: सावरकर मानहानि केस में यूपी सरकार की SC से गुहार, राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन रद न करने की की अपील!
THE LUCKNOW TIMES
Fri, Jul 25, 2025
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सावरकर मानहानि केस में यूपी सरकार की SC से गुहार, राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन रद न करने की की अपील!
नई दिल्ली/ राजनीतिक : दरअसल वीर सावरकर पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं, यूपी की योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जांच से समर्थित आरोप पूर्व नियोजित कार्यों के जरिए जानबूझकर नफरत फैलाने का संकेत देते हैं, साथ ही, उसने सुप्रीम कोर्ट से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली राहुल गांधी द्वारा दायर याचिका को खारिज करने का आग्रह किया है, उच्च न्यायालय ने सावरकर मानहानि मामले में गांधी के खिलाफ जारी समन रद करने से इनकार कर दिया था, Savarkar Defamation Case में उत्तर प्रदेश सरकार ने आपको बता दें अपने हलफनामे में कहा गया है कि "मजिस्ट्रेट ने तथ्यों और साक्ष्यों पर उचित न्यायिक विवेक का प्रयोग किया और प्रथम दृष्टया आईपीसी की धारा 153-ए और 505 के तहत मामला निर्धारित किया. जांच से समर्थित आरोप पूर्व नियोजित कार्यों के जरिए जानबूझकर नफरत फैलाने का संकेत देते हैं, जो कथित अपराधों के दायरे में आते हैं." गौर करें तो न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ आज Savarkar Defamation Case में राहुल गांधी द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई करेगी. इसमें उन्होंने अपने खिलाफ कार्यवाही रद करने की मांग की है. राज्य की योगी सरकार ने दलील दी कि वह शिकायतकर्ता अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे की इस दलील से सहमत है कि राहुल गांधी ने समाज में नफरत और वैमनस्य फैलाने के इरादे से ऐसा किया, वहीं आगे हलफनामे में कहा गया है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय का आदेश न्यायोचित और कानूनी है. ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप उचित नहीं है. राज्य सरकार की यह प्रतिक्रिया इस साल अप्रैल में गांधी द्वारा दायर एक अपील पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी नोटिस पर आई है. गांधी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था, इसमें विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी के एक मामले में उनके खिलाफ जारी समन को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था, गौर करें तो 25 अप्रैल को, सर्वोच्च न्यायालय ने विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी के सिलसिले में कांग्रेस नेता को समन जारी करने के निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी थी, लेकिन विपक्ष के नेता को चेतावनी दी थी कि वे स्वतंत्रता सेनानी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने से बचें, अन्यथा भविष्य में ऐसी टिप्पणी करने पर उन्हें परिणाम भुगतने होंगे, शुरुआत में, न्यायमूर्ति दत्ता ने सावरकर के खिलाफ गांधी की विवादास्पद टिप्पणी पर आपत्ति जताई और पूछा कि क्या महात्मा गांधी को केवल इसलिए अंग्रेजों का सेवक कहा जा सकता है, क्योंकि उन्होंने वायसराय को लिखे अपने पत्रों में "आपका वफादार सेवक" शब्द का इस्तेमाल किया था. वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एम. सिंघवी ने पीठ के समक्ष राहुल गांधी का प्रतिनिधित्व किया. पीठ ने कहा कि गांधी महाराष्ट्र में थे और उन्होंने वहीं यह बयान दिया. पीठ ने कहा, "वहां उनकी पूजा की जाती है. ऐसा मत करो." न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, "उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में गैर-जिम्मेदाराना बयान नहीं देने चाहिए." साथ ही ये पूछा, "क्या आप स्वतंत्रता सेनानियों के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं?" न्यायमूर्ति दत्ता ने गांधीजी के वकील से पूछा, "क्या आपके मुवक्किल को पता है कि महात्मा गांधी ने भी वायसराय को संबोधित करते समय 'आपका वफादार सेवक' शब्द का इस्तेमाल किया था? क्या आपके मुवक्किल को पता है कि उनकी दादी ने भी, जब वह प्रधानमंत्री थीं, उस सज्जन (सावरकर) की प्रशंसा में एक पत्र भेजा था..." न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि जब कोई व्यक्ति इतिहास जानता है, तो वह स्वतंत्रता सेनानियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करेगा. न्यायमूर्ति दत्ता ने सिंघवी से पूछा, "आप इस तरह की टिप्पणी क्यों करते हैं?" 4 अप्रैल को, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने महाराष्ट्र के अकोला जिले में 17 नवंबर, 2022 को अपनी भारत जोड़ो यात्रा रैली के दौरान विनायक दामोदर सावरकर (वी डी सावरकर) के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए गांधीजी को तलब करने के सत्र न्यायालय के आदेश को रद करने से इनकार कर दिया, न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने गांधीजी की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. उच्च न्यायालय ने कहा कि उनके पास दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 397 (निचली अदालत के आदेश को संशोधित करने की शक्ति) के तहत सत्र न्यायाधीश के समक्ष याचिका दायर करने का विकल्प है, लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने इस मामले में उन्हें तलब करने के एक अधीनस्थ अदालत के फैसले को चुनौती दी है और अपने खिलाफ चल रही कार्यवाही को चुनौती दी है, यह समन आदेश पिछले साल दिसंबर में लखनऊ की एक सत्र अदालत ने जारी किया था!Tags :
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