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: जिला अस्पताल में मरीजों को सीटी स्कैन कराने के लिए, सी एम एस के हस्ताक्षर की आज्ञा लेनी होगी-मोहम्मद ज़फ़र

THE LUCKNOW TIMES

Sat, Sep 6, 2025
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जिला अस्पताल में मरीजों को सीटी स्कैन कराने के लिए, सी एम एस के हस्ताक्षर की आज्ञा लेनी होगी-मोहम्मद ज़फ़र

 

रिपोर्ट:- आसिम अज़ीज़ 

  उत्तर प्रदेश रामपुर : दरअसल जनपद उत्तर प्रदेश आम आदमी पार्टी के शहर अध्यक्ष मोहम्मद ज़फ़र जिला अस्पताल रामपुर पहुँचे और वहाँ मरीजों की स्थिति का जायज़ा लिया। इस दौरान बड़ी संख्या में मरीजों और परिजनों ने यह गंभीर शिकायत रखी कि जिला अस्पताल में डॉक्टर द्वारा लिखे गए सीटी स्कैन को तब तक नहीं किया जा रहा है जब तक कि सीएमएस रामपुर अपने हस्ताक्षर नहीं कर देते। इस अनावश्यक प्रक्रिया के चलते मरीजों को 2 से 3 दिन तक लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है और धक्के खाने पड़ रहे हैं। हालत यह है कि इमरजेंसी केस में भी डॉक्टर द्वारा लिखे गए सीटी स्कैन तुरंत नहीं हो रहे और सीएमएस वीडियो कॉल के बाद ही मंज़ूरी देते हैं।   यह स्थिति न केवल अमानवीय है बल्कि पूर्णतः ग़ैर-क़ानूनी भी है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 (Right to Life) प्रत्येक नागरिक को गरिमा और स्वास्थ्य के साथ जीने का अधिकार देता है। इलाज में अनावश्यक देरी करना सीधे-सीधे इस मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। इसी प्रकार क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2010 के प्रावधान साफ़ कहते हैं कि प्रत्येक सरकारी अस्पताल बाध्य है कि वह समय पर और बिना भेदभाव के उपचार उपलब्ध कराए। इमरजेंसी मरीजों को रोकना या टालना इस कानून की खुली अवहेलना है।   साथ ही, Indian Medical Council (Professional Conduct, Etiquette and Ethics) Regulations, 2002 की धारा 2.4 के अनुसार यदि कोई डॉक्टर मरीज के इलाज में अनावश्यक देरी करता है या उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराता, तो यह चिकित्सकीय कदाचार (medical negligence) की श्रेणी में आता है। इस आधार पर सीएमएस की यह नीति कि बिना उनके साइन सीटी स्कैन न किया जाए, स्पष्ट रूप से मेडिकल एथिक्स और नियमावली का उल्लंघन है।   और भी गंभीर बात यह है कि सीटी स्कैन यूनिट के बाहर मौजूद कुछ कर्मचारी पैसों के लेन-देन के ज़रिए अवैध रूप से स्कैन करा रहे हैं। यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दंडनीय अपराध है। रामपुर जैसे ग़रीब तबके के शहर में जहाँ आम आदमी प्राइवेट अस्पतालों का महँगा खर्च नहीं उठा सकता, वहाँ जिला अस्पताल की यह लापरवाही बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। यह व्यवस्था ग़रीब और मरीज़ की मजबूरी का शोषण है।   मैं, मोहम्मद ज़फ़र, ज़िलाधिकारी महोदय और उच्च स्वास्थ्य प्रशासन से माँग करता हूँ कि तत्काल आदेश जारी कर डॉक्टर के लिखे पर्चे पर बिना किसी बाधा के सीटी स्कैन किया जाए। साथ ही अवैध वसूली करने वाले कर्मचारियों पर सख़्त कार्यवाही हो, और इमरजेंसी मामलों में मरीजों को प्राथमिकता देते हुए तुरंत स्कैन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। यदि इस मुद्दे पर शीघ्र संज्ञान नहीं लिया गया तो हम जनता के साथ मिलकर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे!

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