डॉक्टर का नंबर चाहिए था : खाते से साफ हो गए दो लाख
Wed, Sep 23, 2026
व्हाट्सएप पर आई पीडीएफ बनी ठगी का जरिया, दो दिन में छह से ज्यादा बार हुआ ट्रांजेक्शन
उन्नाव। डॉक्टर का मोबाइल नंबर तलाश रही हिरन नगर की एक महिला को साइबर ठगों ने अपने जाल में फंसा लिया। महिला के पास फोन करने के बाद ठग ने व्हाट्सएप पर एक पीडीएफ फाइल भेजी। इसमें मरीज से जुड़ी जानकारी भरने के लिए कहा गया। महिला ने इसे सामान्य प्रक्रिया समझकर जानकारी भर दी। इसके बाद उसके बैंक खाते से करीब दो लाख रुपये निकल गए। मामले में कोतवाली सदर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है।
गूगल पर नंबर खोजते ही आ गया फोन
हिरन नगर निवासी दीपा पत्नी जितेंद्र कुमार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि दो सितंबर को वह गूगल पर डॉक्टर आलोक पांडेय का मोबाइल नंबर खोज रही थीं। इसी दौरान उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले से डॉक्टर के संबंध में बातचीत हुई। इसके बाद उसने व्हाट्सएप पर एक पीडीएफ फाइल भेजी।
मरीज की जानकारी भरते ही शुरू हुआ खेल
महिला के अनुसार पीडीएफ खोलने पर उसमें मरीज का नाम, वजन और उम्र जैसी जानकारी मांगी गई थी। उन्होंने अपने मोबाइल से मांगी गई जानकारी भर दी। इसके बाद उन्हें खाते से रकम निकलने की जानकारी मिली। दो सितंबर को खाते से दो अलग-अलग बार में कुल एक लाख रुपये निकल गए।
अगले दिन भी लगातार होते रहे ट्रांजेक्शन
महिला की तहरीर के मुताबिक तीन सितंबर को भी खाते से रकम निकाली गई। इस दिन छह अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 99,957 रुपये निकाल लिए गए। दो दिनों में खाते से कुल 1,99,957 रुपये निकलने के बाद महिला को ठगी का पता चला।
22 सितंबर को पहुंची पुलिस के पास
रुपये निकलने की जानकारी होने के बाद महिला ने मामले की शिकायत कोतवाली सदर में की। 22 सितंबर को दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस अब रकम किन खातों में गई और फोन करने वाले व्यक्ति की पहचान समेत अन्य बिंदुओं पर जांच कर रही है।
साइबर ठगी का तरीका भी जांच के दायरे में
पुलिस के लिए यह भी जांच का विषय है कि महिला के खाते से रकम निकालने के लिए ठगों ने किस तरीके का इस्तेमाल किया। फोन कॉल के बाद व्हाट्सएप पर भेजी गई पीडीएफ में जानकारी भरवाने के बाद रकम निकलने की बात सामने आई है। पुलिस फोन नंबर, बैंक लेनदेन और डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े विवरण के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है।
स्कूल की फीस में 3.15 लाख के गबन का आरोप : कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज
Wed, Sep 23, 2026
क्लर्क पर हिसाब न देने और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप
उन्नाव। स्कूल में बच्चों से जमा कराई गई फीस का हिसाब मांगना प्रबंधक को भारी पड़ गया। करीब 3.15 लाख रुपये की फीस का हिसाब नहीं मिलने के बाद मामला पुलिस से होते हुए कोर्ट तक पहुंच गया। कोर्ट के आदेश पर कोतवाली सदर पुलिस ने स्कूल के क्लर्क कन्हैया लाल वर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। प्रबंधक ने फीस की रकम में गड़बड़ी और हिसाब नहीं देने का आरोप लगाया है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है।आदर्श नगर निवासी राजेंद्र प्रसाद वर्मा ने कोर्ट में दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि वह गदनखेड़ा-कौशिल्यापुरम स्थित महावीर प्रसाद जनक दुलारी पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रबंधक हैं। उनके मुताबिक, कन्हैया लाल वर्मा को 9 दिसंबर 2024 को स्कूल में क्लर्क के पद पर रखा गया था। क्लर्क के जिम्मे विद्यार्थियों से फीस जमा कराने के साथ ही स्कूल के आय-व्यय और अन्य लेखा-जोखा का काम भी था। प्रबंधक का आरोप है कि इसी दौरान स्कूल में जमा फीस की 3,15,905 रुपये की रकम का हिसाब नहीं मिल पाया। कई बार जानकारी मांगने के बावजूद संबंधित क्लर्क की ओर से रकम का स्पष्ट ब्योरा नहीं दिया गया। इसके बाद उसने स्कूल आना भी बंद कर दिया।
पहले थाने में बुलाया गया, 15 दिन का समय मांगा
