केरल विधानसभा चुनाव : उन्नाव के मोहम्मद अहमद ने यूडीएफ प्रत्याशी के लिए मांगे वोट
Sat, Apr 4, 2026
गांव-गांव पहुंचकर मतदाताओं से की अपील, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मतीन खां भी रहे साथ
उन्नाव/केरल। केरल की कंडोट्टी विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार के बीच उन्नाव के नेता मोहम्मद अहमद की सक्रिय भूमिका चर्चा में है। प्रदेश उपाध्यक्ष के तौर पर उन्होंने वहां पहुंचकर यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के उम्मीदवार टीपी अशरफ अली के समर्थन में जोरदार जनसंपर्क अभियान चलाया। उन्होंने क्षेत्र में जनसंपर्क कर मतदाताओं से प्रत्याशी के पक्ष में मतदान की अपील की। उन्नाव से जुड़े नेता मोहम्मद अहमद की इस सक्रियता को स्थानीय स्तर पर भी अहम माना जा रहा है। इससे साफ है कि कंडोट्टी का चुनाव अब सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक दिलचस्पी का केंद्र बनता जा रहा है।
मोहम्मद अहमद ने कंडोट्टी विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों के गांव-गांव और मोहल्लों में पहुंचकर लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने विकास, रोजगार और स्थानीय समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बताते हुए यूडीएफ को समर्थन देने की बात कही। उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मतीन खां भी मौजूद रहे, जिन्होंने जनसभाओं में लोगों को संबोधित किया।प्रचार के दौरान नुक्कड़ सभाएं और जनसंपर्क अभियान चलाए गए। नेताओं ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए मजबूत नेतृत्व जरूरी है। उन्होंने टीपी अशरफ अली को अनुभवी बताते हुए उनके पक्ष में मतदान करने की अपील की। मोहम्मद अहमद की सक्रियता से स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया। कंडोट्टी सीट पर चुनाव को लेकर सभी दलों ने ताकत झोंक दी है, जिससे मुकाबला रोचक हो गया है।
खाड़ी तनाव का असर : उन्नाव के चमड़ा उद्योग पर निर्यात आधा और लागत दोगुनी
Sat, Apr 4, 2026
केमिकल महंगे, कालाबाजारी तेज; असद इराकी बोले—सरकारी राहत से कुछ सहारा, पर संकट बरकरार
उन्नाव। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब उन्नाव के चमड़ा उद्योग पर गहराता दिख रहा है। खाड़ी क्षेत्र में हालात बिगड़ने से समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ है, जिससे आयात-निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ गई है। उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक, निर्यात करीब 50 फीसदी तक गिर चुका है और हालात जल्द सुधरते नजर नहीं आ रहे। चर्म निर्यात परिषद के पूर्व अध्यक्ष असद कमाल इराकी ने बताया कि सबसे ज्यादा असर दो मोर्चों पर पड़ा है—ढुलाई और कच्चे माल की कीमत। उनका कहना है कि यूरोपीय देशों में माल भेजना अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा महंगा हो गया है, क्योंकि शिपमेंट के पारंपरिक रूट प्रभावित हैं। जहां पहले एक कंटेनर भेजने में करीब 1100 से 1200 डॉलर खर्च आता था, वहीं अब यह लागत बढ़कर 3000 से 3500 डॉलर तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि परिवहन खर्च बढ़ने का सीधा असर निर्यात पर पड़ा है। कई छोटे और मध्यम निर्यातक ऑर्डर पूरे करने में हिचक रहे हैं, जबकि विदेशी खरीदार भी बढ़ी लागत के कारण ऑर्डर कम कर रहे हैं। असद इराकी के मुताबिक, कच्चे माल की कीमतों में उछाल ने स्थिति और गंभीर बना दी है। चमड़े की टैनिंग में इस्तेमाल होने वाला फार्मिक एसिड 60 रुपये से बढ़कर 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि सोडियम फार्मेट 37 रुपये से बढ़कर 60 रुपये किलो हो गया है। इसके अलावा अमोनियम नाइट्रेट, मेथनॉल, पीवीसी, स्टाइरीन, एसेटिक एसिड और फॉर्मेल्डिहाइड जैसे अन्य केमिकल भी महंगे हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बाजार में इन केमिकल्स की कालाबाजारी भी बढ़ रही है। सीमित सप्लाई का फायदा उठाकर कीमतें मनमाने तरीके से बढ़ाई जा रही हैं, जिससे उत्पादन लागत पर सीधा दबाव पड़ रहा है। हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार के हालिया फैसले को आंशिक राहत देने वाला बताया। पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर 8.25 फीसदी आयात शुल्क तीन महीने के लिए खत्म किए जाने से लागत में कुछ कमी आने की उम्मीद है। लेकिन उनका कहना है कि जब तक सप्लाई चेन और परिवहन की समस्या दूर नहीं होती, तब तक उद्योग को पूरी राहत मिलना मुश्किल है। असद इराकी ने मांग की कि सरकार बाजार पर सख्त निगरानी रखे, कालाबाजारी पर रोक लगाए और निर्यातकों को स्थिर माहौल देने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि चमड़ा उद्योग दोबारा पटरी पर लौट सके।
