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बिना अनुमति चल रही फैक्टरी सील : मगरवारा में जेकेडब्ल्यू फोर्जिंग्स प्लांट पर ताला

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Sat, Feb 21, 2026
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई, अफसरों की मौजूदगी में कटी बिजली और पानी सप्लाई

उन्नाव। मगरवारा औद्योगिक क्षेत्र में संचालित जेकेडब्ल्यू फोर्जिंग्स प्लांट पर शुक्रवार को प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए ताला जड़ दिया। प्रदूषण से जुड़ी शिकायत, वैध सहमति की अवधि समाप्त होने और निरीक्षण में सहयोग न करने जैसे गंभीर बिंदुओं के आधार पर यह कदम उठाया गया। आदेश जारी होते ही बिजली, पानी और अन्य जरूरी कनेक्शन काट दिए गए।मामले की शुरुआत ग्राम भगत्वारा निवासी वंदना जायसवाल की शिकायत से हुई थी। उन्होंने फैक्टरी से निकलने वाले धुएं और शोर को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उद्योग को कारण बताओ नोटिस जारी किया और जांच प्रक्रिया शुरू की। 19 दिसंबर 2023 को क्षेत्रीय कार्यालय, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम औचक निरीक्षण के लिए प्लांट पहुंची। अधिकारियों के अनुसार उन्हें उत्सर्जन मानकों और संचालन की स्थिति की जांच करनी थी, लेकिन गेट पर तैनात गार्ड ने उन्हें अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। मालिकों से बातचीत के बाद भी निरीक्षण टीम को रोके रखा गया। इस वजह से न तो मशीनों की स्थिति देखी जा सकी और न ही वायु व ध्वनि प्रदूषण की जांच हो पाई। रिकॉर्ड की पड़ताल में यह भी सामने आया कि उद्योग को जल और वायु अधिनियम के तहत 16 फरवरी 2018 को जो सहमति मिली थी, उसकी वैधता 31 दिसंबर 2020 तक ही थी। इसके बाद न तो नवीनीकरण कराया गया और न ही नया आवेदन दिया गया। यानी इकाई लंबे समय से बिना वैध अनुमति संचालित हो रही थी। इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए 20 दिसंबर 2023 को प्लांट बंद करने की संस्तुति की गई। सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31 ‘ए’ के तहत तत्काल प्रभाव से बंदी आदेश जारी किया गया।कार्रवाई के दौरान उपजिलाधिकारी, तहसील सदर क्षितिज दिवेदी, सीओ सिटी विनी सिंह, सहायक पर्यावरण अभियंता, यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कोतवाली प्रभारी चंद्रकांत मिश्र और विद्युत विभाग के जेई समेत कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासनिक टीम ने औद्योगिक इकाई को सील कराया और संबंधित विभागों को बिजली-पानी की आपूर्ति तत्काल बंद करने के निर्देश दिए, ताकि प्लांट दोबारा चालू न हो सके। अधिकारियों ने साफ कहा कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण से समझौता नहीं किया जाएगा। निरीक्षण में बाधा डालना और बिना सहमति संचालन करना गंभीर उल्लंघन है। ऐसे मामलों में आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र में धुएं और शोर की समस्या बनी हुई थी। कार्रवाई के बाद लोगों ने राहत की उम्मीद जताई है।

अन्य औद्योगिक क्षेत्रों पर भी नजर

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक दही, अकरमपुर और बंथर औद्योगिक क्षेत्र में भी कई छोटे कारखाने मानकों के विपरीत और बिना वैध अनुमति संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कुछ इकाइयों के पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अद्यतन सहमति नहीं है, जबकि कई जगह उत्सर्जन मानकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि इन क्षेत्रों की भी क्रमवार जांच कराई जाएगी। जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि औद्योगिक विकास जरूरी है, लेकिन पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी की कीमत चुकानी पड़ेगी।

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