12 घंटे थमा ट्रैफिक : चार बजे शुरू हुआ जाम, शाम चार बजे मिली राहत
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Wed, Feb 18, 2026
सोनिक और बदरका के बीच 9 किमी लंबा जाम, एम्बुलेंस और स्कूल बसें भी रेंगती रहीं

उन्नाव। कानपुर-लखनऊ हाईवे पर बुधवार का दिन सफर कर रहे लोगों के लिए बेहद कठिन रहा। सुबह तड़के शुरू हुई परेशानी शाम तक पीछा नहीं छोड़ सकी। सोनिक और बदरका के पास दो अलग-अलग सड़क हादसों ने यातायात को पूरी तरह चरमराकर रख दिया। हालात ऐसे बने कि करीब नौ किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई और अनुमानित छह हजार गाड़ियां घंटों जाम में फंसी रहीं।
भोर में पहला हादसा, जाम की शुरुआत
सुबह करीब चार बजे दही थाना क्षेत्र में मिर्जा फैक्ट्री के पास एक डंपर पहले से खराब हालत में खड़ा था। इसी दौरान हमीरपुर की ओर से आ रहा दूसरा डंपर पीछे से उसमें जा भिड़ा। टक्कर काफी तेज थी। चालक देवी शंकर, निवासी घाटमपुर, गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया। उस समय हाईवे पर पैचिंग और मरम्मत का काम चल रहा था। सड़क पहले से संकरी थी। हादसे के बाद एक लेन पूरी तरह बाधित हो गई। देखते ही देखते लंबी कतार लग गई। ओवरलोड डंपर को हटाने में काफी समय लगा। बताया गया कि हाइड्रोलिक क्रेन भी तुरंत काम नहीं कर सकी, इसलिए पहले वाहन खाली कराया गया, फिर किनारे किया गया। इसी प्रक्रिया में कई घंटे निकल गए।
बदरका में दूसरी टक्कर, हालात और बिगड़े
सोनिक में राहत कार्य जारी ही था कि सुबह करीब सात बजे अचलगंज थाना क्षेत्र के बदरका चौराहे पर दूसरा हादसा हो गया। यहां एक ट्रक खराब होकर सड़क पर ही खड़ा था। चालक वाहन छोड़कर चला गया था। पीछे से आ रहे ट्राला ने उसमें टक्कर मार दी। इसके बाद अचलगंज से दही चौकी तक ट्रैफिक पूरी तरह थम गया। दोनों ओर से आने-जाने वाले वाहन फंस गए। कई लोग हाईवे छोड़कर सर्विस लेन की ओर मुड़े, लेकिन थोड़ी देर में वहां भी लंबी लाइन लग गई। स्थिति ऐसी रही कि गाड़ियां इंच-इंच खिसकती रहीं।
एम्बुलेंस, ऑफिस जाने वाले और बच्चे परेशान
जाम का असर आम लोगों पर साफ दिखा। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी समय पर नहीं पहुंच सके। स्कूली बसों में बैठे बच्चे घंटों फंसे रहे। कुछ एम्बुलेंस भी रास्ते में अटकी रहीं, जिससे मरीजों के परिजन चिंतित नजर आए। परेशान लोग डायल 112 पर फोन करते रहे और सोशल मीडिया के जरिए भी मदद की अपील की।
करोड़ों खर्च, मगर ट्रैफिक मैनेजमेंट कमजोर
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे सुधार के नाम पर करीब 98 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, फिर भी सोनिक से जाजमऊ के बीच जाम की समस्या बार-बार सामने आती है। सड़क पर खराब खड़े वाहनों को समय पर नहीं हटाया जाता। निर्माण और मरम्मत कार्य के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन की स्पष्ट व्यवस्था नहीं होती। यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि हाईवे जैसे व्यस्त मार्ग पर इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम मजबूत होना चाहिए। क्रेन और रिकवरी वाहन रणनीतिक जगहों पर तैनात रहें तो ऐसे जाम की अवधि कम की जा सकती है।
शाम के बाद मिली राहत
पुलिस और प्रशासन की टीमों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला। क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर और ट्रैफिक को धीरे-धीरे डायवर्ट करके शाम करीब चार बजे के बाद हालात सामान्य होने लगे। हालांकि तब तक हजारों लोग घंटों की देरी झेल चुके थे।

शुक्लागंज में डेढ़ घंटे का अलग जाम
इधर गंगाघाट थाना क्षेत्र के शुक्लागंज में भी सुबह करीब 10 बजे से 11:30 बजे तक भीषण जाम लगा रहा। कानपुर और उन्नाव के बीच रोजाना आवागमन करने वाले सैकड़ों वाहन करीब डेढ़ घंटे तक फंसे रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुक्लागंज मुख्य चौराहे और आसपास की संकरी सड़कों पर पहले से ट्रैफिक का दबाव था। स्कूल और दफ्तर का समय होने के कारण भीड़ ज्यादा थी। इसी बीच कुछ बड़े वाहन आमने-सामने आ गए और रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। देखते ही देखते दोनों ओर लंबी कतार लग गई। बुधवार की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि हाईवे पर सिर्फ सड़क चौड़ी होना काफी नहीं है। समय पर कार्रवाई, सख्त निगरानी और बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन ही ऐसे हालात से राहत दिला सकते हैं।
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