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: शाहजहांपुर बतलैया में शांति और सौहार्द के साथ अदा की गई ईद उल फितर की नमाज, वहीं देश में अमन चैन के लिए दुआ की गई!

THE LUCKNOW TIMES

Mon, Mar 31, 2025
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शाहजहांपुर बतलैया में शांति और सौहार्द के साथ अदा की गई ईद उल फितर की नमाज, वहीं देश में अमन चैन के लिए दुआ की गई!

उत्तर प्रदेश शाहजहांपुर/बतलैया : दरअसल आज पूरे देश में रमजान खत्म होने के बाद ईद का त्यौहार बड़ी ही धूम धाम से मनाया जा रहा है, इसी के चला शाहजहांपुर के बतलैया में ईद की नमाज अदा की गई, जहां लोगों ने एक दूसरे को गले लगाकर ईद की शुभकामनाएं दी, आपको बता दें ईद-उल-फितर मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार है, जिसे मीठी ईद भी कहते हैं. ये त्योहार न सिर्फ इबादत और शुक्राना करने का दिन है, बल्कि ईद भाईचारा, मोहब्बत, वहदत (एकता) और खुशियों का पैगाम लेकर आती है,ईद के चांद का दीदार होने के साथ रमजान का पाक महीना पूरा हो जाता है. इस्लाम में माह-ए-रमजान बहुत अहमियत रखता है, जिसमें दुनियाभर के मुसलमान लगातार 29 या 30 दिनों तक अल्लाह की इबादत लगे रहते हैं और रोजे रखते हैं. रमजान इस्लामिक कैलेंडर (हिजरी) का नौंवा महीना होता है, जिसके बाद दसवां महीना यानी शव्वाल शुरू हो जाता है. हर साल शव्वाल महीने के पहले दिन ईद मनाई जाती है दरअसल, ईद-उल-फितर पर घर में मीठे पकवान और लगभग सभी घरों में सेवइयां बनाई जाती हैं. इसी वजह से इस ईद को मीठी ईद के नाम से जाना जाता है. ईद के दिन मुसलमान नए कपड़े पहनते हैं इत्र लगाते हैं, ईद की नमाज अदा करते हैं और एक दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं,ऐसा कहा जाता है कि ईद मनाने की शुरुआत पहली बार 2 हिजरी यानी 624 ईस्वी में हुई थी. 624 ईस्वी में पैगंबर हजरत मुहम्मद ने बद्र की लड़ाई में जीत हासिल की थी और अपनी जीत की खुशी में उन्होंने लोगों का मुंह मीठा करवाया था. तभी से ही ईद-उल-फितर की शुरुआत पैगंबर मुहम्मद ने मक्का छोड़ने के बाद मदीना में हुई, जानकारी के अनुसार, अल्लाह की तरफ से तोहफा रमजान के पूरे महीने में रोजे रखने, रात की तरावीह पढ़ने और अल्लाह की इबादत में मशगूल रहने की खुशी में ईद मनाई जाती है. कुरान के मुताबिक, रोजेदारों के लिए ईद अल्लाह की तरफ से मिलने वाले तोहफा माना जाता है. माह-ए-रमजान मुकम्मल होने की खुशी में मुसलमान हर साल ईद मनाते हैं.

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