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: फतेहपुर में पुलिस की बर्बरता: महिलाओं से दुर्व्यवहार, घर में तोड़फोड़ और कानूनी मर्यादाओं का चीरहरण, उठे सवाल!

THE LUCKNOW TIMES

Wed, Sep 10, 2025
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फतेहपुर में पुलिस की बर्बरता: महिलाओं से दुर्व्यवहार, घर में तोड़फोड़ और कानूनी मर्यादाओं का चीरहरण, उठे सवाल!

  उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद अंतर्गत थाना थरियांव क्षेत्र के ग्राम केशवपुर/जयचंद्रपुर से एक बेहद शर्मनाक और चिंता जनक मामला सामने आया है। दो पक्षों के बीच हुई मारपीट की घटना के बाद न्याय की आस में चौकी पहुंचे पीड़ित परिवार को वहां न केवल निराशा हाथ लगी, बल्कि पुलिसिया अत्याचार का भी सामना करना पड़ा। पीड़ितों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि चौकी में न सिर्फ उन्हें गाली-गलौज कर अपमानित किया गया, बल्कि शारीरिक रूप से भी मारा-पीटा गया। यही नहीं, रात को पुलिसकर्मी खुद पीड़ितों के घर पहुंच गए और महिलाओं के साथ अमानवीय व्यवहार करते हुए घर में जबरन घुसकर तोड़फोड़ की।   पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के दिन शाम को वे विवाद की सूचना देने और न्याय की गुहार लगाने हसवा चौकी पहुंचे थे, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी कोई सुनवाई नहीं की। उल्टा उन्हें अपशब्द कहते हुए बुरी तरह पीटा गया और चौकी में ही बैठा लिया गया। परिवार का आरोप है कि पुलिस शुरू से ही एकतरफा कार्रवाई कर रही थी और पीड़ित को ही दोषी मानकर प्रताड़ित कर रही थी।   चौंकाने वाली बात यह रही कि उसी रात लगभग 8 बजे थरियांव थाना और हसवा चौकी की पुलिस पीड़ित के घर पर जा पहुंची। आरोप है कि बिना किसी महिला पुलिसकर्मी के, पुरुष पुलिसकर्मी घर के अंदर जबरन घुस आए और वहां मौजूद महिलाओं व युवतियों को गंदी-गंदी गालियां दीं। जब कुछ परिजन और ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और वीडियो बनाना शुरू किया, तो पुलिसकर्मियों ने दबाव बनाते हुए महिलाओं की तलाशी लेना शुरू कर दी, जो न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि मानवीय गरिमा के भी खिलाफ है।   परिवार के सदस्यों ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने घर में भयंकर तोड़फोड़ की। रसोई में रखे बर्तन फेंक दिए गए, चूल्हा तोड़ दिया गया, खटिया और दरवाजे तक तहस-नहस कर दिए गए। घर का हर कोना बिखरा पड़ा मिला। यह सारा कृत्य न केवल सत्ता की ताकत का दुरुपयोग है, बल्कि सीधे-सीधे आम नागरिकों के मूल अधिकारों पर हमला है।   घटना के बाद से पूरा गांव भय और आक्रोश के माहौल में है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस ही इस तरह का बर्ताव करेगी, तो आम जनता कहां जाएगी? क्या अब न्याय की मांग करना भी अपराध बन गया है? गांव के कई लोगों ने इस घटना की निंदा करते हुए उच्च अधिकारियों से तत्काल निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।   इस घटना के फोटो और वीडियो साक्ष्य पीड़ित परिवार के पास मौजूद हैं, जिसमें पुलिसकर्मियों की बर्बरता स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। इन साक्ष्यों को प्रशासन और मीडिया के सामने प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है। लोगों का कहना है कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता, तब तक गांव की शांति और न्याय व्यवस्था दोनों खतरे में रहेंगी।   स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने भी इस घटना को अत्यंत निंदनीय और लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। उनका कहना है कि पुलिस की जवाबदेही तय होना जरूरी है, ताकि जनता का कानून पर भरोसा बना रहे।   अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इस घटना को गंभीरता से लेगा और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी बाकी घटनाओं की तरह फाइलों में दब जाएगा? फिलहाल पूरा क्षेत्र इस घटना से आहत और आंदोलित है, और हर कोई न्याय की प्रतीक्षा में है।

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