: शहर में मांस-मछली-मुर्गा की सभी दुकानें अवैध, एक्शन में प्रशासन
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Thu, Jul 10, 2025
दूकानदारों को थमाया नोटिस, पुलिस के साथ संयुक्त टीम करेगी कार्रवाई
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान✍️
उन्नाव। शहर में मांस, मछली और मुर्गा की बिक्री अवैध रूप से हो रही है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के अनुसार, किसी भी दुकानदार के पास वैध लाइसेंस नहीं है। शहर में मीट, मछली और मुर्गा की बिक्री के लिए लाइसेंस देने का अधिकार भी 5 अगस्त 2011 में लागू हुए खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियम 2011 के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) के पास ही है। वहीं सड़क किनारे खुली मांस की दूकानों की वजह से नालियों में गंदगी और दुर्गंध से राहगीरों की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में नगरपालिका ने 33 से अधिक अवैध रुप से दूकानदारों को नोटिस देकर तत्काल दुकानें बंद करने को कहा गया है। ऐसा न करने पर नगरपालिका ने कार्रवाई की भी चेतावनी दी है।
नपा कार्यालय के चंद कदमों की दूरी पर संचालित दूकानें
पालिका की ओर से 33 से अधिक मीट की दुकानों को नोटिस थमाया गया। बता दें कि नगरपालिका कार्यालय के चंद कदमों की दूरी पर मोहल्ला कंजी, नगरपालिका रोड दादामियां चौराहा पर धड़ल्ले से संचालित है। इसके अलावा किला चौकी क्षेत्र के मोहल्ला दादामियां चौराहा, छिपयाना चौराहा और तालिब सरांय में मनाही के बावाजूद घरों से भैंस का मीट अवैध रुप से निरंतर बिक रहा है। जिस के बाद किला चौकी पुलिस की भूमिका पर भी प्रश्नचिंह उठने लगे है। हालाकिं प्रशासन की सख्ती व सावन माह के मद्देनजर पुलिस ने नगर में मीट की दुकानों को बंद कराया है लेकिन सूत्रों की मानें तो भैंस का मांस की बिक्री चोरी छिपे की जा रही है।
दूकानदारों को थमाया नोटिस
इसके अलावा सड़क किनारे जवाहर नगर, शेखपुर, कासिम नगर, कांशीराम कालोनी, दरोगाबाग समेत कई इलाकों के मुख्य मार्गों पर दूकानें सज रही है। अब नगरपालिका की ओर से मांस, मछली और मुर्गा बिक्री करने वाले 33 से अधिक व्यापारियों को नोटिस दिया है। नोटिस में निर्देशित किया कि तत्काल दुकानें बंद करें ऐसा न करने पर प्रशासन की ओर से उन पर कार्रवाई की जाएगी।
जिम्मेदारों की बात
नगरपालिका ईओ संजय गौतम ने बताया कि दुकानों को चिन्हित कर नोटिस दी गई है। इसके अलावा खाद्य विभाग को भी सूची दी गई। नोटिस पर अमल न करने पर दुकानदारों पर कार्रवाई की जाएगी। इधर, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के फूड इंसपेक्टर शैलेन्द्र दीक्षित का कहना है कि मानकों पर न होने के कारण किसी भी दुकान को लाइसेंस नहीं जारी किया गया ऐसे में सभी दुकानें अवैध हैं। नगरपालिका की तरफ से अवैध रुप से चिकन मटन संचालित दूकानों की सूंची मिल गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन व नगरपालिका और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम जल्द इन अवैध दूकानों पर कार्रवाई शुरु की जाएगी। वहीं सदर कोतवाली प्रभारी अवनीश सिंह ने कहा घरों से भैंस का मांस बिकने की जानकारी मेरे पास नही है इसकी जांच करायी जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गंदगी औेर दुर्गंध से लोग परेशान
शहर में कई स्थानों पर सड़क किनारे मीट की दुकानें संचालित हो रही हैं। इस कारण गंदगी और दुर्गंध से लोग परेशान हैं। लोगों का कहना है मीट की दुकानों को शहर के बाहर एक निर्धारित स्थान पर संचालित होना चाहिए। इससे आवागमन में परेशानी होती है। खास बात यह है कि इन दुकानदारों के पास लाइसेंस भी नहीं है। इसके बाद भी वह दुकान संचालित कर रहे हैं। अब इन पर कार्रवाई के लिए नगर पालिका ने कमर कस ली है।
मीट दुकान का लाइसेंस बनाने का नियम
मीट की दुकान का लाइसेंस खाद्य विभाग द्वारा जारी किया जाता है। लेकिन लाइसेंस बनवाने के लिए सबसे पहले पालिका से एनओसी लेना अनिवार्य होता है। इसके लिए लाइसेंस बनवाने वाले व्यक्ति को पालिका में शुल्क जमा करना पड़ता है। नगर पालिका के सहमति पत्र के उपरांत खाद्य विभाग मीट दुकान का लाइसेंस जारी करता है।
मीट-मुर्गा बेचने के लिए ये हैं शर्तें
लाइसेंस पाने के लिए सर्किल आफिसर और नगरपालिका से एनओसी लेना पड़ता है। इसके बाद खाद्य एवं सुरक्षा विभाग से लाइसेंस जारी करता है। दुकानदार जानवरों या पक्षियों को दुकान के अंदर नहीं काट सकते। मीट की दुकानें सब्जी की दुकानों के पास नहीं होनी चाहिए। धार्मिक स्थलों से ये दुकानें 50 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए। मीट की क्वालिटी को किसी पशु डाक्टर से प्रमाणित कराना होगा। मीट के दुकानदारों को हर छह महीने पर अपनी दुकान की सफेदी करानी होगी। मीट की दुकानों में कूड़े के निपटारे के लिए समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। बूचड़खानों से खरीदे जाने वाले मीट का पूरा हिसाब-किताब भी रखना होगा। मीट को फ्रीजर वाली गाड़ियों में ही बूचड़खानों से ढोया जाना जरूरी है। मीट को जिस फ्रिज में रखा जाए, उसके दरवाजे पारदर्शी होने चाहिए। सभी मीट की दुकानों पर गीजर भी होना आवश्यक है। दुकानों के बाहर पर्दे या गहरे रंग के ग्लास की भी व्यवस्था हो ताकि जनता को नजर न आए।
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