प्रदूषण पर बवाल : सिंगरोसी के ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे, रिमझिम सरिया फैक्ट्री की जांच और बंदी की मांग
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Tue, Feb 24, 2026
फैक्ट्री के लाइसेंस और निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल

उन्नाव। अकरमपुर औद्योगिक क्षेत्र के सिंगरोसी गांव में कथित प्रदूषण को लेकर मंगलवार को ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया। गांव के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुरेंद्र कुशवाहा ने किया। ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक जिलाधिकारी से सीधी बातचीत नहीं होगी, वे वहां से हटेंगे नहीं।ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के पास चल रही रिमझिम सरिया फैक्ट्री से निकलने वाला कीचड़, गंदा पानी और धातु की महीन धूल उनके लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। उनका कहना है कि फैक्ट्री का अपशिष्ट आसपास की खाली जमीन और रास्तों में फैल रहा है, जिससे कई जगह दलदल जैसी स्थिति बन गई है। बरसात न होने के बावजूद जमीन गीली और चिपचिपी बनी रहती है।
“घर में रहना मुश्किल हो गया”
धरने में शामिल लोगों ने बताया कि सुबह उठते ही घरों की छतों, आंगन और खिड़कियों पर लोहे जैसी काली धूल की परत दिखती है। पेड़-पौधों की पत्तियां ढक जाती हैं और खेतों में खड़ी फसल पर भी असर दिखने लगा है। किसानों का कहना है कि पत्तियों पर जमी यह परत फसल की बढ़वार को प्रभावित कर रही है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि खुले में सुखाई जाने वाली खाने-पीने की चीजें भी सुरक्षित नहीं रह गई हैं। होली के लिए बनाए जा रहे पापड़ तक पर काले कण जम जा रहे हैं। उनका कहना है कि रंग और स्वाद में फर्क आ जाता है, यहां तक कि पशु भी उन्हें नहीं खाते। कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि प्रदूषण की वजह से दो लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लोगों ने मांग की कि स्वास्थ्य विभाग से जांच कराई जाए ताकि स्थिति साफ हो सके।
तालाब का पानी बदला, मछलियां मरीं
ग्रामीणों ने गांव के पास स्थित पुराने तालाब का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि तालाब का पानी अब पहले जैसा नहीं रहा। रंग और गंध में बदलाव आया है। हाल के दिनों में तालाब में मछलियों के मरने की घटनाएं सामने आईं। कुछ पशु भी यह पानी पीने के बाद बीमार पड़े और मर गए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह बड़ा पर्यावरणीय संकट बन सकता है।
लाइसेंस और संरक्षण पर सवाल
धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने रिमझिम फैक्ट्री के लाइसेंस और संचालन को लेकर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि अगर फैक्ट्री मानकों के तहत चल रही है तो गांव में इतनी गंदगी और धूल कैसे फैल रही है। उन्होंने पूछा कि आखिर इसे अनुमति किस आधार पर दी गई और इसकी निगरानी कौन कर रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी कई बार जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका दावा है कि जिलाधिकारी को तीन दिन पहले ही मिलने की सूचना दे दी गई थी, फिर भी मुलाकात नहीं हो सकी।
प्रशासन का आश्वासन, ग्रामीण अड़े
धरने के दौरान एडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। अधिकारियों ने जांच और समाधान का भरोसा दिलाया। इसके बावजूद ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे कि जब तक जिलाधिकारी स्वयं आकर बात नहीं करेंगे, वे धरना खत्म नहीं करेंगे।
प्रशासन की परीक्षा, कार्रवाई पर टिकी नजरें
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित फैक्ट्री की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, प्रदूषण नियंत्रण मानकों की समीक्षा हो और यदि उल्लंघन पाया जाए तो फैक्ट्री को बंद किया जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। मामला अब प्रशासन के सामने खुलकर आ चुका है। आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर है। अगर जांच में ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक गांव का मुद्दा नहीं रहेगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करेगा।
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