अमृत सरोवर और हाईमास्ट लाइट पर फिर घिरा जिला पंचायत : दो सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Wed, Feb 18, 2026
करीब 5 करोड़ रुपये के कार्यों पर उठे सवाल, बाहरी जिलों के अफसर करेंगे जांच
उन्नाव। करोड़ों रुपये खर्च कर गांवों में बनाए गए अमृत सरोवर और लगाई गई हाईमास्ट लाइटें एक बार फिर विवादों में हैं। निर्माण की गुणवत्ता और खर्च में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद पंचायतीराज विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग के विशेष सचिव जय प्रकाश पांडेय ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाकर दो सप्ताह के भीतर स्थलीय जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
चार सरोवर, करीब तीन करोड़ की लागत
साल 2023 में जिला पंचायत ने दिसारा, हरईपुर, बिधनू और पोखारी ग्राम पंचायतों में चार अमृत सरोवर बनवाने के लिए 2.89 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। अगले वर्ष निर्माण पूरा होने के बाद इन्हें पंचायतीराज विभाग को सौंप दिया गया। उस समय इन्हें जल संरक्षण और ग्रामीण सौंदर्यीकरण की बड़ी पहल बताया गया था। अब इन्हीं सरोवरों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निर्माण में तय मानकों का पालन नहीं किया गया और खर्च में पारदर्शिता नहीं बरती गई। कुछ स्थानों पर किनारों की मजबूती, पिचिंग और जलभराव की स्थिति को लेकर भी आपत्तियां सामने आई हैं।
125 हाईमास्ट लाइटें भी जांच में
मामला सिर्फ सरोवरों तक सीमित नहीं है। ग्राम पंचायतों में लगभग 2.3 करोड़ रुपये की लागत से लगाई गई 125 हाईमास्ट लाइटें भी जांच के घेरे में हैं। आरोप है कि कई जगह लाइटें ठीक से काम नहीं कर रहीं, जबकि स्थापना और सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल हैं। कुछ ग्रामीणों ने लागत और वास्तविक काम में अंतर होने की बात कही है।
बाहर के जिलों के अफसरों को जिम्मेदारी
जांच को निष्पक्ष बनाने के लिए समिति में दूसरे जिलों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। आजमगढ़ जिला पंचायत के अधिशासी अभियंता अभय सिंह, गोंडा जिला पंचायत के अभियंता शशि यादव और पीडब्ल्यूडी के एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को टीम में रखा गया है। इन्हें तकनीकी मानकों, कार्य की गुणवत्ता और वित्तीय व्यय की बारीकी से जांच कर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश हैं।
पहले भी उठे थे सवाल, रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं
यह पहला मौका नहीं है जब इन परियोजनाओं पर उंगली उठी हो। इससे पहले भी जिला प्रशासन ने जांच कराई थी, लेकिन उस जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी। अब नई जांच के आदेश के बाद पारदर्शिता को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर लोग यह भी पूछ रहे हैं कि पिछली जांच का नतीजा क्या रहा और यदि कमियां थीं तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई।
टीम अभी तक मौके पर नहीं पहुंची
विशेष सचिव के निर्देश जारी होने के बाद भी अभी तक जांच टीम के किसी सदस्य के मौके पर पहुंचने की पुष्टि नहीं हो सकी है। विभागीय स्तर पर अधिकारी खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं। हालांकि अपर मुख्य अधिकारी ओपी सिंह ने कहा कि उन्हें जांच संबंधी पत्र मिल चुका है और टीम को पूरा सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में उन्होंने कार्यभार संभाला है और रायबरेली का अतिरिक्त प्रभार भी देख रहे हैं।
जनता की निगाहें रिपोर्ट पर
गांवों में जल संरक्षण और रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाओं के नाम पर खर्च हुए करीब पांच करोड़ रुपये अब जांच के दायरे में हैं। ऐसे में ग्रामीणों की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच कितनी निष्पक्ष और समयबद्ध होती है। अगर अनियमितता साबित होती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।अब देखना यह है कि 15 दिन बाद आने वाली रिपोर्ट तस्वीर साफ करती है या यह मामला भी पिछली जांच की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।
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