नहर की खांदी कटने से सौ बीघा गेहूं की फसल डूबी : दो दर्जन किसानों को भारी नुकसान
Mon, Mar 9, 2026
सफाई न होने का आरोप, जेई को मौके पर भेजा गया
उन्नाव। हसनगंज क्षेत्र में लखनऊ शारदा नगर खंड-2 से निकले मोहान रजबहा की खांदी कटने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। रविवार तड़के हाजीपुर तरेहा गांव के पास तेज बहाव के कारण रजबहा की खांदी टूट गई। देखते ही देखते पानी आसपास के खेतों में फैल गया और करीब सौ बीघा में खड़ी गेहूं की फसल जलमग्न हो गई। इससे लगभग दो दर्जन किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि गेहूं की फसल पूरी तरह तैयार थी और कटाई का समय करीब था। ऐसे में अचानक नहर का पानी खेतों में भर जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सुबह जब ग्रामीणों ने खेतों की ओर देखा तो कई खेतों में पानी भरा मिला। कुछ ही देर में यह खबर पूरे गांव में फैल गई और किसान मौके पर जुट गए। किसानों का कहना है कि नहर और रजबहा की समय पर सफाई नहीं कराई जाती है। सिल्ट और झाड़ियों के कारण पानी का बहाव तेज हो जाता है, जिससे खांदी कटने की घटनाएं हो जाती हैं। ग्रामीणों के मुताबिक इसी कारण हर साल किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है। उनका आरोप है कि विभाग को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि तीन मार्च को भी इसी जगह खांदी कट गई थी, उस समय करीब 50 बीघा रबी की फसल पानी में डूब गई थी। उस घटना के कुछ ही दिनों बाद दोबारा खांदी कटने से किसानों में नाराजगी है। उनका कहना है कि अगर समय रहते पक्के इंतजाम किए जाते तो बार-बार ऐसी स्थिति नहीं बनती।घटना की जानकारी मिलने के बाद किसानों ने नहर विभाग को सूचना दी। प्रशासन की ओर से भी मामले को संज्ञान में लिया गया है। तहसीलदार अविनाश चौधरी ने बताया कि नहर विभाग के जेई को मौके पर भेजा गया है। टीम नुकसान का आकलन कर रही है और कटी हुई खांदी को जल्द बंद कराने का काम शुरू कराया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शाम तक खांदी को बांधकर पानी का बहाव नियंत्रित कर लिया जाएगा। हालांकि किसानों को सबसे ज्यादा चिंता अपनी तैयार फसल को लेकर है। उनका कहना है कि अगर पानी जल्दी नहीं निकला तो गेहूं की फसल पूरी तरह खराब हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी की है।
‘संन्यासी वेतन नहीं लेता’… : उन्नाव में शंकराचार्य ने सीएम योगी से मांगा जवाब
Sun, Mar 8, 2026
बीफ निर्यात, गोवंश की घटती संख्या और राजनीतिक चंदे पर भी साधा निशाना
उन्नाव। धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा के दौरान सोमवार को उन्नाव पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। शहर के पीडीनगर और दही चौकी स्थित एक गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कई सवाल उठाए और कहा कि मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि वह असली हिंदू हैं या नकली। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में कोई भी संन्यासी या योगी वेतन और भत्ता नहीं लेता। संन्यासी अहिंसा का पालन करता है और सत्ता या सरकारी लाभ से दूर रहता है। ऐसे में यदि कोई खुद को योगी बताता है और साथ ही सरकारी वेतन-भत्ता भी ले रहा है तो यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह किस परंपरा के तहत है।
40 दिन का समय दिया, 38 दिन बीत गए
शंकराचार्य ने बताया कि उन्होंने अपने सवालों के जवाब के लिए मुख्यमंत्री को 40 दिन का समय दिया था। अब 38 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। उन्होंने कहा कि उनकी धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा इसी मुद्दे को लेकर चल रही है।उन्होंने बताया कि यात्रा के अगले चरण में वह नैमिषारण्य पहुंचेंगे और वहां से 11 मार्च को लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से जवाब मांगेंगे।
गोवंश घटने और बीफ निर्यात बढ़ने का आरोप
शंकराचार्य ने दावा किया कि देश में देशी गायों की संख्या लगातार घट रही है। उनके अनुसार 2012 की पशुगणना के बाद से अब तक करीब 18 से 19 लाख गायें कम हो गई हैं, जबकि इसी दौरान बीफ के निर्यात में लगभग 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक मांस निर्यातक कंपनी ने भाजपा को करीब 30 करोड़ रुपये का चंदा दिया है। इस पर उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि गो भक्तों का वोट और गो-हत्यारों का नोट एक ही पार्टी को मिल रहा है। उनका कहना था कि जब गो संरक्षण की बात करके सत्ता हासिल की गई थी तो अब सरकार को यह बताना चाहिए कि गोवंश की रक्षा के लिए ठोस कदम क्या उठाए गए।
प्रधानमंत्री पर भी साधा निशाना
शंकराचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लोगों ने पुरानी सरकारों को हटाकर नई सरकार इस उम्मीद में चुनी थी कि गोमाता की रक्षा होगी। उन्होंने कहा कि तीसरी बार सरकार बनने के बाद भी गोहत्या रोकने को लेकर कोई ठोस परिणाम नहीं दिख रहे हैं। उनका कहना था कि जो व्यक्ति गोमाता को मां मानता है वही उनका भाई है और जो ऐसा नहीं मानता उसे वह अपना भाई नहीं मानते।
गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग
उन्होंने कहा कि देश में गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में एक ही व्यक्ति राजा और गुरु दोनों नहीं हो सकता। यह परंपरा सनातन में नहीं बल्कि अन्य समुदायों में देखने को मिलती है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डबल इंजन सरकार वाले राज्यों में भी गोशालाओं की हालत संतोषजनक नहीं है।
आशुतोष ब्रह्मचारी हमले पर जताई शंका
