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उद्योग बनाम विभाग : सीईटीपी क्षमता पर खिंची रस्साकशी, रिपोर्ट पर टिकी उम्मीद

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Sat, Dec 6, 2025
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जल निगम एमडी ने किया निरीक्षण, टेनरियों से 10 साल का उत्पादन रिकॉर्ड तलब

उन्नाव। दही औद्योगिक क्षेत्र का कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) पिछले कई वर्षों से आधी क्षमता पर ही चलता आ रहा है। तकनीकी सुधार, क्षमता वृद्धि और लागत बंटवारे को लेकर उद्योगों और विभागों के बीच बनी खींचतान अब भी खत्म नहीं हुई है। हालात यह हैं कि प्लांट के अपग्रेडेशन पर बार-बार मीटिंग होती है, प्रस्ताव बनते हैं, लेकिन असली फैसले रिपोर्टों के अभाव और उद्यमियों की आपत्तियों में उलझ जाते हैं।
इसी जटिल स्थिति को सुलझाने के लिए जल निगम ग्रामीण के प्रबंध निदेशक डॉ. राजशेखर शुक्रवार को पांच सदस्यीय टीम के साथ मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सीईटीपी की मौजूदा क्षमता, प्रदूषण लोड, क्रोमियम रिमूवल सिस्टम और टेनरियों की उत्पादन स्थिति को एक-एक करके परखा। बैठक में ये बात साफ सामने आई कि उत्पादन कम होने का तर्क देकर उद्यमी क्षमता घटाने की मांग कर रहे हैं, जबकि विभाग फैक्ट्री-स्तर पर लगे क्रोमियम प्लांटों और पानी की गुणवत्ता की ठोस जांच के बाद ही आगे बढ़ना चाहता है। अब पूरा मामला उस विस्तृत रिपोर्ट पर टिक गया है, जिसे एक सप्ताह और तीन दिन की समय सीमा में तैयार करना है। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर तय होगा कि सीईटीपी की क्षमता बढ़ेगी, घटेगी या मौजूदा ढांचे में ही सुधार होगा।

उद्यमियों ने कहा, उत्पादन घटा… क्षमता भी घटाई जाए

सीईटीपी से जुड़े 16 उद्यमियों ने साफ कहा कि चर्म उत्पादन साल दर साल घट रहा है। ऐसे में प्लांट की क्षमता पहले जैसी रखना व्यावहारिक नहीं है। उद्यमियों ने यह भी दावा किया कि फैक्टरियों में निजी स्तर पर क्रोमियम रिमूवल प्लांट पहले से लगे हैं और इन्हें दोबारा लगाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
ऑनलाइन मीटिंग में एनएमसीजी के प्रतिनिधि और जिलाधिकारी ने भी अपने सुझाव रखे।

10 साल का पूरा रिकॉर्ड एक हफ्ते में

प्रबंध निदेशक ने उद्यमियों को निर्देश दिया कि पिछले दस वर्षों में उत्पादन कितना रहा, उसकी पूरी जानकारी एक सप्ताह में उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि डाटा स्पष्ट होगा तो क्षमता बढ़ाने या घटाने पर असली फैसला लिया जा सकेगा।

क्रोमियम प्लांट की जांच, पानी की क्वालिटी टेस्ट कराने का आदेश

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शशि बिंदकर को सभी टेनरियों में लगे क्रोमियम रिमूवल प्लांट की मौके पर जांच करने को कहा गया है। इसके साथ ही फैक्टरियों के आउटलेट और सीईटीपी इनलेट से पानी के नमूने लेकर लैब में परीक्षण कराने और एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। शोधित पानी की अलग रिपोर्ट तीन दिन में देनी होगी। एमडी ने साफ कहा कि वास्तविक प्रदूषण लोड और फैक्टरियों की क्षमता के आधार पर ही आगे का मॉडल तय होगा।

छह साल से 50 प्रतिशत पर चल रहा प्लांट

सीईटीपी पिछले छह वर्षों से मात्र 50 प्रतिशत डिस्चार्ज पर चल रहा है। कई बार मीटिंग हुई, पर कोई ठोस फैसला नहीं निकल पाया। उद्यमी अपने हिस्से की लागत को ज्यादा बताते हुए भुगतान करने में पीछे हट रहे थे। अब डीएम गौरांग राठी को सीईटीपी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। पहले 114 करोड़ रुपये की लागत से 2.6 एमएलडी क्षमता वाला प्लांट बनना था और टेंडर भी जारी हो चुका था। नई योजना के अनुसार अब 1.4 एमएलडी का प्लांट तैयार किया जाएगा जिसकी लागत 67 करोड़ तय हुई है। इसमें 25 प्रतिशत हिस्सा उद्यमियों को वहन करना है। योजना को नमामि गंगे की मंजूरी मिलते ही काम शुरू किया जाएगा।

आगे का रास्ता

सीईटीपी की असली जरूरत क्या है और उद्योगों का मौजूदा प्रदूषण लोड कितना है, यह सब रिपोर्ट्स आने के बाद ही साफ होगा। हालांकि सबकी नजरें अब एक हफ्ते बाद आने वाली रिपोर्ट पर टिक गई हैं, जो तय करेगी कि दही औद्योगिक क्षेत्र में यह रुका हुआ प्रोजेक्ट फिर पटरी पर आएगा या नहीं।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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