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: सचेंडी थाना क्षेत्र के कस्बे में जलभराव से हाहाकार! – 2 साल से प्रशासन मौन, जनता परेशान!

सचेंडी थाना क्षेत्र के कस्बे में जलभराव से हाहाकार! – 2 साल से प्रशासन मौन, जनता परेशान!

  दरअसल कानपुर नगर सचेंडी थाना अंतर्गत आने वाले कस्बे में जलनिकासी की समस्या ने भयावह रूप ले लिया है। बीते दो वर्षों से कस्बावासी लगातार ग्राम सभा और प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं निकल सका। इस साल भी भारी बारिश के चलते घरों में पानी घुस गया, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।  

दो साल से उठाई जा रही आवाज, फिर भी अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती!

 

कस्बे के निवासी लगातार ग्राम पंचायत, विकासखंड स्तर और जिला प्रशासन को

  प्रार्थनापत्र, मौखिक निवेदन और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (IGRS) के माध्यम से जल निकासी की समस्या से अवगत कराते रहे हैं। परंतु अधिकारियों ने एक-दूसरे विभागों पर जिम्मेदारी डालकर सिर्फ खानापूर्ति की है।  

ग्रामीणों का आरोप है कि:

> “हमारी शिकायतों की फाइलें तो चली जाती हैं, लेकिन अधिकारी झूठी रिपोर्ट लगाकर मामला दबा देते हैं। मौके पर कोई निरीक्षण नहीं होता, और हमें यही कहा जाता है कि यह दूसरे विभाग का काम है।”  

हर साल जलभराव, घरों में घुसता पानी, बीमारियों का खतरा

 

इस वर्ष भी, अगस्त की पहली बारिश के साथ ही कई घरों में कमर तक पानी भर गया।

  बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की दिनचर्या, व्यापार और आवागमन – सब कुछ प्रभावित हुआ है। कुछ घरों में तो लोग रातभर  

पानी में बैठकर गुज़ारने को मजबूर हुए।

  स्थानीय निवासी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं और पूछ रहे हैं:   > “क्यों नहीं हो रही जल निकासी की स्थायी व्यवस्था? क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है?”  

अधिकारियों की लापरवाही से ग्रामीणों में रोष

  ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष भी यही हाल था, और इस साल भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए।
  • लगातार जलभराव से 
  • संक्रमण व जलजनित
 

 बीमारियों का खतराबढ़ गया है।

  पशुओं के चारे व पीने के पानी की समस्या गहराती जा रही है। कई लोग काम-धंधा छोड़कर बच्चों को सुरक्षित रखने में लगे हैं।  

ग्रामीणों की मांगें

  1. कसमुबे कस्बे में जल निकासी की स्थायी और प्रभावी योजना बनाई जाए। 2. मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर की गई शिकायतों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। 3. गलत रिपोर्ट देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो। 4. बारिश के चलते हुए नुकसान का सरकारी सर्वे कराकर मुआवजादिया जाए।  

क्या ग्रामीणों की आवाज़ इस बार भी अनसुनी रह जाएगी?

  कानपुर जैसे विकसित जिले के अंतर्गत आने वाला एक कस्बा आज भी जलभराव जैसी बुनियादी समस्या से त्रस्त है। सवाल उठता है कि अगर कस्बों की हालत ये है, तो क्या “स्मार्ट सिटी” का सपना सिर्फ शहरी केंद्रों तक सीमित रहेगा?   अब देखना यह है कि क्या प्रशासन, पंचायत और जिले के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेंगे या फिर कस्बे के लोग अगले साल भी ऐसे ही जल में डूबे हालातों में जीने को मजबूर होंगे।

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