भूमाफियाओं के मंसूबों पर पानी : सदर तहसील में करोड़ों की जमीन खाली कराई
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Wed, Dec 31, 2025
प्रशासन ने दो टूक कहा, सरकारी जमीनों पर आगे भी चलेगा अभियान
उन्नाव। सरकारी जमीनों पर कब्जे को लेकर जिला प्रशासन ने एक बार फिर साफ संदेश दिया है कि अब ऐसे मामलों में कोई ढील नहीं बरती जाएगी। सदर तहसील के ग्राम मनभाऊना में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब सात बीघा सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया। राजस्व अभिलेखों के मुताबिक यह जमीन तालाब, बंजर और पशुचर के रूप में दर्ज थी, जिसकी मौजूदा बाजार कीमत लगभग छह करोड़ अस्सी लाख रुपये आंकी जा रही है। लंबे समय से इस जमीन पर भूमाफियाओं का कब्जा चला आ रहा था। आरोप है कि कब्जेदारों ने सरकारी रिकॉर्ड को नजरअंदाज करते हुए जमीन पर सरसों और गेहूं की फसल बो दी थी। गांव स्तर से लगातार शिकायतें मिलने के बाद जिला प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और जांच के आदेश दिए। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जमीन पूरी तरह सरकारी है और उस पर किया गया कब्जा गैरकानूनी है। इसके बाद एसडीएम सदर क्षितिज द्विवेदी के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम और गंगाघाट पुलिस ने संयुक्त रूप से मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। सबसे पहले जमीन का विधिवत सीमांकन कराया गया ताकि किसी तरह का विवाद न रहे। सीमांकन पूरा होते ही जेसीबी मशीन लगाकर खेत में खड़ी अवैध फसल को नष्ट कराया गया और जमीन को प्रशासनिक कब्जे में ले लिया गया। कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा। गंगाघाट पुलिस के साथ नायब तहसीलदार धीरज त्रिपाठी भी पूरे समय मौके पर मौजूद रहे और हर कदम पर कार्रवाई की निगरानी करते रहे। प्रशासन की सख्ती को देखते हुए कब्जेदार मौके से पहले ही फरार हो गए।
एसडीएम सदर क्षितिज द्विवेदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले में तालाब, पशुचर, बंजर और अन्य सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को चिन्हित किया जा रहा है और चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाकर उन्हें कब्जामुक्त कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध कब्जेदारों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि दोबारा ऐसी कोशिश करने से पहले लोग सौ बार सोचें।इस कार्रवाई को लेकर गांव के लोगों में भी संतोष देखने को मिला। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध कब्जों के चलते गांव में पशुओं के चरने की समस्या हो रही थी और तालाब जैसी जमीनें भी निजी इस्तेमाल में चली गई थीं। अब जमीन खाली होने से सार्वजनिक संपत्ति का सही उपयोग हो सकेगा और गांव की पुरानी व्यवस्था फिर से बहाल होगी। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी जमीनों को बचाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। संकेत साफ हैं कि आने वाले दिनों में ऐसे अभियान और तेज होंगे और भूमाफियाओं के लिए राह आसान नहीं रहने वाली।
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