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क्लोरीन डोजर ठप : शहर में बिना शुद्धिकरण घरों तक पहुंच रहा पानी

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Sun, Jan 4, 2026
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24 ट्यूबवेलों में अधिकतर पर खराब पड़ी मशीनें, तीन लाख आबादी की सेहत पर खतरा

उन्नाव। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जलापूर्ति से हुई मौतों ने जिस तरह चिंता बढ़ाई थी, वैसी ही आशंका अब उन्नाव को लेकर भी गहराने लगी है। शहर की पेयजल व्यवस्था इन दिनों गंभीर लापरवाही का शिकार है। नगर पालिका क्षेत्र में लोगों को जो पानी मिल रहा है, वह शुद्धिकरण की जरूरी प्रक्रिया से गुजरे बिना सीधे नलों तक पहुंच रहा है। हालात ऐसे हैं कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो उन्नाव में भी दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियां विकराल रूप ले सकती हैं। नगर में जलापूर्ति के लिए कुल 24 ट्यूबवेल संचालित हैं। नियम के मुताबिक हर ट्यूबवेल की मुख्य पाइपलाइन में क्लोरीन डोजर मशीन लगी होती है, जिससे तय मात्रा में क्लोरीन मिलाकर पानी को पीने योग्य बनाया जाता है। लेकिन हकीकत यह है कि अब्बासबाग, भरत मिलाप, बाबूगंज, मोहारीबाग समेत अधिकांश इलाकों के ट्यूबवेलों पर ये मशीनें लंबे समय से खराब पड़ी हैं। कहीं मशीनें पूरी तरह बंद हैं, तो कहीं क्लोरीन मिलाने की प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। इसका सीधा असर शहर की करीब तीन लाख आबादी पर पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि कई मोहल्लों में पानी से दुर्गंध आती है और कभी-कभी उसका रंग भी बदला हुआ नजर आता है। पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों से गंदगी मिल जाने की आशंका और बढ़ जाती है। कॉलोनियों और तंग गलियों में लोहे की पाइपलाइन नालियों के भीतर से जालों की तरह निकली हैं। लोहे की पाइप होने के कारण इनमें जंग जल्दी लगता है, जिससे लीकेज की संभावना बढ़ जाती है। पालिका के दावों के विपरीत, कई वार्डों में आज भी लोग असुरक्षित तरीके से बिछी लाइनों से पानी पीने को मजबूर हैं। इसके बावजूद नगर पालिका स्तर पर न तो नियमित जांच हो रही है और न ही वैकल्पिक शुद्धिकरण की कोई ठोस व्यवस्था की गई है। चिकित्सकों के मुताबिक यह स्थिति बेहद खतरनाक है। फिजिशियन डॉ. कौशलेंद्र प्रकाश बताते हैं कि बिना क्लोरीन मिला पानी लंबे समय तक पीने से डायरिया, पीलिया, टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। खासकर छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं। दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियां अक्सर अचानक गंभीर रूप ले लेती हैं, जिससे अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ जाता है। शहरवासियों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले। न मशीनों की मरम्मत हुई और न ही पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच शुरू हो सकी। लोगों में नाराजगी इस बात को लेकर है कि जब दूसरे शहरों में दूषित जलापूर्ति से जानें जा चुकी हैं, तो उन्नाव में चेतावनी के बाद भी सुधार क्यों नहीं किया जा रहा। इस मामले में जलकल प्रभारी अनिल शर्मा का कहना है कि क्लोरीन डोजर मशीनों की मरम्मत के लिए जरूरी सामान मंगवाया गया है, जो सोमवार तक पहुंच जाएगा। इसके बाद सभी खराब मशीनों को दुरुस्त कराकर शुद्धिकरण प्रक्रिया को फिर से नियमित किया जाएगा। हालांकि सवाल यही है कि जब तक यह व्यवस्था पूरी तरह बहाल नहीं होती, तब तक लोगों की सेहत की जिम्मेदारी कौन लेगा। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पेयजल का यह संकट किसी बड़े स्वास्थ्य संकट में बदल सकता है।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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