कुछ मिनट का निरीक्षण : उन्नाव में विशेष सचिव का दौरा बना चर्चा का विषय
Fri, Apr 3, 2026
सालों की समस्या, कुछ घंटों में ‘ठीक’—लोगों को नहीं हो रहा भरोसा
उन्नाव। नगर विकास मंत्रालय के विशेष सचिव उदयभान त्रिपाठी का शुक्रवार को हुआ दौरा अब नगरपालिका की कार्यशैली पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है। हाकिम टोला स्थित नगर पालिका परिसर में पीपी मॉडल के तहत बनी मार्केट का उन्होंने निरीक्षण किया, लेकिन पूरे दौरे की तेजी ने कई तरह के संदेह पैदा कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जमीनी हकीकत जानने की मंशा होती, तो निरीक्षण इतने कम समय में पूरा नहीं किया जाता। कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर का जायजा लेने से यह संकेत मिलता है कि या तो पहले से ही सब कुछ ठीक दिखाने की तैयारी कर ली गई थी या फिर वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज किया गया।
दुकानें बनीं, आय नहीं—पालिका को नुकसान
हाकिम टोला स्थित नगर पालिका मार्केट में करीब पांच साल पहले पीपी मॉडल के तहत 150 दुकानों का निर्माण कराया गया था, लेकिन अब तक उनका आवंटन नहीं हो सका है। इसका सीधा असर नगरपालिका की आय पर पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार द्वारा मनमानें तरीके से दुकानों की दरें सरकारी मानकों से अधिक तय कर दी गईं, जिससे व्यापारी आगे नहीं आए और दुकानें खाली पड़ी रहीं। नतीजतन, पालिका को किराए से मिलने वाली आय अब तक शुरू ही नहीं हो पाई है। इसी परिसर के धवन रोड की ओर बने दोनों प्रवेश द्वारों पर लंबे समय से अतिक्रमण बना हुआ था। वहीं, नगरपालिका रोड की ओर मुख्य मार्ग पर डंपिंग जोन के कारण गंदगी का अंबार लगा रहता है, जिससे लोगों और व्यापारियों को लगातार परेशानी होती रही है।
निरीक्षण से पहले सफाई, बाद में फिर वही हाल?
निरीक्षण से ठीक पहले परिसर की तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आई। जहां वर्षों से कूड़े का ढेर और बदबू रहती थी, वहां अचानक साफ-सफाई दिखने लगी। धवन रोड के दोनों प्रवेश द्वारों से अतिक्रमण हटाया गया और इलाके में चल रही चिकन व मटन की दुकानों को भी अस्थायी रूप से बंद करा दिया गया।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई स्थायी नहीं, बल्कि दौरे को बेहतर दिखाने की कोशिश भर थी। आम दिनों में हालात पूरी तरह अलग रहते हैं। इससे यह सवाल उठता है कि जब व्यवस्था बनाई जा सकती है, तो उसे नियमित रूप से क्यों नहीं बनाए रखा जाता।
सालों से शिकायतें, कार्रवाई नहीं
हाकिम टोला और आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने कई बार सफाई, कूड़ा निस्तारण और अतिक्रमण को लेकर शिकायतें कीं, इसके अलावा क्षेत्रीय सभासद द्वारा बोर्ड मीटिंग मे भी डंपिंग ज़ोन हटवाने के लिए लिखित और मौखिक मुद्दा उठाया लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। मामले फाइलों में दबकर रह गए और समस्याएं लगातार बढ़ती रहीं। अब जब उच्च अधिकारी का दौरा हुआ, तो अचानक से व्यवस्था दुरुस्त दिखने लगी। इससे लोगों के बीच नाराजगी भी है और सवाल भी कि आखिर अब तक जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे।
औपचारिकता बनकर रह गया निरीक्षण?
दौरे के तरीके को लेकर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह महज औपचारिकता था। अगर वास्तविक सुधार की मंशा होती, तो मौके पर रुककर स्थानीय लोगों से बातचीत की जाती, समस्याओं की गहराई से जांच होती और जिम्मेदारी तय की जाती। लेकिन ऐसा कुछ नजर नहीं आया। इससे यह आशंका मजबूत हो रही है कि निरीक्षण केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह गया।
अब कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेंगे सवाल
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस निरीक्षण के बाद कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इस बार भी जिम्मेदारी तय नहीं हुई, तो यह साफ संदेश जाएगा कि समस्याएं कितनी भी गंभीर हों, उनका समाधान नहीं होगा। वहीं, अगर निष्पक्ष जांच होती है तो सफाई व्यवस्था, अतिक्रमण और अव्यवस्था के लिए जिम्मेदारों की भूमिका सामने आ सकती है। नगरपालिका प्रशासन ने इस मामले में आगे की प्रक्रिया के लिए शासन से अनुमति मांगी थी। इसी क्रम में विशेष सचिव ने मौके का निरीक्षण किया है और अब अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे। नगरपालिका के ईओ संजय कुमार गौतम ने बताया कि दुकानों का आवंटन अभी तक नहीं हो सका है, जिसके चलते पालिका को किराए से होने वाली आय नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि आवंटन प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।