Fri 17 Apr 2026

ब्रेकिंग

घायल नंदी के लिए देवदूत बने राष्ट्रीय गौसंरक्षक दल के कार्यकर्ता,तत्परता से बचाई जान

अब शादी समारोह में नहीं पड़ेगी गैस की कमी, प्रशासन ने किया इंतजाम

मुरादाबाद पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी: अवैध शस्त्र फैक्ट्री का भंडाफोड़, 3 आरोपी गिरफ्तार

पीएफ घोटाले का शिकार हुआ मजदूर, तीन साल बाद दर्ज हुआ केस

BDO भुता को सौंपा ज्ञापन,मांगे पूर्ण न होने पर सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे

सूचना

BREAKING NEWS

CRIME BREAKING

रात में मरम्मत, दिन में उठे आरोप : करोड़ों की सड़क में दरार, एक्सप्रेसवे बना सवालों का केंद्र

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Mon, Feb 23, 2026
Post views : 86

सरांय कटियान के पास करीब आठ मीटर सड़क बैठी, रात में कराई जा रही मरम्मत

उन्नाव। मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाले गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर जहां अब तक तेजी और प्रगति के दावे किए जा रहे थे, वहीं उन्नाव जिले में सामने आई एक घटना ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। औद्योगिक गलियारा क्षेत्र सरांय कटियान के पास एक्सप्रेसवे का करीब आठ मीटर लंबा हिस्सा अचानक धंस गया। मामला सामने आने के बाद निर्माण एजेंसी ने रात के समय मरम्मत का काम शुरू करा दिया। यह वही परियोजना है जिसे प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़कों में गिना जा रहा है। लगभग 36,200 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस एक्सप्रेसवे का करीब 105 किलोमीटर हिस्सा उन्नाव जिले से गुजरता है। जिले में निर्माण कार्य लगभग अंतिम चरण में बताया जा रहा है और एजेंसी की ओर से 95 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा किया जा चुका है। ऐसे में सड़क का धंसना स्वाभाविक रूप से गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है।

मरम्मत के दौरान क्या मिला

स्थानीय लोगों के अनुसार जब धंसे हुए हिस्से को जेसीबी से उखाड़ा गया तो नीचे से बड़ी संख्या में सीमेंट की बोरियां निकलीं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब पचास के आसपास बोरियां मिलीं। उनका आरोप है कि निर्माण के दौरान मानकों का ठीक से पालन नहीं किया गया और कमजोर जमीन पर परतें चढ़ाकर काम पूरा दिखा दिया गया। कुछ ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पास की बसहा झील क्षेत्र की काली मिट्टी सड़क निर्माण में डाली गई थी। उनका दावा है कि यह मिट्टी सड़क की मजबूत बेस लेयर के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती। आरोप है कि गुणवत्ता को लेकर आपत्ति उठने के बावजूद मिट्टी हटाने के बजाय ऊपर से दूसरी परत डालकर मामला दबा दिया गया।

दावों और जमीनी हकीकत में अंतर?

निर्माण एजेंसी लगातार बेहतर गुणवत्ता और तय समय में काम पूरा करने का दावा करती रही है। लेकिन जिस हिस्से को लगभग तैयार बताया जा रहा था, वहीं सड़क का बैठ जाना कई सवाल छोड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार एक्सप्रेसवे जैसे हाई-स्पीड कॉरिडोर में बेस लेयर और सबग्रेड की गुणवत्ता सबसे अहम होती है। अगर शुरुआती परतों में ही समझौता हो जाए तो बाद में सड़क की उम्र पर असर पड़ना तय है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मरम्मत का काम दिन के बजाय रात में कराया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता को लेकर संदेह और बढ़ गया है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है।

संपर्क की कोशिश, जवाब नहीं

मामले पर प्रतिक्रिया लेने के लिए कार्यदायी संस्था पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर के एचआर हेड स्वपनेश और अडानी ग्रुप से जुड़े संजीव तिवारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। प्रशासन की ओर से भी इस घटना पर अभी तक कोई विस्तृत स्पष्टीकरण जारी नहीं हुआ है।

निर्माण पर सवाल, जांच की मांग तेज

गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश की बड़ी आधारभूत परियोजनाओं में शामिल है और इसके जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वांचल तक तेज रफ्तार कनेक्टिविटी का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है। यदि शुरुआती चरण में ही सड़क धंसने की घटनाएं सामने आती हैं, तो यह न केवल परियोजना की विश्वसनीयता बल्कि भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय है। अब देखना यह होगा कि संबंधित एजेंसियां इस मामले की तकनीकी जांच कराती हैं या इसे सामान्य मरम्मत बताकर आगे बढ़ जाती हैं।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन