सर्वप्रथम भुगतान करने बाली द्वारिकेश चीनी मिल : गन्ना किसानों के खातों में भेजे 20 करोड़ 72 लाख 93 हजार
Tue, Dec 23, 2025
उत्तर प्रदेश बरेली
: दरअसल जनपद के फरीदपुर तहसील क्षेत्र में स्थित सर्वप्रथम भुगतान करने बाली द्वारिकेश चीनी मिल को पेराई सत्र 2025-26 में 9,दिसंबर से 15 दिसम्बर तक का भुगतान किसानों द्वारा आपूर्ति किए गए गन्ना मूल्य का भुगतान रुपए 20 करोड़ 72 लाख 93 हजार समिति द्वारा उपलब्ध कराए गए गन्ना किसानों के संबंधित बैंक खातो में 22 दिसंबर को भेजा गया है।सर्वप्रथम और सर्वाधिक भुगतान पाकर किसानों के चेहरे खिल उठे कई किसानों ने खुशी जाहिर करते हुए एक दूसरे को मिठाई फल आदि खिलाये।द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज प्रबंधन ने पत्र के माध्यम से बताया है कि 2025-26 के गन्ना पेराई सत्र में अब तक गन्ना किसानों के खातों में 10591 करोड़ 99 लाख रुपए का कुल भुगतान भेजा जा चुका है।मिल प्रबंधन ने किसानों से अनुरोध करते हुए कहा है कि किसान बन्धु चीनी मिल द्वारा चलाई जा रही आकर्षक विकास योजना का लाभ उठाते हुए अधिक से अधिक क्षेत्र में गन्ने की बुवाई करें साथ ही अनुरोध किया है कि अपनी चीनी मिल को साफ-सुथरा एवं ताजा गन्ना ही आपूर्ति करें।द्वारिकेश चीनी मिल के लिए किसानों का हित ही सर्वोपरि है तथा समय से किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध है।चीनी मिल प्रबन्धन द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि कम तापमान में पौधे गन्ने की कटाई न करें अन्यथा पेड़ी में फुटाव नहीं होगा।द्वारिकेश शुगर इण्डस्ट्रीज लि0,प्रबंधन ने समस्त गन्ना किसानों को यह विश्वास दिलाया है कि आपके क्षेत्र में विकास एवं किसान भाईयों की सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति के लिये सदैव तत्पर है और रहेगी ताकि हमारे गन्ना किसान बन्धु अधिक से अधिक लाभ कमा सकें।
कागजों में साफ माइनर : हकीकत में झाड़ियों में दबी जलधारा
Mon, Dec 22, 2025
अचलगंज क्षेत्र में मुख्य माइनरों की अधूरी सफाई, वर्षों से टेल तक नहीं पहुंचा पानी
उन्नाव। जनपद में माइनरों की सिल्ट सफाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हर साल की तरह इस बार भी कागजों में तो सफाई पूरी दिखाई गई, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। हालात यह हैं कि जहां सड़क से गुजरने वालों की नजर पड़ती है, वहीं तक माइनर चमचमाती दिखती है और उसके आगे जाते ही झाड़ियां, खरपतवार और जमी सिल्ट पानी के रास्ते को पूरी तरह रोक देती है। ऐसे में टेल तक पानी पहुंचने की उम्मीद किसानों के लिए सिर्फ एक सपना बनकर रह गई है। सिकंदरपुर कर्ण क्षेत्र में खेती पूरी तरह माइनरों पर निर्भर है। यही माइनर क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की फसल की जीवनरेखा हैं। मगर सिल्ट सफाई में लगातार हो रही अनदेखी और भ्रष्टाचार के चलते किसानों को हर साल पानी के संकट से जूझना पड़ता है। क्षेत्र की प्रमुख माइनर मुगलपुर इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन चुकी है। बेहटी गोपालपुर के पास से गुजरने वाली माइनर में अचलगंज-गंगाघाट मुख्य मार्ग के किनारे सिर्फ करीब तीन सौ मीटर तक ही सफाई की गई। सड़क किनारे तक माइनर साफ दिखे, इसके लिए मशीनें खूब चलीं, लेकिन उसके आगे पूरी माइनर झाड़ियों में गुम है। पानी बहने का रास्ता कहीं नजर नहीं आता। किसानों का कहना है कि ठेकेदारों का तरीका हर साल एक जैसा रहता है। जहां आम आदमी और अधिकारी आसानी से देख सकें, वहां तक सफाई कर दी जाती है, ताकि निरीक्षण में सब ठीक नजर आए। लेकिन जो हिस्से गांवों के भीतर और खेतों के पास हैं, वहां न तो मशीन पहुंचती है और न ही फावड़ा चलता है। नतीजा यह कि पानी आगे बढ़ ही नहीं पाता। अचलगंज माइनर की हालत भी इससे अलग नहीं है। कस्बे से आगे बलउखेड़ा गांव के बाद माइनर की पहचान ही मिटती जा रही है। ग्रामीण बताते हैं कि करीब बीस साल से बलउखेड़ा के आगे माइनर में पानी नहीं पहुंचा। खेत सूखे पड़े हैं और किसान बारिश के भरोसे खेती करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों और किसानों में इस स्थिति को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि हर साल सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने की बात कही जाती है, लेकिन फायदा जमीन पर दिखाई नहीं देता। अगर समय रहते पूरी माइनर की सफाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में खेती पर इसका और बुरा असर पड़ेगा।
