कागजों में साफ माइनर : हकीकत में झाड़ियों में दबी जलधारा
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Mon, Dec 22, 2025
अचलगंज क्षेत्र में मुख्य माइनरों की अधूरी सफाई, वर्षों से टेल तक नहीं पहुंचा पानी
उन्नाव। जनपद में माइनरों की सिल्ट सफाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हर साल की तरह इस बार भी कागजों में तो सफाई पूरी दिखाई गई, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। हालात यह हैं कि जहां सड़क से गुजरने वालों की नजर पड़ती है, वहीं तक माइनर चमचमाती दिखती है और उसके आगे जाते ही झाड़ियां, खरपतवार और जमी सिल्ट पानी के रास्ते को पूरी तरह रोक देती है। ऐसे में टेल तक पानी पहुंचने की उम्मीद किसानों के लिए सिर्फ एक सपना बनकर रह गई है। सिकंदरपुर कर्ण क्षेत्र में खेती पूरी तरह माइनरों पर निर्भर है। यही माइनर क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की फसल की जीवनरेखा हैं। मगर सिल्ट सफाई में लगातार हो रही अनदेखी और भ्रष्टाचार के चलते किसानों को हर साल पानी के संकट से जूझना पड़ता है। क्षेत्र की प्रमुख माइनर मुगलपुर इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन चुकी है। बेहटी गोपालपुर के पास से गुजरने वाली माइनर में अचलगंज-गंगाघाट मुख्य मार्ग के किनारे सिर्फ करीब तीन सौ मीटर तक ही सफाई की गई। सड़क किनारे तक माइनर साफ दिखे, इसके लिए मशीनें खूब चलीं, लेकिन उसके आगे पूरी माइनर झाड़ियों में गुम है। पानी बहने का रास्ता कहीं नजर नहीं आता। किसानों का कहना है कि ठेकेदारों का तरीका हर साल एक जैसा रहता है। जहां आम आदमी और अधिकारी आसानी से देख सकें, वहां तक सफाई कर दी जाती है, ताकि निरीक्षण में सब ठीक नजर आए। लेकिन जो हिस्से गांवों के भीतर और खेतों के पास हैं, वहां न तो मशीन पहुंचती है और न ही फावड़ा चलता है। नतीजा यह कि पानी आगे बढ़ ही नहीं पाता। अचलगंज माइनर की हालत भी इससे अलग नहीं है। कस्बे से आगे बलउखेड़ा गांव के बाद माइनर की पहचान ही मिटती जा रही है। ग्रामीण बताते हैं कि करीब बीस साल से बलउखेड़ा के आगे माइनर में पानी नहीं पहुंचा। खेत सूखे पड़े हैं और किसान बारिश के भरोसे खेती करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों और किसानों में इस स्थिति को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि हर साल सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने की बात कही जाती है, लेकिन फायदा जमीन पर दिखाई नहीं देता। अगर समय रहते पूरी माइनर की सफाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में खेती पर इसका और बुरा असर पड़ेगा।
इस पूरे मामले पर शारदा खंड उन्नाव के अधिशासी अभियंता गगन कुमार शुक्ल ने कहा कि शिकायत उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की जांच कराई जाएगी और जहां-जहां सफाई अधूरी है, वहां पूरी माइनर की सिल्ट सफाई कराई जाएगी, ताकि पानी टेल तक पहुंच सके। अब देखना यह है कि जांच और आश्वासन कागजों तक सीमित रहते हैं या वास्तव में खेतों तक पानी पहुंचाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता है। किसानों की नजरें एक बार फिर सिस्टम पर टिकी हैं।
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