बिना सूचना पहुंचे अपर निदेशक : जिला अस्पताल में दिखी व्यवस्थाओं की कमजोरी
Sun, Jan 4, 2026
मरीजों और तीमारदारों से सीधे बातचीत कर लिया फीडबैक
उन्नाव। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए रविवार को अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. जीपी गुप्ता बिना किसी पूर्व सूचना के जिला अस्पताल पहुंच गए। उनके अचानक पहुंचते ही अस्पताल प्रशासन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। निरीक्षण के दौरान जो हालात सामने आए, उन्होंने व्यवस्थाओं की कमजोर कड़ी को उजागर कर दिया। अपर निदेशक सबसे पहले इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। यहां मरीजों की संख्या के मुकाबले डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी साफ नजर आई। कई मरीज इलाज के इंतजार में थे। स्थिति को देखते हुए डॉ. जीपी गुप्ता खुद आगे आए और मरीजों की जांच शुरू कर दी। उन्होंने कुछ मरीजों को मौके पर ही दवाएं लिखीं और मौजूद चिकित्सकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान डॉ. गुप्ता ने मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधे बातचीत की। उन्होंने इलाज की गुणवत्ता, दवाओं की उपलब्धता, जांच सुविधाओं और साफ-सफाई को लेकर फीडबैक लिया। कुछ तीमारदारों ने अव्यवस्थाओं की शिकायत भी की, जिस पर अपर निदेशक ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। इमरजेंसी के बाद उन्होंने अन्य वार्डों का भी जायजा लिया। कई जगह गंदगी और अव्यवस्थित व्यवस्था मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई। साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर उन्होंने कहा कि अस्पताल में स्वच्छता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मरीजों के लिए साफ वातावरण बुनियादी जरूरत है और इसमें लापरवाही सीधे तौर पर उनकी सेहत से खिलवाड़ है। अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. जीपी गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिला अस्पताल आम लोगों की पहली और सबसे अहम जरूरत है। यहां आने वाला हर मरीज बेहतर और समय पर इलाज का हकदार है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मरीजों की सुविधा को प्राथमिकता में रखते हुए स्टाफ की तैनाती, दवा वितरण और साफ-सफाई व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए। भविष्य में भी इस तरह के औचक निरीक्षण जारी रहेंगे और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के बाद अस्पताल प्रशासन में खलबली मची रही और व्यवस्थाएं सुधारने की कवायद शुरू होती नजर आई।
क्लोरीन डोजर ठप : शहर में बिना शुद्धिकरण घरों तक पहुंच रहा पानी
Sun, Jan 4, 2026
24 ट्यूबवेलों में अधिकतर पर खराब पड़ी मशीनें, तीन लाख आबादी की सेहत पर खतरा
उन्नाव। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जलापूर्ति से हुई मौतों ने जिस तरह चिंता बढ़ाई थी, वैसी ही आशंका अब उन्नाव को लेकर भी गहराने लगी है। शहर की पेयजल व्यवस्था इन दिनों गंभीर लापरवाही का शिकार है। नगर पालिका क्षेत्र में लोगों को जो पानी मिल रहा है, वह शुद्धिकरण की जरूरी प्रक्रिया से गुजरे बिना सीधे नलों तक पहुंच रहा है। हालात ऐसे हैं कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो उन्नाव में भी दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियां विकराल रूप ले सकती हैं। नगर में जलापूर्ति के लिए कुल 24 ट्यूबवेल संचालित हैं। नियम के मुताबिक हर ट्यूबवेल की मुख्य पाइपलाइन में क्लोरीन डोजर मशीन लगी होती है, जिससे तय मात्रा में क्लोरीन मिलाकर पानी को पीने योग्य बनाया जाता है। लेकिन हकीकत यह है कि अब्बासबाग, भरत मिलाप, बाबूगंज, मोहारीबाग समेत अधिकांश इलाकों के ट्यूबवेलों पर ये मशीनें लंबे समय से खराब पड़ी हैं। कहीं मशीनें पूरी तरह बंद हैं, तो कहीं क्लोरीन मिलाने की प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। इसका सीधा असर शहर की करीब तीन लाख आबादी पर पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि कई मोहल्लों में पानी से दुर्गंध आती है और कभी-कभी उसका रंग भी बदला हुआ नजर आता है। पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों से गंदगी मिल जाने की आशंका और बढ़ जाती है।
कॉलोनियों और तंग गलियों में लोहे की पाइपलाइन नालियों के भीतर से जालों की तरह निकली हैं। लोहे की पाइप होने के कारण इनमें जंग जल्दी लगता है, जिससे लीकेज की संभावना बढ़ जाती है। पालिका के दावों के विपरीत, कई वार्डों में आज भी लोग असुरक्षित तरीके से बिछी लाइनों से पानी पीने को मजबूर हैं।
