सीओ हसनगंज ने ठगों को ही उलझाया : बातचीत में खोला साइबर गिरोह का खेल
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Sun, Feb 22, 2026
26 कॉल कर लोन का लालच, एपीके भेजकर जाल बिछाया, सतर्कता से साजिश नाकाम

उन्नाव। साइबर ठगी के खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चलाने वाले सीओ हसनगंज अरविंद कुमार चौरसिया इस बार खुद ठगों के निशाने पर आए, लेकिन कहानी यहां पलट गई। कॉल आते ही उन्होंने अंदाजा लगा लिया कि मामला संदिग्ध है। इसके बाद उन्होंने फोन काटने के बजाय बातचीत जारी रखी और ठगों के तौर तरीके समझने की कोशिश की। नतीजा यह रहा कि शातिरों की चाल वहीं बेनकाब हो गई। शनिवार सुबह करीब आठ बजे से दोपहर 12 बजे के बीच उनके सीयूजी नंबर पर अलग अलग मोबाइल नंबरों से लगातार कॉल आने लगीं। चार घंटे में 26 बार फोन किया गया। कुछ कॉल उन्होंने जानबूझकर उठाईं। दूसरी तरफ मौजूद लोग खुद को निजी बैंक और वित्तीय कंपनियों का प्रतिनिधि बता रहे थे।
लालच का पूरा स्क्रिप्ट तैयार था
कॉल करने वालों ने पहले भरोसा बनाने की कोशिश की। कहा गया कि उनका नंबर “प्री-अप्रूव्ड” सूची में है। बेहद कम ब्याज पर पर्सनल लोन, तुरंत जारी होने वाला क्रेडिट कार्ड और विशेष बैंकिंग ऑफर देने की बात कही गई। भाषा विनम्र थी और बातचीत पूरी तरह पेशेवर अंदाज में की जा रही थी। सीओ ने सामान्य ग्राहक की तरह बातचीत आगे बढ़ाई। उन्होंने पूछा कि लोन कैसे मिलेगा, प्रक्रिया क्या है, दस्तावेज कहां जमा होंगे। जैसे जैसे सवाल बढ़ते गए, कॉलर विस्तार से बताता गया। इसी दौरान व्हाट्सएप पर दो अलग अलग बैंकों के नाम से एपीके फाइल भेजी गई और कहा गया कि उसे डाउनलोड कर फॉर्म भरना होगा।
यहीं से खुलने लगी परतें
सीओ ने फाइल डाउनलोड नहीं की। उन्होंने उल्टा कॉलर से कंपनी का पंजीकरण नंबर, शाखा का पता और अधिकृत पहचान पत्र की जानकारी मांगी। साथ ही पूछा कि बैंक की आधिकारिक वेबसाइट से यह प्रक्रिया क्यों नहीं कराई जा रही। सवाल सुनते ही दूसरी तरफ से जवाब गोलमोल होने लगे।बातचीत के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि ठग पहले लालच देते हैं, फिर जल्दी फैसला लेने का दबाव बनाते हैं। एपीके फाइल के जरिए मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल कराया जाता है, जिससे बैंकिंग डिटेल, ओटीपी और निजी जानकारी तक पहुंच बनाई जाती है। इसके बाद खाते से रकम साफ कर दी जाती है।
तकनीकी जांच में बाहर का कनेक्शन
मामले को हल्के में न लेते हुए संबंधित नंबरों को तुरंत सर्विलांस पर लगाया गया। शुरुआती जांच में पता चला कि इस्तेमाल की गई सिम राजस्थान के भरतपुर जनपद से जारी हुई थीं और उनकी लोकेशन गांव मिलकपुर के आसपास मिली। सभी नंबर साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज कराकर ब्लॉक करा दिए गए हैं। तकनीकी टीम कॉल डाटा और पैटर्न का विश्लेषण कर रही है।
“सतर्क रहें, जल्दबाजी न करें”
सीओ हसनगंज अरविंद कुमार चौरसिया ने कहा कि साइबर अपराधी बेहद सुनियोजित तरीके से काम करते हैं। वे बातचीत में भरोसा पैदा करते हैं और फिर तकनीकी जाल बिछाते हैं। आम लोगों से अपील है कि अनजान कॉल पर बैंकिंग या निजी जानकारी साझा न करें। किसी भी एपीके फाइल या संदिग्ध लिंक को डाउनलोड न करें। उन्होंने कहा कि बैंक या सरकारी संस्थाएं फोन पर गोपनीय जानकारी नहीं मांगतीं। अगर ऐसी कॉल आए तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं या साइबर पोर्टल पर रिपोर्ट करें। यह घटना सिर्फ एक असफल ठगी की कोशिश नहीं, बल्कि यह भी दिखाती है कि जागरूकता और थोड़ी सतर्कता से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है। इस बार ठगों ने गलत नंबर मिला लिया था।
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