डिजिटल ग्रीन का 'फार्मरचैट 2.0 : भारत के 10 लाख किसानों का नया डिजिटल साथी
THE LUCKNOW TIMES
Tue, Aug 4, 2026
लखनऊ : खेती-किसानी की दुनिया में तकनीक अब वह कमाल कर रही है, जिसकी कुछ साल पहले कल्पना करना भी मुश्किल था। अक्टूबर 2024 में शुरू हुआ डिजिटल ग्रीन इंडिया का एआई आधारित फार्मिंग एडवाइजरी असिस्टेंट 'फार्मरचैट' आज देश के 10 लाख से अधिक किसानों का भरोसा बन चुका है। इसी सफर को और आगे बढ़ाते हुए संस्था ने इसका अत्याधुनिक और स्मार्ट वर्जन 'फार्मरचैट 2.0' लॉन्च कर दिया है, जिसे खास तौर पर ग्रामीण इलाकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

पारंपरिक रूप से देश के छोटे किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही समय पर सही सलाह मिलने की रही है। जानकारी कई बार होती है, लेकिन जब खेती में कोई फैसला लेना होता है, तब वह वक्त पर किसान तक नहीं पहुँच पाती। इसी खाई को पाटने के लिए इस एआई ऐप को पांच अलग-अलग भारतीय भाषाओं में उतारा गया है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए किसानों को लंबा-चौड़ा टाइप करने की जरूरत नहीं पड़ती। वे बोलकर, लिखकर या सीधे अपने खेत की फसल की फोटो खींचकर सवाल पूछ सकते हैं। कम पढ़े-लिखे किसानों के लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है।
इस ऐप के पीछे सिर्फ एक एल्गोरिदम काम नहीं कर रहा, बल्कि इसमें फाइन-ट्यून लैंग्वेज मॉडल, रिट्रीवल-ऑगमेंटेड जनरेशन (आरएजी) और रिइन्फोर्समेंट लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल हैं। सबसे खास बात यह है कि इस पर मिलने वाली हर सलाह की स्थानीय कृषि विशेषज्ञ और पशु चिकित्सक नियमित रूप से जाँच करते हैं, जिससे किसानों को मिलने वाली जानकारी 100 प्रतिशत भरोसेमंद और उनके इलाके की मिट्टी-मौसम के अनुकूल होती है।
यह तकनीक न सिर्फ असरदार है, बल्कि बेहद किफायती भी है। जहाँ पहले पारंपरिक तरीकों से एक किसान को सालभर सलाह देने में करीब 3,300 रुपये का खर्च आता था, वहीं डिजिटल ग्रीन के इस एआई मॉडल ने इस खर्च को घटाकर मात्र 33 रुपये प्रति किसान सालाना पर ला खड़ा किया है। यही वजह है कि अब तक इस प्लेटफॉर्म पर 30 लाख से अधिक सवालों के सटीक जवाब दिए जा चुके हैं और इसके करीब 45 प्रतिशत यूजर्स महिला किसान हैं। 60 डेसिबल्स और आईडीइनसाइट की स्वतंत्र स्टडीज भी यह गवाही देती हैं कि इस ऐप से जुड़ने वाले करीब 60 से 67 प्रतिशत किसान इस पर मिलने वाली सलाह को अपने खेतों में अपनाते हैं, जिससे उनके कृषि संबंधी फैसले लेने का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है।
किसानों के अनुभव और उनकी प्रतिक्रियाओं के आधार पर ही नए 'फार्मरचैट 2.0' को बेहद सरल और सहज इंटरफेस के साथ ढाला गया है। अब यह ऐप किसान के सवाल पूछने का इंतजार नहीं करता, बल्कि उनकी फसल, लोकेशन और मौसम के हिसाब से खुद-ब-खुद जरूरी सुझाव और एडवाइजरी कार्ड्स सामने ले आता है। किसान की पिछली बातचीत और जरूरतों के आधार पर इसकी प्रोफाइल लगातार अपडेट होती रहती है, ताकि उसे हर बार सबसे सटीक समाधान मिल सके।

डिजिटल ग्रीन इंडिया की सीईओ निधि भसीन का कहना है कि इस नए वर्जन का हर एक बदलाव सीधे तौर पर किसानों की राय पर आधारित है। किसानों को हमेशा से अपनी भाषा, अपने मौसम और अपनी स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक सटीक सलाह चाहिए थी, जो उन्हें रोजमर्रा की बातचीत की तरह मिल सके। संस्था यहीं नहीं रुकने वाली, बल्कि इसका अगला कदम 'एग्रीकल्चरल एआई हार्नेस' लॉन्च करना है, जिसके जरिए खेती की सलाह, मौसम की सटीक जानकारी, बाजार के भाव और सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही छत के नीचे मिल सकेगा। साल 2028 तक इस मुहिम से 35 लाख और नए किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जो देश के कृषि क्षेत्र में एक शांत और मजबूत डिजिटल क्रांति की इबारत लिख रहा है।
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