उन्नाव में संबद्धीकरण पर सख्ती : 10 लिपिक वापस भेजे गए मूल तैनाती स्थल पर
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Thu, Feb 19, 2026
स्थानांतरण नीति की अनदेखी उजागर होने के बाद शासन का एक्शन, दोषियों पर आरोप पत्र के निर्देश
उन्नाव। जिला विकास विभाग में लंबे समय से चल रहे संबद्धीकरण के खेल पर आखिरकार शासन ने ब्रेक लगा दिया है। जिला मुख्यालय पर नियमों के विपरीत तैनात किए गए वरिष्ठ सहायक, प्रधान सहायक और अन्य लिपिकीय कर्मचारियों को उनके मूल विकास खंडों में वापस भेज दिया गया है। यह कार्रवाई वार्षिक स्थानांतरण नीति की अनदेखी और शिकायतों की पुष्टि के बाद की गई है। जानकारी के अनुसार, जिला विकास अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में तैनाती को लेकर कई महीनों से शिकायतें शासन तक पहुंच रही थीं। आरोप था कि कुछ कर्मचारियों को नियमों के खिलाफ जिला मुख्यालय से संबद्ध कर रखा गया, जबकि कागजों में उनकी तैनाती विकास खंडों में दर्शाई जा रही थी।
तीन साल में पटल परिवर्तन का नियम ठंडे बस्ते में
स्थानांतरण नीति के तहत हर तीन वर्ष में पटल प्रभारी बदलना अनिवार्य है, ताकि एक ही कर्मचारी लंबे समय तक एक ही संवेदनशील कार्य से न जुड़ा रहे। लेकिन उन्नाव में इस नियम का पालन नहीं किया गया। कुछ कर्मचारियों को उनकी सुविधा के अनुसार विभाग और पटल से जोड़े रखा गया। इसी क्रम में पंचायत सचिव संवर्ग के कई कर्मचारियों को भी जिला मुख्यालय से संबद्ध रखा गया था। इनमें अभिषेक तिवारी, सुनील कुमार, देवेंद्र सिंह, मयूरी, पुत्तन लाल पाल और राम सागर यादव शामिल हैं।
आयुक्त के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई
30 जनवरी को ग्राम्य विकास आयुक्त ने जिलाधिकारी गौरांग राठी को निर्देश दिया कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया जाए। इसके बाद जिला विकास अधिकारी देव कुमार चतुर्वेदी ने 12 फरवरी को आदेश जारी कर दस कर्मचारियों को उनकी मूल तैनाती पर वापस भेज दिया।जिन कर्मचारियों को वापस भेजा गया है उनमें अनुराग सिंह और हुकम सिंह (प्रधान सहायक), शिवकुमार, दीपक सिंह, आरती वर्मा, हीरा सिंह, सुनील कुमार शुक्ला (वरिष्ठ सहायक), अर्पित कुशवाहा और प्रतिभा (कनिष्ठ सहायक) शामिल हैं। इसके अलावा उर्दू अनुवादक संवर्ग से शब्बीर अंसारी, बिलाल अख्तर, अंजुमन आरा और इकबाल अहमद को भी मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा गया है।
सिस्टम पर उठे सवाल
सूत्रों का कहना है कि विकास विभाग में लंबे समय से “संबद्धीकरण” को एक व्यवस्था की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। इससे न सिर्फ नीति की मंशा प्रभावित हुई, बल्कि विकास खंडों में कार्यप्रणाली भी प्रभावित हुई। कई ब्लॉकों में कर्मचारियों की कमी बनी रही, जबकि वे जिला मुख्यालय में काम कर रहे थे। अब शासन की सख्ती के बाद विभाग में हलचल है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य विभागों में भी संबद्धीकरण की समीक्षा हो सकती है।
जांच के बाद सख्त कदम संभव
अभी आरोप पत्र की प्रक्रिया बाकी है। यदि जांच में अनियमितता साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई भी संभव है। फिलहाल इस कदम को प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में अहम माना जा रहा है। उन्नाव में यह कार्रवाई साफ संकेत है कि स्थानांतरण नीति को अब हल्के में लेने की गुंजाइश नहीं रहेगी।
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