उन्नाव से मक्का तक पैदल हज का सफर : आस्था और हौसले की अनोखी मिसाल
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Sat, Jan 10, 2026
2027 हज से पहले मक्का पहुंचने का लक्ष्य, कई देशों से होकर जाएगा सफर

उन्नाव। एक समय था जब लोग मीलों का सफर पैदल तय करते थे, लेकिन आज सुविधाओं के दौर में कुछ किलोमीटर चलना भी चुनौती बन गया है। ऐसे समय में उन्नाव के एक युवक ने ऐसा फैसला लिया है, जो न सिर्फ चौंकाता है बल्कि सच्ची आस्था, सब्र और मजबूत इरादों की मिसाल भी पेश करता है। यह कहानी है शहर के तालिब सराय निवासी कामरान खान की, जिन्होंने मक्का तक पैदल हज करने का संकल्प लिया है।आमतौर पर लोग हज के लिए हवाई जहाज या समुद्री मार्ग का सहारा लेते हैं और कुछ ही दिनों में यात्रा पूरी कर लेते हैं, लेकिन कामरान खान ने आसान रास्ता नहीं चुना। उन्होंने हजारों किलोमीटर की दूरी पैदल तय करने का फैसला किया और अल्लाह पर पूरा भरोसा रखते हुए अपने सफर की शुरुआत की।
मजबूत इरादे हों तो हर राह आसान
शनिवार को हज पर पैदल निकले कामरान खान का कहना है कि पैदल हज पर जाने की ख्वाहिश उनके दिल में लंबे समय से थी। यह फैसला न किसी दिखावे के लिए है और न ही प्रचार के लिए, बल्कि पूरी तरह इबादत और सच्ची नीयत से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य वर्ष 2027 के हज से पहले मक्का पहुंचना है। इस दौरान उन्हें कई देशों से होकर गुजरना होगा, जहां वीजा, दस्तावेज और अनुमतियों की प्रक्रिया आसान नहीं रही। कई बार अलग-अलग देशों की एंबेसी के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
कई देशों से होकर मक्का तक की यात्रा
कामरान खान उन्नाव से पैदल यात्रा पर निकल चुके हैं। भारत के विभिन्न राज्यों से होते हुए उनका रास्ता कई देशों से होकर अंत में सऊदी अरब तक जाएगा। मक्का पहुंचकर वह इस्लाम के सबसे पवित्र फर्ज हज को अदा करेंगे। जानकारी के अनुसार, इस पूरी यात्रा की तैयारी में उन्हें छह महीने से अधिक का समय लगा। कभी उन्नाव से लखनऊ और दिल्ली के चक्कर लगाने पड़े, तो कभी अन्य शहरों में जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ीं, लेकिन उनके कदम कभी नहीं डगमगाए। कामरान का कहना है कि यह यात्रा सिर्फ शारीरिक परिश्रम नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना है। रास्ते की हर कठिनाई उन्हें अल्लाह के और करीब ले जाएगी। वह सब्र, इबादत और भरोसे के साथ इस सफर को पूरा करना चाहते हैं।

अजमेर की पैदल यात्रा से बढ़ा हौसला
बता दें कि कामरान खान ने बीते वर्ष जुलाई माह में उन्नाव से राजस्थान के अजमेर स्थित ख्वाजा गरीब नवाज़ की दरगाह तक पैदल यात्रा की थी। वह उनकी पहली पैदल यात्रा थी, उस यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ। अजमेर की इस पदयात्रा ने ही उनके अंदर पैदल हज का हौसला पैदा किया, जिसके बाद उन्होंने सऊदी अरब के मक्का तक पैदल जाने का इरादा पक्का किया था।

शहर में चर्चा, दुआओं के साथ विदाई
जैसे ही कामरान के पैदल हज पर जाने की खबर फैली, हर जगह इसकी चर्चा शुरू हो गई। लोगों ने उनके फैसले को साहसिक और प्रेरणादायक बताया। विदाई के समय कई स्थानों पर लोगों ने फूलों की वर्षा की, माला पहनाई और दुआओं के साथ उन्हें रवाना किया। परिजनों और मित्रों की आंखों में भावुकता के साथ गर्व भी साफ नजर आया। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के दौर में, जब हर सुविधा मौजूद है, तब भी पैदल हज का संकल्प लेना आसान नहीं है। यह सच्ची आस्था और मजबूत हौसले का प्रतीक है। कामरान खान का यह सफर न सिर्फ एक धार्मिक यात्रा है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो कठिनाइयों के डर से अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। उनका संदेश साफ है कि नीयत साफ हो और इरादा मजबूत, तो कोई भी राह नामुमकिन नहीं होती।
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