अचानक जिला अस्पताल पहुंचे डीजी हेल्थ : सफाई व्यवस्था पर सख्त रुख, मरीजों से लिया फीडबैक
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Sat, Feb 21, 2026
बोले-केबिन खाली नहीं रहना चाहिए, अनधिकृत वसूली पर जीरो टॉलरेंस की चेतावनी

उन्नाव। स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारी डॉ. पवन कुमार शनिवार को अचानक जिला अस्पताल और महिला अस्पताल पहुंच गए। बिना किसी पूर्व सूचना के हुए इस निरीक्षण ने पूरे अस्पताल प्रशासन को सतर्क कर दिया। डॉक्टरों से लेकर कर्मचारियों तक में हलचल दिखी। डीजी हेल्थ ने ओपीडी, इमरजेंसी, वार्ड और साफ-सफाई की स्थिति को बारीकी से देखा और मरीजों से सीधे बात कर जमीनी हालात समझे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दौरा शासन स्तर से मिले निर्देशों के तहत किया गया है। मकसद साफ है, सरकारी अस्पतालों में मरीजों को तय मानकों के मुताबिक सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं, इसकी वास्तविक तस्वीर देखना। उन्होंने कहा कि कागजों पर व्यवस्था बेहतर दिखना काफी नहीं है, असली कसौटी मरीजों का अनुभव है।
ओपीडी में डॉक्टर मौजूद, पर सफाई पर नाराजगी
निरीक्षण के दौरान डीजी डॉ. पवन कुमार पुरुष और महिला ओपीडी में डॉक्टर मरीजों को देखते मिले। वार्डों में भर्ती मरीजों से भी उन्होंने इलाज, दवाओं और व्यवहार को लेकर सवाल किए। ज्यादातर मरीजों ने उपचार को लेकर संतोष जताया। हालांकि अस्पताल परिसर में सफाई व्यवस्था उन्हें संतोषजनक नहीं लगी। कुछ स्थानों पर गंदगी देखकर उन्होंने मौके पर ही नाराजगी जताई। सुपरवाइजरी स्टाफ को सख्त लहजे में कहा गया कि अस्पताल में स्वच्छता से कोई समझौता नहीं होगा। संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। उनका कहना था कि अस्पताल वह जगह है जहां मरीज इलाज के लिए आते हैं, संक्रमण का खतरा बढ़ाने के लिए नहीं।
मुफ्त इलाज पर जीरो टॉलरेंस
डीजी हेल्थ ने खास तौर पर यह भी स्पष्ट किया कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों से किसी भी प्रकार का अनधिकृत शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को निर्देश दिए कि सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सभी सुविधाएं पूरी पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराई जाएं। यदि कहीं से भी अवैध वसूली की शिकायत मिली तो जिम्मेदारी तय होगी।
समय पर ओपीडी और खाली केबिन पर सख्ती
डॉक्टरों की समयपालन को लेकर भी उन्होंने साफ संदेश दिया। राउंड लेने के बाद निर्धारित समय पर ओपीडी में बैठना अनिवार्य बताया गया। उन्होंने कहा कि मरीज के आने पर केबिन खाली नहीं मिलना चाहिए। जिन चिकित्सकों के पास अतिरिक्त प्रशासनिक प्रभार है, उन्हें भी अपनी क्लिनिकल जिम्मेदारियां प्राथमिकता से निभानी होंगी। यदि अन्य विशेषज्ञ उपलब्ध हैं तो वे भी नियमित रूप से ओपीडी में बैठें।
प्रशासनिक सतर्कता का संकेत
यह दौरा केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं माना जा रहा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्पष्ट संकेत है कि अब अस्पतालों की कार्यप्रणाली की निगरानी सीधे उच्च स्तर से की जाएगी। मरीजों की सुविधा, पारदर्शिता और स्वच्छता पर विशेष जोर रहेगा।डीजी हेल्थ के इस अचानक निरीक्षण के बाद अस्पताल प्रशासन हर स्तर पर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुट गया है। आने वाले दिनों में सुधार की असली तस्वीर क्या होगी, यह मरीजों के अनुभव से ही तय होगा।
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