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अमृत योजना की हकीकत : साल दर साल बीते पर हर घर नल का सपना अब भी अधूरा, लीकेज और देरी ने खोली पोल

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Mon, Dec 29, 2025
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तीन बार जुर्माना, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था, नगर पालिका पुरानी योजना पर निर्भर

उन्नाव। शहर को शुद्ध पेयजल देने के लिए शुरू की गई 264 करोड़ रुपये की अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन यानी अमृत योजना अब सवालों के घेरे में है। योजना को शुरू हुए करीब पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन शहर के हर घर तक नल से पानी पहुंचाने का सपना अब तक अधूरा है। कहीं पाइप लाइन फूट रही है तो कहीं लीकेज, और कहीं टेस्टिंग ही पूरी नहीं हो पा रही। हालात ऐसे हैं कि नगर पालिका ने फिलहाल इस योजना को अपने हाथ में लेने से साफ इन्कार कर दिया है। यह योजना वर्ष 2018 में मंजूर हुई थी। लक्ष्य था कि शहर के सभी 32 वार्डों के 30 हजार से ज्यादा घरों तक गंगा नदी का शुद्ध पानी पहुंचाया जाए। इसके लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया और पूरे शहर में नई पाइप लाइनें बिछाई गईं। तय समय सीमा 2020 रखी गई थी, लेकिन पहले कोरोना महामारी और फिर बजट व तकनीकी कारणों से काम लगातार लटकता चला गया। जल निगम का कहना है कि शहर को 10 जोन में बांटा गया है, जिनमें से सात जोन की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है और तीन जोन में काम अंतिम चरण में है। विभाग का दावा है कि शेखपुर और अकरमपुर वार्ड में जलापूर्ति भी शुरू कर दी गई है। इसके बावजूद सच्चाई यह है कि टेस्टिंग के दौरान ही दो महीने में 18 जगह पाइप लाइन में लीकेज सामने आ चुके हैं। कई इलाकों में सड़कें खोदने के बाद मरम्मत तक नहीं की गई, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ी है। नगर पालिका का साफ कहना है कि जब तक पूरी व्यवस्था ठीक से और लगातार नहीं चलेगी, तब तक योजना को हैंडओवर नहीं लिया जाएगा। नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा के अनुसार, अभी किसी भी जोन में नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है। जहां काम पूरा बताया जा रहा है, वहां भी आए दिन लीकेज सामने आ रहे हैं। ऐसे में पालिका अपनी पुरानी व्यवस्था पर ही निर्भर है और 24 ट्यूबवेलों के जरिए पानी की आपूर्ति कर रही है। पेयजल संकट से निपटने के लिए नगर पालिका को अलग से भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। ट्यूबवेलों के स्पेयर पार्ट्स पर करीब 25 लाख रुपये, पाइप लाइन मरम्मत पर 45 लाख, 32 वार्डों और सार्वजनिक स्थानों पर मिनी टंकियां और सबमर्सिबल लगाने पर 50 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा ट्यूबवेलों में क्लोरीन डोजर लगाने पर भी लाखों रुपये खर्च हुए हैं। नगर पालिका का कहना है कि अगर अमृत योजना समय से और सही ढंग से चल जाती तो यह अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना पड़ता। लगातार देरी और गड़बड़ियों को लेकर जल निगम ने काम करा रही निर्माण एजेंसी पर अब तक तीन बार जुर्माना लगाया है। जून 2023 में सड़कों की मरम्मत न कराने और गलत रिपोर्ट देने पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके बाद नवंबर 2023 में लेटलतीफी को लेकर 5.50 करोड़ रुपये और सितंबर 2024 में फिर 5.90 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके बावजूद काम की रफ्तार और गुणवत्ता को लेकर सवाल बने हुए हैं। दिसंबर महीने में सिविल लाइंस क्षेत्र में करीब 15 दिन तक टेस्टिंग पूरी तरह ठप रही। जल निगम के अधिकारियों का कहना है कि उस दौरान गंगा नदी में जलस्तर कम होने से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा था। बाद में मोटर पंप को नीचे किए जाने के बाद स्थिति में सुधार होने का दावा किया गया है। इस पूरे मामले में अब जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। डीएम गौरांग राठी ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए निकाय प्रभारी एडीएम अमिताभ यादव के नेतृत्व में जांच टीम बनाई है। टीम को निर्देश दिए गए हैं कि जल निगम जिन जोनों को पूरी तरह तैयार बता रहा है, उनका दोबारा सर्वे कराया जाए और जहां भी खामियां हों, उन्हें ठीक कराया जाए। वहीं, योजना पर काम कर रही निर्माण कंपनी का कहना है कि उस पर लगाए गए जुर्मानों के बाद काम की गति और गुणवत्ता दोनों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कंपनी के प्रतिनिधियों का दावा है कि अधिकांश तकनीकी समस्याएं दूर कर ली गई हैं और शेष तीन जोनों का काम भी तय समय के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। उनका कहना है कि लीकेज जैसी समस्याएं बड़े प्रोजेक्ट में शुरुआती दौर में सामने आती हैं, जिन्हें टेस्टिंग के दौरान ठीक किया जा रहा है। कंपनी का भरोसा है कि अगले कुछ महीनों में पूरी योजना स्थायी रूप से सुचारू हो जाएगी। फिलहाल शहरवासियों के लिए हकीकत यही है कि करोड़ों की लागत वाली अमृत योजना अभी कागजों और दावों में आगे दिख रही है, लेकिन जमीन पर लोगों को अब भी ट्यूबवेल के पानी से ही काम चलाना पड़ रहा है। अब सबकी नजर प्रशासन की जांच और आगे होने वाले सुधार पर टिकी है, जिससे यह तय हो सके कि उन्नाव को शुद्ध पेयजल का सपना कब हकीकत बनेगा।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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