गंगा एक्सप्रेसवे तैयार : मार्च में हो सकता है लोकार्पण
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Sat, Feb 21, 2026
594 किमी लंबे कॉरिडोर का 98 फीसदी काम पूरा, मेरठ से प्रयागराज की दूरी होगी आधी
उन्नाव। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल से सीधे जोड़ने वाला 594 किलोमीटर लंबा अब अपने अंतिम चरण में है। निर्माण एजेंसी का दावा है कि करीब 98 फीसदी काम पूरा हो चुका है और यदि शेष औपचारिकताएं समय पर निपट गईं तो मार्च में इसका लोकार्पण संभव है। इससे मेरठ से प्रयागराज तक की लंबी और थकाऊ यात्रा अब पहले से काफी कम समय में पूरी हो सकेगी।
सफर होगा छोटा, रफ्तार होगी तेज
अभी मेरठ से प्रयागराज तक सड़क मार्ग से पहुंचने में औसतन 10 से 12 घंटे लग जाते हैं। एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद यही दूरी छह से आठ घंटे में तय की जा सकेगी। इससे न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि ईंधन की बचत और सड़क सुरक्षा में भी सुधार की उम्मीद है। यूपीडा के परियोजना प्रमुख संजय कुमार के मुताबिक मुख्य कैरिजवे पूरी तरह तैयार है। दोनों ओर चार-चार लेन बन चुकी हैं। सड़क संकेतक, सेफ्टी बैरियर और लाइटिंग का काम भी लगभग पूरा है। कुछ हिस्सों में सर्विस रोड, इंटरचेंज और टोल प्लाजा के अंतिम काम चल रहे हैं, जिन्हें इसी महीने समेटने का लक्ष्य है।
12 जिलों को जोड़ने वाली जीवनरेखा
यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के 12 जिलों से होकर गुजर रहा है। अकेले उन्नाव जिले में इसकी लंबाई 83 किलोमीटर है और यह 76 गांवों को स्पर्श करता है। जिले में करीब 1314 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 36,200 करोड़ रुपये बताई गई है। उन्नाव के लिहाज से यह सड़क सिर्फ एक मार्ग नहीं, बल्कि बड़े बदलाव की दस्तक मानी जा रही है। स्थानीय कारोबार, कृषि उत्पादों की ढुलाई और रियल एस्टेट गतिविधियों पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।
बड़े हाईवे से सीधा कनेक्शन
उन्नाव में यह एक्सप्रेसवे कई अहम मार्गों को जोड़ेगा। सोनिक के पास कानपुर-लखनऊ हाईवे से जुड़ने के लिए जंक्शन तैयार किया गया है। नेवरना में कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी दी जा रही है। वहीं बांगरमऊ तहसील के शादीपुर गांव के पास आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए इंटरचेंज बनाया गया है। इन जंक्शनों के जरिए वाहन चालक सीधे एक्सप्रेसवे पर चढ़ और उतर सकेंगे। इससे शहर के भीतर ट्रैफिक दबाव कम होने की भी उम्मीद है।
औद्योगिक गलियारों से बदलेगा आर्थिक नक्शा
सिर्फ यातायात ही नहीं, औद्योगिक विकास भी इस परियोजना का बड़ा हिस्सा है। एक्सप्रेसवे के किनारे 300 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में दो औद्योगिक गलियारे विकसित करने की योजना है। माना जा रहा है कि इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर कनेक्टिविटी किसी भी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति देती है। ऐसे में यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को नया आकार दे सकता है।
एक नजर में प्रमुख तथ्य
कुल लंबाई: 594 किलोमीटर
अनुमानित लागत: करीब 36,200 करोड़ रुपये
चौड़ाई: लगभग 130 मीटर
उन्नाव में लंबाई: 83 किलोमीटर
प्रभावित गांव: 76
अधिग्रहित भूमि: लगभग 1314 हेक्टेयर
निर्माण एजेंसी का दावा है कि बचा हुआ काम तय समय में पूरा कर लिया जाएगा। यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो आने वाले महीनों में प्रदेश को एक और हाई-स्पीड कॉरिडोर मिल जाएगा, जो यात्रा को आसान और कारोबार को तेज बनाएगा।
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Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news
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