: आवारा पशुओं की लड़ाई में युवक को गंवानी पड़ी अपनी जान, कौन जिम्मेदार ?
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Sat, May 31, 2025
छुट्टा पशुओं को घूमने की कवायद कागजी,सड़कों पर घूम रहें
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान ✍️
उन्नाव। शहर में घूम रहे आवारा पशु मानव जीवन के लिए खतरा बने हुए है, लेकिन इस खतरे को जिम्मेदार भांप नहीं रहे। ऐसे में रोज हादसे हो रहे है। जिम्मेदारों की इस लापरवाही के चलते आज यानि शनिवार को एक व्यक्ति की जान चली गई। दिल दहलाने वाले हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया में सामने आया है। जिसके बाद लोगों में प्रशासन के प्रति नाराज़गी और चिंता सताने लगी है। घटना शहर के मोहल्ला गांधी नगर के पास की है, जहां दो पशुओं की लड़ाई में सदर कोतवाली क्षेत्र के गांधीनगर निवासी सुशील बाजपेयी (40) पुत्र सतीश बाजपेयी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिला अस्पताल में सुशील को भर्ती करवाया, जहां इलाज के दौरान सुशील की मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा कराकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
पूरा मामला
जानकारी के अनुसार शनिवार दोपहर को सुशील अपने भतीजे शुभम के साथ किसी काम से गुजर रहे थे। तभी दो पशुओं की लड़ाई में से एक गाय ने उनपर अचानक से हमला कर दिया। जबतक सुशील खुद को बचाते गुस्सायी पशु ने उनको कई बार पटका व पैरों से कुचल दिया। इसी बीच भतीजे ने सुशील को बचाने की कोशिश किया तो गुस्साए पशु ने उस पर भी हमला करके घायल कर दिया। चीख पुकार की आवाज से आए क्षेत्रवासियों ने किसी तरह पशु को वहां से भगाया। और एंबुलेंस बुलाकर सुशील को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। गंभीर हालत में पहुंचे सुशील की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही जिला अस्पताल पहुंचें परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। अस्पताल प्रशासन ने घटना की जानकारी पुलिस को दी कोतवाली प्रभारी अवनीश सिंह ने बताया कि शव का पंचनामा करवा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
परिजनों का रो रोकर बुरा हाल
मृतक की पत्नी रागनी के मुताबिक उसका पति फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम करते थे। उसका एक बेटा अंकित है। इधर, परिजनों और क्षेत्रीय लोगों में छुट्टा घूम रहे पशुओं के प्रति पालिका प्रशासन और स्थानीय के खिलाफ काफी गुस्सा है। क्षेत्रवासियों ने स्थानीय प्रशासन से आवारा पशुओं को पकड़ने की मांग भी की है।
जिम्मेदार कौन
ऐसे में सवाल उठता है, इस सुशील की मौत का जिम्म्दार कौन है? शायद ही किसी के पास इसका कोई जवाब होगा। दरअसल शहर में जगह-जगह आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा हुआ है। हर दिन भरे बाजार में पशुओं की लड़ाई में नुकसान हो रहा है, यहां तक की लोग इस लापरवाही के शिकार हो रहे है। कई बार आवारा पशु लड़ते-लड़ते दुकान या प्रतिष्ठान में घुस जाते है। जिससे न केवल नुकसान होता है बल्कि यातायात भी पूरी तरह बाधित हो जाता है। इतना सब होते हुए भी प्रशासन द्वारा इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। पिछले लंबे समय से शहर में आवारा पशुओं को पकड़ा नहीं जा रहा, जिसके कारण शहर में आवारा पशुओं की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। प्रशासन की इस लापरवाही के चलते आए दिन खुल्ला घूम रहे पशुओं से कोई न कोई शिकार हो रहे है।
प्रशासन के दावे सिर्फ काग़जी
यह छुट्टा पशु किस पर हमला कर दें यह किसी को अंदाजा नहीं होता। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से भी इन पशुओं को संरक्षित करने के आदेश दिए जा चुके है। लेकिन जिला प्रशासन की ओर से छुट्टा पशुओं को गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित करने के दावे सिर्फ कागजी निकले। अभी भी शहर के सड़कों व अन्य जगहों पर छुट्टा पशु लोगों की जान के दुश्मन बने हुए है। इनके कारण पहले भी कई बार हादसे भी हो चुके है।
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