: उन्नाव में बढ़ते प्रदूषण पर एनजीटी सदस्य ने जताई चिंता
Sat, Sep 6, 2025
गंगा-सई की हालत सुधारने पर जोर, डीजे संचालन पर होगी सख्ती
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सदस्य एवं न्यायाधीश डॉ. अफरोज अहमद की अगुवाई में शनिवार को आयोजित जिला पर्यावरण समिति की बैठक में जिले की बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में जिले की लाइफलाइन कही जाने वाली नदियों में लगातार गिर रहे अशोधित सीवेज के खतरनाक स्तर और शहरी क्षेत्रों में बेकाबू हो रहे ध्वनि प्रदूषण पर तत्काल अंकुश लगाने के सख्त निर्देश जारी किए गए। जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने एनजीटी सदस्य के सामने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में चल रहे प्रयासों और आने वाली बाधाओं से अवगत कराया।
सीवेज प्रदूषण पर चिंता
एनजीटी सदस्य डॉ. अहमद ने नदियों में सीधे गिरने वाले घरेलू व औद्योगिक सीवेज के उपचार को अनिवार्य बताया। उन्होंने खतरनाक रसायन क्रोमियम से होने वाले प्रदूषण और जल प्रदूषण पर विशेष तौर पर रोक लगाने का आदेश दिया। उन्होंने चेताया कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भूजल भी दूषित हो जाएगा। नगर पालिका और उद्योग विभाग को इस दिशा में ठोस कार्ययोजना बनाने को कहा गया। बैठक में साफ हुआ कि बिना शोधन संयंत्र लगाए कोई उद्योग नहीं चलेगा।
ध्वनि प्रदूषण पर कार्रवाई
शहरी इलाकों में डीजे और साउंड सिस्टम से हो रहे ध्वनि प्रदूषण पर नाराजगी जताते हुए न्यायाधीश ने राजस्व एवं पुलिस विभाग को इनके संचालकों के खिलाफ सख्ती से नियम लागू करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों और रात्रि आयोजनों में ध्वनि सीमा का पालन हर हाल में होना चाहिए। नियम तोड़ने वालों पर चालान और उपकरण जब्ती की कार्रवाई हो। बैठक में यह भी कहा गया कि आम नागरिकों की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो।
वैज्ञानिक कचरा निस्तारण पर जोर
बैठक में कूड़े के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण और पर्यावरण सुधार के लिए सामूहिक प्रयासों की अपील की गई। कहा गया कि ठोस कचरे के लिए नगर पालिका को प्रभावी प्लान बनाना चाहिए। गांवों में भी कचरा निस्तारण के लिए पंचायतों को जिम्मेदार बनाया जाए। प्लास्टिक कचरे को अलग करने और पुनर्चक्रण की व्यवस्था सुनिश्चित हो। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए नियमित अभियान चलाने की भी सिफारिश की गई।
जिले की स्थिति पर चर्चा
बैठक में जिले की भौगोलिक स्थिति और पर्यावरणीय दबाव पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बताया गया कि 4558 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाले जिले की आबादी 31 लाख से अधिक है। यहाँ गंगा नदी 128 किमी और सई नदी लगभग 198 किमी का सफर तय करती है, लेकिन चिंता का विषय यह है कि 2023 के अनुसार मात्र 6% भूभाग ही वनाच्छादित है।
बैठक में मौजूद लोग
इस महत्वपूर्ण बैठक में जिलाधिकारी गौरांग राठी के अलावा अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) अभिताभ यादव, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे विदेश, वन अधिकारी आरूषी मिश्रा, परियोजना निदेशक तेजवंत सिंह और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शशि विंदकर उपस्थित रहे।
: जीएनआरएफ फाउंडेशन की पहल, टीबी मरीजों को मिला पोषण का सहारा
Wed, Sep 3, 2025
जामा मस्जिद में हुआ कार्यक्रम, सिटी मजिस्ट्रेट व एसीएमओ रहे
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। टीबी जैसी गंभीर बीमारी से लड़ाई में अब सिर्फ दवा ही नहीं, बल्कि पौष्टिक आहार भी एक महत्वपूर्ण हथियार साबित हो रहा है। इसी धारणा को साकार करते हुए जीएनआरएफ फाउंडेशन ने सोमवार को शहर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद परिसर में एक विशेष पोषण आहार वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें दर्जनों क्षय रोग पीड़ित मरीजों को पोषण किटें वितरित की गईं।
