साथ पूरा करना चाहता है।उन्नाव में प्रशिक्षण की शुरुआत के साथ यह साफ संकेत मिल गया है कि आने वाले महीनों में प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह इस अभियान में जुटने वाली है। अब चुनौती यही है कि डिजिटल सिस्टम और जमीनी अमले के बीच तालमेल बनाकर समय पर और त्रुटिरहित जनगणना पूरी की जाए।
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