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: रिसॉर्ट पर कब्जे की खींचतान थमी नहीं, मामला पहुंचा प्रशासन तक

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Thu, Oct 30, 2025
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अधिकारियों ने की जांच, गुरुवार को फिर बुलाए गए दोनों पक्ष

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

उन्नाव। गदनखेड़ा के पास स्थित वसुंधरा रिसॉर्ट पर कब्जे को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। रिसॉर्ट की मालिकी को लेकर दो प्रभावशाली परिवारों के बीच पुरानी रंजिश मंगलवार को फिर से भड़क उठी। मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस को मौके पर पहुंचकर बीच-बचाव करना पड़ा। मामले में पहला पक्ष व्यापारी सुशील कुमार शुक्ला का है। उनका कहना है कि वह कुछ दिनों के लिए मुंबई अपनी बेटी के पास गए थे। लौटने पर देखा कि रिसॉर्ट का ताला टूटा हुआ है और अंदर तीन महिलाएं मौजूद हैं। जब उन्होंने पूछा कि वे वहां कैसे आईं, तो महिलाओं ने बताया कि प्रभात शुक्ला और सुरेंद्र कुमार बाजपेई ने उन्हें वहां रखा है। सुशील शुक्ला ने तुरंत डायल 112 पर कॉल की, जिसके बाद कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया। वहीं, दूसरे पक्ष ने पलटवार करते हुए महिलाओं से दुर्व्यवहार का आरोप लगाया और पुलिस को शिकायती पत्र दिया। इधर, सुशील शुक्ला का कहना है कि यह पूरा मामला एक साजिश के तहत रचा गया है। उनका कहना है कि हमने किसी महिला से बदसलूकी नहीं की, बल्कि हमें फंसाने की कोशिश की जा रही है। सुशील शुक्ला ने एसपी को दिया शिकायती पत्र, कोर्ट आदेश के बावजूद जबरन ताला तोड़कर दूसरों को किराए पर देने का आरोप लगाया है और जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग। दूसरे पक्ष की ओर से भी प्रार्थनापत्र देकर आरोप लगाया कि जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। बुधवार को जांच के लिए अतिरिक्त मजिस्ट्रेट रामदेव निषाद, सीओ सिटी दीपक यादव समेत अन्य अधिकारी रिसॉर्ट पहुंचे। दोनों पक्षों से उनके स्वामित्व के दस्तावेज मांगे गए। लेकिन कई घंटे की बातचीत के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ने बताया कि गुरुवार को फिर से दोनों पक्षों को कागजातों के साथ बुलाया गया है, जिसके बाद आगे की जांच की जाएगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गुरुवार को प्रशासन दोनों पक्षों के दस्तावेज देखने के बाद आखिर क्या फैसला लेता है। पूरे प्रकरण में स्थानीय लोगों का कहना है कि वसुंधरा रिसॉर्ट पर कब्जे को लेकर यह झगड़ा कई सालों से चल रहा है। उनका कहना है कि हर बार मामला शांत होता है, लेकिन कुछ महीनों बाद फिर से शुरू हो जाता है। लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि इस बार विवाद को स्थायी रूप से निपटाया जाए, वरना कभी भी बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।

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