: आमजन परेशानः सड़क किनारे अवैध रूप से चल रहीं मीट की दुकानें, प्रशासन नहीं कर पा रहा कोई कार्रवाई
Mon, Apr 21, 2025
किला चौकी क्षेत्र में घरों से बिक रहा भैंस का मांस
सैय्यद फैज़ान "शीबू" रहमान
उन्नाव। शहर में सड़क किनारे व धार्मिक स्थलों के आसपास अवैध तरीके से मीट की दुकानें खुली हुई है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। क्षेत्र में दर्जनों अवैध मीट की दुकाने संचालित है। इन अवैध दुकानों के कारण आमजन और राहगीर काफी परेशान है। इनकों लेकर भाजपा सरकार के जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन ने अभी तक मोर्चा भी नहीं खोल पाए है। इसी वजह से पालिका प्रशासन ने भी कार्रवाई शुरू नहीं कर पाई। जबकि यूपी में योगी सरकार प्रदेश में अवैध रूप से संचालित मीट की दुकानों पर कार्रवाई की आदेश दिए थे। लेकिन इसका असर शहर में नही दिखाई दे रहा है।
इन इलाकों में संचालित मीट की दूकानें
शहर के नगरपालिका एकल मुख्य मार्ग हाकिम टोला, ऊंटसार, कंजी, छोटा चौराहा, छिपयाना चौराहा, दरोगाबाग सहित कई कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी कर खुलेआम सड़क किनारे पर मांस बेचा जा रहा है। इन दुकानों पर मांस को बिना ढके रखे जाता है, जिन पर मक्खियां भिनभिनाती रहती हैं। हैरत की बात यह है कि कुछ दुकानदार अस्वस्थ बकरे और मुर्गे भी भीषण गर्मी में काट लोगों में बीमारी परोस रहे हैं। साफ-सफाई के अभाव में तेज दुर्गंध निकलती है। लोगों का कहना है कि, दुकानदार मछली व मांस के कचरे को हाकिमटोला स्थित बनी नगरपालिका मार्केट सड़क पर ही फेंक देते हैं। जिससे निकलने वाली बदबू से लोगों को परेशानी हो रही है। वहीं सूत्रों की मानें तो चौकी पुलिस की सांठगांठ से दादामियां चौराहा व छिपयाना चौराहा पर स्थित भैंस के मांस की दूकाने अवैध रुप से घरों से संचालित है। एसपी दीपक भूकर के कार्यभार संभालने के बाद जीरो टॉलरेंस के तहत चोरी, लूट, जुआं, मादक पदार्थ पर अंकुश तो लगा दिया है लेकिन किला चौकी क्षेत्र में घरों से बिक रहे अवैध रुप से भैंस की दूकानों पर अभी तक कार्रवाई नही हो पाई है।
इधर, नगर पालिका की मानें तो दुकानदारों की ओर से मानक पूरा न किए जाने के कारण मांस की दुकानों का लाइसेंस जारी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इस समय शहर में चल रही सभी दुकानें अवैध हैं। हालात यह है कि नपा व जिला खाद्य सुरक्षा विभाग की उदासीनता के कारण नगर समेत ग्रामीणांचलों में मीट और चिकन की दुकानें धड़ल्ले से चल रही हैं।
गौरतलब है कि शहर में ही करीब 20 से 30 के बीच मीट-मुर्गा की दुकानें संचालित की जा रही हैं। यह दुकानें धार्मिक स्थानों के पास संचालित हो रही हैं। जबकि दिशानिर्देश के मुताबिक किसी भी धार्मिक स्थान से 100 मीटर की दूरी पर इन्हें संचालित होना चाहिए।
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नगरपालिका वन-वे हाकिम टोला स्थित नवनिर्मित नपा मार्केट पर खुली मीट की दूकान
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मीट की दुकान पर लगने वाली भीड़ से लगता है जाम
क्षेत्रवासियों का कहना है कि शाम के समय नपा रोड से छोटा चौराहा जाने वाले वन-वे मुख्य मार्ग स्थित नगरपालिका की नवनिर्मित मार्केट के मुख्य गेट पर ही में संचालित मीट की दुकान पर मीट खरीदने के लिए लोगों की भीड़ लग जाती है। मीट खरीदने लाने वाले लोग बाइकों को इधर-उधर खड़ा कर देते हैं, जिससे जाम लग जाता है। शाम के समय ही बाजार में लोग खरीदारी करने निकलते हैं और उसी समय मीट की दुकान भीड़ पड़ती है। हैरत की बात है कि इन दूकानों के पास ही दादामियां मज़ार मस्जिद, गुरुद्वारा व सरकारी स्कूल है इसके बावाजूद बेखौफ से मीट की दूकानें संचालित है।
पालिका चेतावनी तक सीमित
