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: गन्ना वैज्ञानिकों सँग द्वारिकेश अधिकारियों ने गन्ने की फसल में लगने वाले कीट/बीमारी की पहचान कराकर निवारण के सुझाव दिए!

THE LUCKNOW TIMES

Wed, Aug 13, 2025
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गन्ना वैज्ञानिकों सँग द्वारिकेश अधिकारियों ने गन्ने की फसल में लगने वाले कीट/बीमारी की पहचान कराकर निवारण के सुझाव दिए!

 

व्यूरो बरेली मुनीश गुप्ता

दरअसल उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद की फरीदपुर तहसील क्षेत्र में राष्ट्रीय राज मार्ग स्थित द्वारिकेश शुगर इण्डस्ट्रीज लि० के समीपवर्ती गाँव भगवानपुर फुलवा,पचौमी,सैदापुर, बाकरगंज,खजनपुर और केसरपुर आदि में अपर मुख्य सचिव एवं गन्ना आयुक्त महोदया के निर्देशानुसार राजेश मिश्रा,उप गन्ना आयुक्त परिक्षेत्र बरेली, दिलीप सैनी जिला गन्ना अधिकारी बरेली,डा०सुजीत प्रताप सिंह वैज्ञानिक अधिकारी (पादप रोग) तथा डा० नीलग कुरील वैज्ञानिक अधिकारी (कीट) उ०प्र० गन्ना शोध परिषद शाहजहाँपुर के साथ द्वारिकेश प्रबंधन ने गन्ने की फसल में बीमारी तथा कीट का निरीक्षण किया जहाँ गन्ने की फसल में विशेष रूप से रोग व कीट का प्रकोप नहीं पाया मात्र तीन प्लाटों में बीमारी के आंशिक प्रभाव पाया।ग्राम भगवानुपर फुलवा में गन्ना प्रजाति को०-0238 की पेड़ी के एक खेत में लाल सड़न रोग से ग्रसित दो क्लंप पाये जिसे तत्काल मौके पर जड़ समेत निकाल कर नष्ट करा दिया गया।किसान को सलाह दी गई कि गढ्‌ढे में 10 से 20 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर डालकर ढक दें अथवा 0.2 प्रतिशत थायोपोनेट मेथिल के घोल की डेन्चिंग करें।ग्राम पचौमी में गन्ना प्रजाति कोशा०-13235 के एक खेत में जड़ बेधक कीट (रूट बोरर) पाई गई जिसके नियत्रण को पर्याप्त नमी की अवस्था में क्लोरो पाइरीफॉस 20 प्रतिशत ई०सी०-दो लीटर अथवा क्लोरोपाइरीफास 50 प्रतिशत एक लीटर अथवा इमिडाक्लो रोप्रिड 17.8 एस०एल०-200 मिली० अथवा बाईफेन्धिन 10 ई०सी०-का 400 मिली०-प्रति एकड़ की दर से 400 लीटर पानी के साथ मिलाकर ट्रेंचिग करें।वहीं उक्त के ही दूसरे गन्ना प्रजाति को०-15023 के प्लाट में उकठा रोग (बिल्ट) से प्रभावित एक क्लम्प पाया जिसके निवारण हेतु कृषक को सलाह दी गई कि इस रोग के बचाव हेतु जड़ के पास सिस्टेनिक फॅफूदनाशी थायो फेनेट मेथिल 70 डब्लू पी का 1.3 ग्राम प्रति लीटर पानी (520 ग्राम + 400 लीटर पानी प्रति एकड) अथवा कार्बेन्डाजिम 50 डब्लू पी का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी (800 ग्राम + 400 लीटर पानी प्रति एकड़) की दर से घोल बनाकर 15 से 20 दिनों के अन्तराल पर दो बार ड्रेन्चिंग करें और प्रयोग के उपरान्त हल्की सिंचाई कर दें।उप गन्ना आयुक्त बरेली द्वारा किसानों को सुझाव दिया गया कि अपने गन्ने की फसल की लगातार निगरानी करते रहें।यदि आपके गन्ने के खेत में लाल सड़न (रेड रॉट) रोग दिखाई दे तो संक्रमित पौधे को जड़ सहित निकालकर नष्ट कर दें तथा गढ़ढे में 10-20 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर डालकर ढक दें अथवा 0.2 प्रतिशत थायोफेनेट मेथिल के घोल की ड्रेचिंग करें,पोक्का बोईग,उक्ठा रोग (बिल्ट) पत्ती की लालघारी वैक्टिरियल टॉप रोट तथा कंडुआ रोग एवं चाटी बेधक,जड़ बेधक और तना बेधक आदि कीटों की पहचान तथा उनके निवारण के बारे में जानकारी दी।वहीं उन्होंने कहा कि इनमें से कोई भी कीट बीमारी दिखाई देने पर तत्काल इसकी सूचना चीनी मिल कर्मचारी अथवा विभागीय गन्ना पर्यवेक्षक को दें जिससे समयँ से निवारण किया जा सके।भ्रमण के दौरान द्वारिकेश चीनी मिल के वरिष्ठ अधिशासी उपाध्यक्ष (वर्क्स)आर,के, गुप्ता,मुख्य महाप्रबन्धक (गन्ना)पवन कुमार चतुर्वेदी,उप महाप्रबन्धक (गन्ना विकास)दिनेश कुमार शर्मा,सहायक महाप्रबन्धक (गन्ना)उपेन्द्र कुमार उपाध्याय और चीनी मिल के क्षेत्रीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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