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: उन्नाव: फायर एनओसी के बिना चल रहे अस्पताल, कभी भी हो सकता बड़ा हादसा

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Tue, Oct 7, 2025
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जयपुर हादसे से नहीं ली सीख, उन्नाव के अस्पतालों में बरकरार खतरा

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

उन्नाव। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में आग से सुरक्षा के इंतजाम बेहद लचर हैं। 71 सरकारी अस्पतालों में से केवल चार के पास ही अग्निशमन विभाग की एनओसी है, जबकि बाकी अब भी मानकों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। निजी क्षेत्र में भी हालात अलग नहीं हैं—शहर के लगभग 150 नर्सिंग होम में 25 अब तक एनओसी हासिल नहीं कर सके हैं। कई ऐसे भी हैं जो बिना पंजीकरण और बिना अग्नि सुरक्षा के ही खुलेआम चल रहे हैं।

करोड़ों खर्च, फिर भी दो बार फेल

जिला महिला और पुरुष अस्पतालों में करोड़ों रुपये की लागत से फायर फाइटिंग सिस्टम लगाया गया। महिला अस्पताल में 1.89 करोड़ और पुरुष अस्पताल में 2.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए। सितंबर 2023 में शुरू हुआ यह काम अगस्त 2024 तक पूरा होना था, लेकिन मार्च 2025 में जाकर व्यवस्था तैयार हो सकी। मई और जून में अग्निशमन विभाग ने जब जांच की तो सिस्टम दो बार फेल हो गया। ऑटो मोड पर स्मोक सायरन बंद था, सेंसर खराब थे और नोजल गलत जगह लगा दिया गया था। सितंबर में तीसरे ट्रायल के बाद एनओसी जारी हुई, हालांकि जानकारों के मुताबिक अब भी कई सेंसर काम नहीं कर रहे हैं।

13 सीएचसी की फाइल लौटी

स्वास्थ्य विभाग ने जिले की 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए एनओसी मांगी थी। लेकिन जब अग्निशमन विभाग की टीम ने जांच की, तो मानक पूरे नहीं मिले। विभाग ने सभी फाइलें वापस करते हुए साफ कहा कि जब तक अग्नि सुरक्षा के सभी मानक पूरे नहीं होंगे, एनओसी नहीं दी जाएगी।

नर्सिंग होम में सबसे ज्यादा लापरवाही

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 150 नर्सिंग होम पंजीकृत हैं। इनमें से 125 को एनओसी मिल चुकी है, जबकि 26 के आवेदन खारिज किए गए हैं। कारण—पर्याप्त पानी टैंक, वेंटिलेशन और सुरक्षित निकास द्वार का न होना। जिले में दर्जनों नर्सिंग होम ऐसे भी हैं जो बिना फायर एनओसी और बिना पंजीकरण के ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं।

तीन साल पुराने दो ही अस्पताल सुरक्षित

बीघापुर और मौरावां में बने 100 बेड वाले अस्पतालों में आग से सुरक्षा के सभी मानक पूरे हैं। वहीं बाकी अस्पतालों में या तो उपकरण अधूरे हैं या सिस्टम खराब पड़ा है।

जयपुर हादसे के बाद भी नहीं सुधरे हालात

राजस्थान के जयपुर के ट्रॉमा सेंटर में हाल ही में आग लगने से आठ मरीजों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद भी उन्नाव के अस्पतालों ने सबक नहीं लिया। जिले के अधिकांश अस्पताल अब भी अग्नि सुरक्षा को औपचारिकता मानकर नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है।

एसएनसीयू में भर्ती 16 नवजात

जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में 16 नवजात बच्चे भर्ती हैं। दो बेड वाले आईसीयू वार्ड में इस समय कोई मरीज नहीं है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अब फायर फाइटिंग सिस्टम पूरी तरह सक्रिय है और किसी भी आकस्मिक स्थिति में ऑटोमोड पर आग पर काबू पाया जा सकता है।

अग्नि सुरक्षा के मानक

हर मंजिल पर कम से कम एक स्मोक अलार्म होना चाहिए।। धुआं निकासी के लिए पर्याप्त वेंटिलेशन जरूरी। कार्बन मोनोऑक्साइड डिटेक्टर लगाया जाना चाहिए। एक मीटर चौड़ा निकास मार्ग होना चाहिए। भागने का दरवाजा बिना चाबी के खुलने योग्य होना चाहिए। अस्पताल परिसर में धूम्रपान पूर्णतः प्रतिबंधित।

जिम्मेदारों का कहना

सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने कहा कि नर्सिंग होम के पंजीकरण के बाद सूची अग्निशमन विभाग को भेजी जाती है। जांच के बाद वहीं से एनओसी जारी होती है। इधर,मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनूप सिंह ने बताया कि जो सूची सीएमओ कार्यालय से मिली, उसकी जांच कर एनओसी दी गई है। जिन फाइलों में कमियां पाई गईं, उन्हें लौटा दिया गया है। जब तक मानक पूरे नहीं होंगे, एनओसी जारी नहीं होगी।

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