11 दिन तक दौड़ाया, फिर 35 हजार की घूस मांगी : 25 हजार लेते डाकघर का बाबू को सीबीआई ने दबोचा
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Sun, Aug 9, 2026
पीएमईजीपी के 10 लाख के लोन पर 3.49 लाख की सब्सिडी का मामला, बेकरी यूनिट के सत्यापन के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप

उन्नाव। बेकरी यूनिट का सत्यापन कराने के लिए एक व्यक्ति को 11 दिन तक दौड़ाने और फिर 35 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में बीघापुर डाकघर का कार्यालय सहायक सीबीआई के शिकंजे में फंस गया। लखनऊ सीबीआई की टीम ने शनिवार को पीजीआई के पास ट्रैप लगाकर कार्यालय सहायक कमल जायसवाल को 25 हजार रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मूल रूप से लखनऊ के अलीगंज का रहने वाला बताया जा रहा है। मामला प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत लिए गए 10 लाख रुपये के लोन और उससे जुड़ी 3.49 लाख रुपये की सब्सिडी के सत्यापन से जुड़ा है। आरोप है कि सब्सिडी के लिए बेकरी यूनिट के सत्यापन के नाम पर कार्यालय सहायक लगातार शिकायतकर्ता अमरेंद्र को दौड़ा रहा था। बाद में सत्यापन के बदले 35 हजार रुपये की मांग की गई।
10 लाख का लोन, खाते में आ चुकी थी 3.49 लाख की सब्सिडी
सीबीआई के मुताबिक, शिकायतकर्ता बिहार थाना क्षेत्र के लालताप्रसाद खेड़ा गांव निवासी अमरेंद्र कुमार पुत्र प्रेमशंकर ने 2023 में बेकरी यूनिट शुरू करने के लिए उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की भगवंतनगर शाखा से 10 लाख रुपये का लोन लिया था। पीएमईजीपी के तहत मिलने वाली 3,49,500 रुपये की सब्सिडी भी उसके बैंक खाते में क्रेडिट हो चुकी थी। इसके बाद बेकरी यूनिट का सत्यापन किया जाना था। आरोप है कि इसी सत्यापन को लेकर बीघापुर डाकघर में तैनात कार्यालय सहायक कमल जायसवाल ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग शुरू कर दी।
11 दिन तक कभी यहां, कभी वहां बुलाने का आरोप
पीड़ित के मुताबिक, कमल जायसवाल लगातार करीब 11 दिन तक उसे सत्यापन के लिए दौड़ाता रहा। जब बात रिश्वत की मांग तक पहुंची तो उसने इसकी शिकायत सीबीआई की लखनऊ यूनिट से करने का फैसला किया। पीड़ित ने पांच अगस्त को सीबीआई लखनऊ यूनिट में शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद एजेंसी ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू की।
छह अगस्त को गांव तक पहुंचा कमल
शिकायत के अगले ही दिन छह अगस्त को कमल जायसवाल कथित तौर पर रिश्वत लेने के लिए पीड़ित के गांव लालता प्रसादखेड़ा बिहार पहुंच गया। पीड़ित के मुताबिक, उस समय उसे दो हजार रुपये दिए गए और बाकी रकम जल्द देने की बात कही गई। इसी दौरान सीबीआई के अधिकारी भी गांव पहुंचे। टीम ने आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की। बताया गया कि फोन पर बातचीत के दौरान कमल जायसवाल बाकी रकम मिलने के बाद ही सत्यापन करने की बात पर अड़ा रहा। इस घटनाक्रम के बाद सीबीआई ने सात अगस्त को आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
शनिवार को पीजीआई बुलाया, यहीं बिछा था सीबीआई का जाल
मुकदमा दर्ज होने के बाद सीबीआई ने आरोपी को पकड़ने के लिए ट्रैप की योजना बनाई। शनिवार को कमल जायसवाल ने पीड़ित को लखनऊ के पीजीआई आने की बात कही। सीबीआई टीम पहले से तैयार थी। पीड़ित के आरोपी के संपर्क में पहुंचने के बाद तय रकम दी गई। आरोप है कि कमल ने 25 हजार रुपये स्वीकार कर लिए। रुपये लेते ही पीजीआई के पास मौजूद सीबीआई टीम ने उसे पकड़ लिया। टीम ने उसके कब्जे से रिश्वत की रकम बरामद की और मौके की कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया।
35 हजार मांगे, लेकिन 25 हजार लेते पकड़ा गया
मामले में रिश्वत की रकम को लेकर भी तस्वीर साफ है। आरोप है कि कमल जायसवाल ने सत्यापन के बदले कुल 35 हजार रुपये मांगे थे। ट्रैप के दौरान शिकायतकर्ता ने उसे 25 हजार रुपये दिए। यही रकम लेते हुए सीबीआई ने उसे पकड़ लिया। यानी जिस रकम की मांग 35 हजार रुपये की गई थी, उसमें से 25 हजार रुपये लेते समय आरोपी सीबीआई के हाथ लग गया।
सवाल यह भी, सत्यापन में क्या थी आरोपी की भूमिका?
सीबीआई अब यह जांच कर रही है कि बेकरी यूनिट के सत्यापन की प्रक्रिया में कमल जायसवाल की वास्तविक भूमिका क्या थी और उसके पास सत्यापन को लेकर किस तरह के अधिकार थे। जांच एजेंसी शिकायत, बातचीत, ट्रैप की कार्रवाई और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है। यह भी जांच का हिस्सा होगा कि सब्सिडी की रकम पहले ही खाते में पहुंच जाने के बाद सत्यापन की प्रक्रिया किस स्तर पर लंबित थी और उसके लिए आरोपी की भूमिका क्या थी।
लखनऊ की अदालत में पेशी
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई आरोपी कमल जायसवाल को लखनऊ की सक्षम अदालत में पेश करेगी। अदालत के आदेश के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। मामले में सीबीआई की जांच जारी है।
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