यौन शोषण के आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी पर हुए हमले को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि किसी भी अहिंसा में विश्वास रखने वाले व्यक्ति के लिए ऐसी घटना दुखद है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में कई सवाल खड़े होते हैं। उनके अनुसार हमला शौचालय के अंदर नहीं बल्कि बाहर हुआ था। उन्होंने कहा कि कई बार आपराधिक इतिहास वाले लोग खुद पर हमला कराकर खुद को पीड़ित के रूप में दिखाने की कोशिश भी करते हैं, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आशुतोष ब्रह्मचारी को सुरक्षा देने की भी मांग की।
सपा नेताओं की मौजूदगी पर दी सफाई
कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के कई नेता मौजूद रहे। इस पर पूछे गए सवाल के जवाब में शंकराचार्य ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति उनसे मिलने या संवेदना व्यक्त करने आता है तो उसे किसी पार्टी से जोड़ देना सही नहीं है। सांसद साक्षी महाराज को लेकर उन्होंने कहा कि वह उन्हें संत नहीं मानते, क्योंकि वह लंबे समय से सांसद हैं और वेतन भी लेते हैं।
पुलिस सुरक्षा नहीं दिखी
कार्यक्रम के दौरान दही थाना क्षेत्र के चार पुलिसकर्मी सादी वर्दी में आसपास मौजूद दिखाई दिए, लेकिन इसके अलावा कोई विशेष सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आई। शंकराचार्य ने पीडीनगर में बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सतीश शुक्ला को मखाने की माला और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित भी किया। इसके बाद वह दही चौकी स्थित गेस्ट हाउस में रुके और रात्रि विश्राम किया। मंगलवार सुबह वह बांगरमऊ होते हुए नैमिषारण्य के लिए रवाना होंगे, जहां से उनकी धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा का अगला चरण शुरू होगा।
महिला दिवस : जिला अस्पताल में रक्तदान शिविर, 38 यूनिट रक्त संग्रह
Sun, Mar 8, 2026
क्रांति सेवा फाउंडेशन की पहल, रक्तदाताओं और समाजसेवियों को ‘प्रेरणा सम्मान
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उन्नाव। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को जिला अस्पताल उमा शंकर दीक्षित में मानव सेवा का एक सराहनीय उदाहरण देखने को मिला। कर्म क्रांति सेवा फाउंडेशन की ओर से आयोजित रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया और जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए रक्तदान किया। शिविर में कुल 38 यूनिट रक्त एकत्र किया गया। सुबह से ही अस्पताल परिसर में रक्तदाताओं का आना शुरू हो गया था। शहर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे और स्वेच्छा से रक्तदान किया। कई युवाओं ने पहली बार रक्तदान किया। वहीं कुछ ऐसे लोग भी थे जो पहले कई बार रक्तदान कर चुके हैं और हर बार की तरह इस बार भी दूसरों की मदद के लिए आगे आए। संस्था के अध्यक्ष चेतन मिश्रा ने बताया कि महिला दिवस के अवसर पर इस शिविर का उद्देश्य समाज में सेवा और सहयोग की भावना को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि रक्तदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के लिए जीवनदान साबित हो सकता है, इसलिए हर स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
शिविर के दौरान रक्तदान करने वाले सभी लोगों को मंच से ‘प्रेरणा सम्मान’ देकर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि इस सम्मान का मकसद लोगों को प्रोत्साहित करना और समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस नेक काम से जुड़ सकें।
कार्यक्रम में संस्था से जुड़ी कई महिलाओं को भी समाज सेवा में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही ऐसे रक्तदाताओं को भी मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया जो पहले भी कई बार रक्तदान कर चुके हैं। आयोजकों का कहना था कि ऐसे लोगों की पहल दूसरों के लिए प्रेरणा बनती है।
रक्त संग्रह और स्वास्थ्य जांच की पूरी प्रक्रिया जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की टीम की देखरेख में हुई। टीम ने सभी रक्तदाताओं की स्वास्थ्य जांच के बाद सुरक्षित तरीके से रक्त संग्रह किया। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकीय टीम को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
इस मौके पर कई प्रमुख लोग भी मौजूद रहे। जिला पंचायत अध्यक्ष शकुन सिंह, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष श्वेता मिश्रा, नगर पंचायत अध्यक्ष गजाला नईमुद्दीन अंसारी, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका सुधा शुक्ला, डॉ. सुषमा सिंह चौहान, गोल्ड मेडलिस्ट रागिनी अवस्थी और एथलीट अबाली त्रिवेदी ने कार्यक्रम में पहुंचकर रक्तदाताओं का उत्साह बढ़ाया। अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि रक्तदान सबसे बड़ा दान माना जाता है, क्योंकि इससे किसी की जिंदगी बच सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नियमित रूप से रक्तदान करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
शिविर में ज्ञान सागर इंस्टीट्यूट के सात लोगों ने भी रक्तदान कर कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई। वहीं कुछ लोग रक्तदान के लिए पहुंचे जरूर, लेकिन स्वास्थ्य मानकों के कारण उन्हें फिलहाल रक्तदान न करने की सलाह दी गई। आयोजकों ने उन्हें अगले शिविर में रक्तदान के लिए आमंत्रित किया। कार्यक्रम के अंत में संस्था की ओर से सभी अतिथियों, रक्तदाताओं, चिकित्सकीय टीम और सहयोग करने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया गया। संस्था के अध्यक्ष चेतन मिश्रा ने कहा कि समाज में सेवा और मानवता की भावना को मजबूत करने के लिए भविष्य में भी ऐसे जनहित के कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे।