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: छह साल से जनता को कब तक मिलेगा सिर्फ “दो महीने और” का भरोसा, अधर में अमृत योजना

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Sat, Aug 30, 2025
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नलों से न पानी, सड़कों पर सिर्फ गड्ढे

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

उन्नाव। अमृत योजना की डेडलाइन फरवरी 2020 थी, लेकिन हर बार अफसर सिर्फ दो महीने का समय और मांगते रहे। छह साल गुजर गए, मगर हालात जस के तस हैं। नलों से पानी अब भी नहीं आ रहा और सड़कें गड्ढों से भरी पड़ी हैं। जनता सवाल कर रही है— क्या यह “दो महीने और” का सिलसिला कभी खत्म होगा? बता दें कि 264 करोड़ की महत्वाकांक्षी अटल मिशन आफ रेजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत योजना) शहरवासियों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। 2018 में मंजूर योजना का लक्ष्य था हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना और टूटी सड़कों की मरम्मत करना। तय डेडलाइन फरवरी 2020 थी, लेकिन छह साल गुजरने के बाद भी शहरवासियों को न तो पानी मिल सका और न सड़कें ठीक हुईं। बुधवार को नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर 183 जर्जर सड़कों की मरम्मत के लिए 10 करोड़ रुपये की मांग रखी, जिस पर मुख्यमंत्री ने बजट देने का आश्वासन दिया।

सड़कें खोदीं, मरम्मत अधूरी

जल निगम ने 175 किलोमीटर भूमिगत पाइप लाइन डालने के लिए शहर की 322 सड़कें खोदीं। परंतु मरम्मत अधूरी छोड़ दी गई। नगर पालिका के बार-बार नोटिस देने के बावजूद केवल खानापूर्ति की गई। नतीजा, आज भी 183 सड़कें खस्ताहाल बनी हैं। बरसात में इन सड़कों पर गड्ढे तालाब का रूप ले लेते हैं। गर्मी में धूल उड़ने से लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। व्यापारियों का कहना है कि टूटी सड़कों के कारण उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। राहगीर और वाहन चालक आए दिन हादसों का शिकार बन रहे हैं।

जुर्माने का भी असर नहीं

निर्माण एजेंसी और जल निगम की लापरवाही पर कई बार भारी जुर्माना लगाया गया, मगर काम की रफ्तार पर कोई असर नहीं पड़ा। जुर्माना भरने के बाद भी ठेकेदारों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। काम रोकने या ब्लैकलिस्ट करने की बजाय उन्हें बार-बार नए मौके दिए जाते रहे। नतीजा यह हुआ कि सड़कों की हालत जस की तस रही और जनता परेशान होती रही। शहरवासियों का कहना है कि जुर्माना वसूलना सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है।

जुर्मानों का ब्यौरा

जून 2023 : ₹1 करोड़ (गलत रिपोर्ट व मरम्मत न कराने पर) नवंबर 2023 : ₹5.50 करोड़ (काम में देरी पर) सितंबर 2024 : ₹5.90 करोड़ (समय सीमा चूकने पर) कुल ₹12.40 करोड़ का जुर्माना लग चुका, लेकिन हालात जस के तस।

अधूरी रही योजना की डेडलाइन

कुल लागत: ₹264 करोड़ ढांचा: 80 एमएलडी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, 14 ओवरहेड व 14 अंडरग्राउंड टैंक लक्ष्य: फरवरी 2020 तक 10 जोनों में 3,292 घरों को जलापूर्ति हकीकत: आज भी अफसर कहते हैं— “दो महीने और।”

पालिका का आरोप बनाम जल निगम का दावा

पालिका का आरोप नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा ने बताया कि पाइप लाइन डालने के बाद सड़कें ठीक से नहीं बनीं, लीकेज लगातार बनी हुई है। इतनी बड़ी मरम्मत का बजट पालिका के पास नहीं है, इसलिए मुख्यमंत्री से 10 करोड़ रुपये मांगे हैं। जल निगम कुछ महीने लगातार जलापूर्ति कर दिखाए, तभी परियोजना ली जाएगी।

जल निगम का दावा

जल निगम एक्सईएन पंकज रंजन झा का कहना है कि जितनी सड़कें खोदी गईं, उनकी मरम्मत करा दी गई है। नगर पालिका के कहने पर कई जगह नई सीसी सड़कें भी बनाई गईं। अब तक 10 में से 7 जोनों का काम पूरा हो चुका है और रोज टेस्टिंग हो रही है। बाकी तीन जोनों की जांच भी जल्द पूरी होगी।

जनता की परेशानी

घर-घर नलों से पानी नहीं हर मोहल्ले में टूटी सड़कें बारिश में कीचड़, गर्मी में धूल आए दिन हादसों का खतरा दुकानदारों का कारोबार प्रभावित मरीजों और स्कूली बच्चों को आने-जाने में दिक्कत गड्ढों से भरी सड़कें एंबुलेंस तक रोक देती हैं

जनता पूछ रही सवाल

जनता सवाल कर रही है कि आखिर इतनी बड़ी योजना का फायदा किसे मिला। पाइपलाइन और टैंकों पर करोड़ों खर्च हुए, लेकिन नलों से अब भी पानी नहीं टपका। लोगों का कहना है कि योजनाओं का बोझ जनता पर और मुनाफा ठेकेदारों पर जा रहा है। विकास के नाम पर केवल खोदी गई सड़कें और अधूरी परियोजनाएं ही नजर आ रही हैं। जुर्मानों के बावजूद ठेकेदार और एजेंसी बेलगाम क्यों है ? जल निगम का ठेकेदारों पर इतना लचीलापन क्यों है ? छह साल से जनता को आखिर कब तक “दो महीने और” का भरोसा दिया जाएगा?

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