इस पूरे मामले पर शारदा खंड उन्नाव के अधिशासी अभियंता गगन कुमार शुक्ल ने कहा कि शिकायत उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की जांच कराई जाएगी और जहां-जहां सफाई अधूरी है, वहां पूरी माइनर की सिल्ट सफाई कराई जाएगी, ताकि पानी टेल तक पहुंच सके। अब देखना यह है कि जांच और आश्वासन कागजों तक सीमित रहते हैं या वास्तव में खेतों तक पानी पहुंचाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता है। किसानों की नजरें एक बार फिर सिस्टम पर टिकी हैं।
डेयरी पर गंभीर आरोप : खेती और पशुओं पर मंडराया संकट
Sun, Dec 21, 2025
नाली के रास्ते रजबहे में छोड़ा जा रहा केमिकल मिला पानी, कार्रवाई की मांग
उन्नाव। नगर पंचायत औरास क्षेत्र में पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। मंसूरी धर्म कांटा के पास स्थित नमस्ते इंडिया डेयरी पर रजबहे में जहरीला और केमिकल मिला दूषित पानी छोड़े जाने के आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि डेयरी का गंदा पानी नाली के जरिए सीधे रजबहे में बहाया जा रहा है, जिससे पूरे इलाके में नाराजगी और चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डेयरी से निकलने वाला यह पानी बेहद बदबूदार होता है और उसमें केमिकल की तेज गंध आती है। जैसे ही यह पानी नाली से होकर रजबहे में पहुंचता है, आसपास का वातावरण दूषित हो जाता है। कुछ देर में ही बदबू फैल जाती है, जिससे वहां रहना मुश्किल हो जाता है। लोगों का आरोप है कि यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।
गांव के निवासी राम मोहन, शिव प्रकाश और प्यारेलाल बताते हैं कि रजबहे का पानी केवल नहर नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है। इसी पानी से खेतों की सिंचाई होती है और पशु भी इसी पर निर्भर हैं। जब इसमें डेयरी का केमिकल युक्त गंदा पानी मिल रहा है, तो फसलों और पशुओं दोनों के लिए खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ पशुओं में बीमारी के लक्षण भी दिखने लगे हैं, जबकि खेतों में फसल पर इसका असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। किसानों का दर्द यह है कि अगर रजबहे का पानी लगातार दूषित होता रहा, तो जमीन की उर्वरता धीरे-धीरे खत्म हो सकती है। इससे फसल उत्पादन घटेगा और सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ेगा। एक किसान ने बताया कि हम पहले ही महंगाई और लागत से परेशान हैं, अगर पानी भी जहर बन गया तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि डेयरी के कर्मचारी रोजाना यह दूषित पानी बहाते हैं। कई बार इसकी शिकायत नगर पंचायत औरास और अन्य संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि या तो शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा या फिर कहीं न कहीं लापरवाही बरती जा रही है।स्थानीय महिलाओं और बुजुर्गों में खास चिंता है। उनका कहना है कि इस गंदे पानी और बदबू से बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। अगर समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो इलाके में बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाएगा। लोगों को डर है कि आगे चलकर त्वचा रोग, सांस की दिक्कत और पेट से जुड़ी बीमारियां आम हो सकती हैं। अब क्षेत्र के लोग खुलकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि नमस्ते इंडिया डेयरी से निकलने वाले पानी की तत्काल जांच कराई जाए और यह साफ किया जाए कि उसमें कौन-कौन से केमिकल मिले हैं। साथ ही रजबहे में किसी भी तरह का दूषित पानी गिराने पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। यह मामला न सिर्फ पर्यावरण प्रदूषण से जुड़ा है, बल्कि किसानों की आजीविका और आम लोगों की सेहत से भी सीधा संबंध रखता है। अब देखना यह है कि नगर पंचायत औरास और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेते हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाते हैं।