मीट मुर्गे की दूकानों से परेशान स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार प्रशासन से लिखित शिकायत की है लेकिन अभी तक नपा की ओर से किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हुयी है, इधर नपा प्रशासन अवैध मीट कि दुकानदारों को नोटिसे दे कर चेतावनी तक ही सीमित है। जिसके बाद में खुद नगर पालिका चेतावनी देकर अवैध मीट की दुकानों पर कार्रवाई करना भूल गई है।
: नाला या फिर कूड़ा घर हर तरफ पॉलीथिन की भरमार
Tue, Apr 15, 2025
उत्तर प्रदेश उन्नाव
। सिंगल इंडस्ट्रीज़ प्लास्टिक पर केंद्र सरकार ने रोक लगा दी है! इसके बाद भी शहर के बाजारों में प्रतिबंधित पॉलिथीन धड़ल्ले से इस्तेमाल की जा रही है।
आलम यह है कि सिंगल यूज पॉलिथीन कम होने के बजाय इसकी डिमांड बाजारों में बढ़ गई है। बीते एक महीने में पॉलिथीन के एक पैकेट के दाम में 5 रुपये की बढ़ोतरी भी हुई है।
शहर का नाला या फिर कूड़ा घर। हर तरफ पॉलीथिन की भरमार है। खाद की जरूरत पूरी करने के लिए खेतों में कूड़े के साथ पहुंचने वाली पॉलीथिन जमीन की तासीर खत्म करती है।
पर्यावरण की सबसे बड़ी दुश्मन पर एक बार फिर प्रतिबंध की बात चली है, तो हलचलें तेज हुई हैं। सवाल यह है कि क्या प्रतिबंध का पूरी तरह पालन हो सकेगा। हालाकिं नगर पालिका 16 अप्रैल को एक जन जागरूकता रैली निकालेगी। जिसके साथ ही एक सप्ताह तक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
गौरतलब हो कि शहर के बड़ा चौेराहा, सदर बाज़ार, छोटा चौेराहा डा. मनोज वाली गली, कचौड़ी गली, ,आइबीपी चौराहा, धवनरोड, सब्जी मंडी समेत कई बाजारों में बैन पॉलिथीन की ब्रिकी खूब हो रही है। दुकानदार खुलेआम ग्राहकों को पॉलिथीन में सामान दे रहे हैं। शहर में इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। सब्जी मंडी की हर दुकान पर पॉलिथीन के कई बंडल रखे हुए हैं। हनुमान मंदिर के फूल कारोबारी रवि ने बताया कि फूल मंडी में भी पॉलिथीन का खूब इस्तेमाल हो रहा है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन के बावजूद पॉलिथीन की फैक्ट्रियां चल रही है। लोग भी इनका खूब इस्तेमाल कर रहे है। इनके दाम में भी इजाफा हो रहा है। पहले एक पैकेट पॉलिथीन की कीमत 55 रुपये थी, आज उसकी कीमत 60 रुपये हो गई है। वहीं, डा. मनोज वाली गली सब्जी मंडी में सिंगल यूज पॉलिथीन दूकानों पर बेची जा रही है। सब्जी कारोबारी राजू का आरोप है कि सब्जी मंडी के अधिकारियों की मिलीभगत से बैन पॉलिथीन खुलेआम बेची जा रही है।
चाय-जूस से लेकर ग्रॉसरी शॉप तक यूज़ हो रही बैन पॉलिथीन
दादामियां चौराहा हो या बाबूगंज,आईबीपी चौराहा या फिर मोती नगर लगभग सभी जगहों पर चाय की दुकान, जूस शॉप से लेकर ग्रॉसरी की दुकानों में बैन पॉलिथीन बिक रही हैं। स्टेशन रोड में पॉलिथीन का इस्तेमाल करने वाले एक व्यापारी ने सवाल किया कि जब फैक्ट्री में खुलेआम बैन पॉलिथीन बन रही हैं, तब इसके इस्तेमाल पर रोक कैसे लग सकेगी? अधिकारी फैक्ट्री पर लगाम नहीं कसते हैं। केवल दुकानदार को ही परेशान करते हैं।
इंसानों के साथ बेज़ुबानों की भी जान जोखिम में
सामाजिक कार्यकर्ता चेतन मिश्रा ने बताया कि बैन पॉलिथीन इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि जानवरों के लिए भी खतरे का सबब बनती जा रही हैं। ज्यादातर सब्जी मंडी में गाय फेंकी गई सब्जियों के साथ पॉलिथीन भी खा जाती हैं, जिसकी वजह से उनकी जान जोखिम में आ जाती है। सब्जी मंडी में कई ऐसे केस देखने को मिले हैं। जिम्मेदार पॉलिथीन पर रोक लगाने में असफल साबित हो रहे हैं।
इधर, नगर पालिका अध्यक्षा श्वेता मिश्रा ने बताया की पॉलिथीन का प्रयोग पर्यावरण के लिये बहुत हानिकारक है और इसकी रोकथाम के लिये अभियान व जागरूकता यात्रा निकाल कर जनता को जागरूक किया जायेगा।