इसके बावजूद नगर पालिका स्तर पर न तो नियमित जांच हो रही है और न ही वैकल्पिक शुद्धिकरण की कोई ठोस व्यवस्था की गई है। चिकित्सकों के मुताबिक यह स्थिति बेहद खतरनाक है। फिजिशियन डॉ. कौशलेंद्र प्रकाश बताते हैं कि बिना क्लोरीन मिला पानी लंबे समय तक पीने से डायरिया, पीलिया, टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। खासकर छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं। दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियां अक्सर अचानक गंभीर रूप ले लेती हैं, जिससे अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ जाता है। शहरवासियों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले। न मशीनों की मरम्मत हुई और न ही पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच शुरू हो सकी। लोगों में नाराजगी इस बात को लेकर है कि जब दूसरे शहरों में दूषित जलापूर्ति से जानें जा चुकी हैं, तो उन्नाव में चेतावनी के बाद भी सुधार क्यों नहीं किया जा रहा। इस मामले में जलकल प्रभारी अनिल शर्मा का कहना है कि क्लोरीन डोजर मशीनों की मरम्मत के लिए जरूरी सामान मंगवाया गया है, जो सोमवार तक पहुंच जाएगा। इसके बाद सभी खराब मशीनों को दुरुस्त कराकर शुद्धिकरण प्रक्रिया को फिर से नियमित किया जाएगा। हालांकि सवाल यही है कि जब तक यह व्यवस्था पूरी तरह बहाल नहीं होती, तब तक लोगों की सेहत की जिम्मेदारी कौन लेगा। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पेयजल का यह संकट किसी बड़े स्वास्थ्य संकट में बदल सकता है।
आस्था के पहरे टूटे : मां चंडिका देवी मंदिर को चोरों ने बनाया निशाना
Sat, Jan 3, 2026
एक हफ्ते का चढ़ावा ले गए चोर, पुजारी सुबह पहुंचे तो टूटा मिला ताला
उन्नाव। बीघापुर कस्बे में स्थित बक्सर गांव के प्रसिद्ध मां चंडिका देवी मंदिर में शुक्रवार रात चोरी की बड़ी वारदात सामने आई है। अज्ञात चोरों ने मंदिर के तीन-तीन ताले तोड़कर गर्भगृह तक पहुंच बनाई और दानपात्र समेत पूजन सामग्री उठा ले गए। दानपात्र में करीब 40 हजार रुपये होने की बात कही जा रही है। घटना मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है, जिसमें तीन संदिग्ध नजर आ रहे हैं। पुलिस उनकी पहचान और तलाश में जुटी है। शनिवार सुबह जब मंदिर के पुजारी रोजाना की पूजा के लिए पहुंचे तो उन्होंने मंदिर के ताले टूटे देखे। अंदर जाने पर दानपात्र गायब मिला और सामान बिखरा पड़ा था। इसके बाद तुरंत पुलिस और मंदिर समिति को सूचना दी गई। चोरी की खबर फैलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मंदिर पहुंच गए। जानकारी के मुताबिक चोरों ने पूरी योजना के साथ वारदात को अंजाम दिया। सबसे पहले गंगा की ओर से आने वाले रास्ते पर लगे चैनल का ताला तोड़ा गया। इसके बाद मंदिर की बाहरी दीवार पर लगे चैनल का ताला तोड़ा गया। अंत में गर्भगृह की ओर जाने वाले रास्ते का ताला तोड़कर चोर अंदर दाखिल हुए। चोरों ने गर्भगृह में रखे दानपात्र को उखाड़ लिया और उसे लेकर फरार हो गए। इसके साथ ही पूजा में इस्तेमाल होने वाला कुछ अन्य सामान भी चोरी कर लिया गया। मंदिर परिसर में मौजूद देवी प्रतिमा के चेहरे पर लगे मुखौटे को भी उखाड़ने की कोशिश की गई, हालांकि चोर उसे ले जाने में सफल नहीं हो सके। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि चोर काफी देर तक मंदिर के अंदर रहे और बिना किसी डर के उन्होंने ताले तोड़कर चोरी की। सूचना मिलने पर बारासगवर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। सीओ बिघापुर मधुपनाथ मिश्रा और थानाध्यक्ष धर्मेंद्र नाथ मिश्र ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में तीन संदिग्ध चोर साफ दिखाई दे रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उनकी पहचान कर ली जाएगी और घटना का खुलासा किया जाएगा। मंदिर परिसर की देखरेख करने वाले मोहित दुबे ने बताया कि दानपात्र में पिछले एक सप्ताह में चढ़ावा चढ़ा था, जिसकी रकम लगभग 40 हजार रुपये के आसपास थी। उन्होंने मंदिरों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए रात्रि गश्त और सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग की है। घटना के बाद श्रद्धालुओं में रोष है। लोगों का कहना है कि मंदिर जैसे धार्मिक स्थल भी अब सुरक्षित नहीं रह गए हैं। ग्रामीणों ने पुलिस से जल्द से जल्द चोरों की गिरफ्तारी और मंदिर की सुरक्षा मजबूत करने की मांग की है। पुलिस का भरोसा है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों तक जल्द पहुंचा जाएगा।