इस अवसर पर सिटी मजिस्ट्रेट श्री राजीव राज एवं एसीएमओ ने मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचकर न सिर्फ इस पहल को सराहा, बल्कि मरीजों के बीच स्वयं जाकर उनका हौसला भी बढ़ाया।
इस मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट श्री राजीव राज ने कहा कुपोषण टीबी जैसी बीमारियों को न्योता देता है और मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है। जीएनआरएफ फाउंडेशन द्वारा उठाया गया यह कदम निश्चित रूप से मरीजों के इलाज और जल्द स्वस्थ होने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पहल समाजसेवा के क्षेत्र में एक मिसाल है और अन्य संस्थाओं को भी इस तरह का सहयोग करने के लिए प्रेरित करेगी।
एसीएमओ ने अपने संबोधन में कहा कि टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय अभियान में पोषण एक आधारशिला है। केवल दवा से ही नहीं, बल्कि पौष्टिक भोजन से ही मरीज इस बीमारी को पूरी तरह हरा सकते हैं।
जीएनआरएफ फाउंडेशन के प्रतिनिधि ने बताया कि यह अभियान एक निरंतर प्रक्रिया है और भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य सिर्फ भोजन वितरित करना नहीं, बल्कि टीबी के खिलाफ लड़ाई में समाज के हर वर्ग को जागरूक करना और उनसे जोड़ना है।
कार्यक्रम के अंत में पोषण किट पाकर राहत और खुशी से भरे मरीजों ने फाउंडेशन और प्रशासन का आभार जताया। इस अवसर पर सैय्यद वसीक अत्तारी, मौलाना असलम मदनी, डॉ. अजीजुद्दीन खान, उवैस खान सहित शहर के कई गणमान्य नागरिक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
: ऑपरेशन सिंदूर केस में अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को 'सुप्रीम' से बड़ी राहत!
Mon, Aug 25, 2025
ऑपरेशन सिंदूर केस में अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को 'सुप्रीम' से बड़ी राहत!
नई दिल्ली : दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निचली अदालत को अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ दर्ज FIR के संबंध में हरियाणा SIT द्वारा दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने से रोक दिया,अली खान महमूदाबाद पर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट करने पर यह मामला दर्ज किया गया थायह मामला न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया. शीर्ष अदालत ने महमूदाबाद के खिलाफ उनके विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दर्ज दो FIR की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था.एसआईटी ने पीठ को बताया कि उनमें से एक में उसने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है. वहीं एक में 22 अगस्त को आरोपपत्र दाखिल किया गया था, जब यह पाया गया कि कुछ अपराध सिद्ध हुए थे. पीठ ने निचली अदालत को मामले में कोई भी आरोप तय करने से भी रोक दियामहमूदाबाद का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आरोपपत्र दाखिल करने को "बेहद दुर्भाग्यपूर्ण" बताया. सिब्बल ने कहा कि उन्होंने उन पर बीएनएस की धारा 152 (देशद्रोह) के तहत मामला दर्ज किया है, जिसकी वैधता को चुनौती दी जा the रही है पीठ ने सिब्बल से आरोपपत्र की जांच करने और कथित अपराधों का एक चार्ट तैयार करने को कहा, पीठ ने कहा कि वह अगली सुनवाई पर प्रस्तुतियों पर विचार करेगीइस साल मई में, सर्वोच्च न्यायालय ने प्रोफेसर को अंतरिम जमानत दे दी थी, लेकिन उनके खिलाफ जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. सर्वोच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का निर्देश दिया थासर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि वह इस मामले से संबंधित कोई लेख, ऑनलाइन पोस्ट या भाषण नहीं देंगे, और वह 22 अप्रैल के पहलगाम हमले या ऑपरेशन सिंदूर पर भी कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. पीठ ने अपने आदेश में उनसे अपना पासपोर्ट जमा करने को कहा थाहरियाणा पुलिस ने 18 मई को अशोका विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर को गिरफ्तार किया था, जब राज्य महिला आयोग ने ऑपरेशन सिंदूर की मीडिया कवरेज पर टिप्पणी करने वाली एक फेसबुक पोस्ट को लेकर उन्हें तलब किया था!