प्रबंधक के अनुसार, मामले की शिकायत पहले कोतवाली पुलिस से की गई थी। पुलिस ने कन्हैया लाल को थाने बुलाकर पूछताछ की। इस दौरान उसने कथित तौर पर एक समझौता पत्र देकर पूरा हिसाब देने के लिए 15 दिन का समय मांगा था। आरोप है कि तय समय बीतने के बाद भी न तो स्कूल को रकम का हिसाब दिया गया और न ही विवादित धनराशि वापस की गई।
घर जाकर हिसाब मांगने पर विवाद का आरोप
प्रार्थनापत्र में राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि 10 दिसंबर 2025 की शाम करीब पांच बजे वह कन्हैया लाल के घर पहुंचे थे। मकसद स्कूल के हिसाब और उसके स्कूल नहीं आने की वजह पूछना था। आरोप है कि बातचीत के दौरान कन्हैया लाल नाराज हो गया और गाली-गलौज करते हुए दोबारा रुपये मांगने पर जान से मारने की धमकी दी। प्रबंधक का यह भी आरोप है कि बाद में फोन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी। परिवार की ओर से भी उसके बाहर होने की जानकारी दी जाती रही।
कई जगह शिकायत के बाद कोर्ट की शरण
रकम का हिसाब और वापसी नहीं होने पर प्रबंधक ने पुलिस अधीक्षक के साथ जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की। इसके बावजूद रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया। कोर्ट के आदेश के बाद कोतवाली सदर पुलिस ने आरोपी क्लर्क के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली।पुलिस अब स्कूल के फीस रिकॉर्ड, जमा रकम और दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते समेत अन्य दस्तावेजों की जांच करेगी। जांच के बाद आरोपों की वास्तविक स्थिति साफ होगी।
फर्जी वीजा-टिकट देकर विदेश भेजने का झांसा : 1.70 लाख ठगे
Wed, Sep 23, 2026
नौकरी के नाम पर युवक को दिए मेडिकल और यात्रा के दस्तावेज, चेक भी हुई बाउंस; कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज
उन्नाव। विदेश में नौकरी लगवाने के नाम पर युवक से 1.70 लाख रुपये लेने के बाद उसे फर्जी वीजा, मेडिकल सर्टिफिकेट और फ्लाइट टिकट थमाने का मामला सामने आया है। रुपये वापस मांगने पर युवक को 1.70 लाख रुपये की चेक दी गई, लेकिन वह भी बाउंस हो गई। पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय के आदेश पर कोतवाली सदर पुलिस ने रुस्तमपुर सरोसी निवासी संजय यादव और उसके तीन-चार अज्ञात साथियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की है।
दस्तावेज देखकर युवक को हुआ शक
अचलगंज थाना क्षेत्र के बेहटा नथई सिंह निवासी कुलदीप सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि संजय यादव ने उसे विदेश में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। नौकरी के लिए उससे अलग-अलग प्रक्रिया के नाम पर कुल 1.70 लाख रुपये लिए गए। इसके बाद आरोपी की ओर से उसे मेडिकल सर्टिफिकेट, वीजा और फ्लाइट टिकट उपलब्ध कराए गए।कुलदीप के अनुसार, कुछ समय बाद उसे इन दस्तावेजों के फर्जी होने की जानकारी हुई। इसके बाद उसने विदेश जाने के बजाय अपने रुपये वापस मांगे। आरोप है कि आरोपी काफी समय तक रुपये लौटाने के नाम पर उसे टालता रहा।
रुपये लौटाने के लिए दी चेक भी नहीं हुई पास
शिकायत के मुताबिक, लगातार रुपये मांगने के बाद आरोपी ने कुल 1.70 लाख रुपये की चेक दी। कुलदीप ने चेक बैंक में लगाई तो वह बाउंस हो गई। इसके बाद जब उसने आरोपी को चेक के भुगतान न होने की जानकारी दी तो दोनों के बीच विवाद हो गया। पीड़ित ने यह घटना शेखपुर नहर के पास होने की बात पुलिस को बताई है।
पहले थाने, फिर जनसुनवाई और एसपी से शिकायत
कुलदीप का कहना है कि उसने मामले की शिकायत 9 जून को कोतवाली सदर में की थी। इसके बाद 15 जून को जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। 17 जून को पुलिस अधीक्षक को प्रार्थनापत्र देने के साथ ही रजिस्टर्ड डाक से भी शिकायत भेजी गई। इसके बावजूद रिपोर्ट दर्ज न होने पर उसने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया।
दूसरे युवकों को भी फंसाने का आरोप
पीड़ित ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि आरोपी विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवकों से संपर्क करता है। आरोप है कि पासपोर्ट और दूसरे जरूरी दस्तावेज लेने के बाद उनसे रुपये मांगे जाते हैं। कुलदीप ने मामले में आरोपी के साथ अन्य लोगों के शामिल होने की आशंका भी जताई है। पुलिस अब दर्ज मुकदमे के आधार पर आरोपों की जांच करेगी और दस्तावेजों की वास्तविकता समेत रुपये के लेनदेन की जानकारी जुटाएगी।