: ईद मिलादुन्नबी के जश्न में अंजुमनों और इमामों का सम्मान
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Mon, Sep 8, 2025
1500वीं सालगिरह पर अदब और एहतेराम का पैगाम
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश की 1500वीं सालगिरह पर शहर में ईद मिलादुन्नबी का जश्न पूरे शबाब पर रहा। इस मौके पर तहरीके दीने मुस्तफा संस्था की ओर से रौशनी और जुलूस-ए-मोहम्मदी में शामिल अंजुमनों व इमामों को सम्मानित किया गया।

शॉल और मोमेंटो देकर सम्मान
कार्यक्रम में हर मोहल्ले और मस्जिद से आए अंजुमनों को शॉल और मोमेंटो भेंट किए गए। शहर काज़ी मौलाना निसार अहमद मिसबाही ने मेहमान-ए-ख़ास के तौर पर शिरकत की। सम्मान पाकर अंजुमनों ने आयोजकों का आभार जताया। यह सम्मान समारोह देर रात तक चलता रहा और माहौल में रौनक बनी रही।
आयोजन का उद्देश्य
आयोजक मौलाना अनवर खान एज़ाजुद्दीन अज़हरी ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी की 1500वीं सालगिरह पर अंजुमनों को अदब और एहतेराम से नवाजकर उनके जज़्बे को मजबूत करना ही इस समारोह का मकसद रहा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के जरिए नई पीढ़ी को भी पैगंबर-ए-इस्लाम की सीरत से जोड़ने की कोशिश की गई। आयोजकों का कहना है कि समाज में एकता और अमन का संदेश देना भी इस आयोजन का अहम हिस्सा है।

आयोजन टीम की मौजूदगी
सम्मान समारोह में डॉ. मुदस्सिर जमाल, सलमान शफीक और इरफान सिद्दीकी सहित आयोजन टीम के अन्य सदस्य मौजूद रहे। टीम के सदस्यों ने व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया। मंच संचालन और मेहमानों के स्वागत की जिम्मेदारी भी टीम के ही युवाओं ने निभाई। टीम की एकजुट मेहनत से आयोजन में अनुशासन और गर्मजोशी दोनों नजर आए।

जुलूस-ए-मोहम्मदी की रौनक
इस मौके पर शहरभर में जुलूस-ए-मोहम्मदी की रौनक देखने लायक रही। गलियों और चौक-चौराहों पर सजावट कर जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए। जुलूस में शामिल बच्चों और युवाओं ने हाथों में झंडे और बैनर थामे रखे। लोग घरों की छतों और बालकनियों से जुलूस का इस्तकबाल करते रहे। जगह-जगह मीठे शरबत और तबर्रुक का इंतजाम भी किया गया था।
भाईचारे का पैगाम
कार्यक्रम स्थल पर बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। बुजुर्गों ने आयोजन की सराहना की और इसे भाईचारे व मोहब्बत का पैगाम बताया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में नफरत की दीवारों को तोड़ने और इंसानियत को जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने अपील की कि लोग पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारें। आयोजन के आखिर में अमन और सलामती की दुआ की गई।
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