31 लोगों ने किया वो काम : किसी अनजान की बचा सकता है जान
Sun, Aug 23, 2026
46 लोगों ने कराया पंजीकरण, रक्तदाताओं को सम्मानित कर बढ़ाया हौसला
उन्नाव। किसी के लिए रक्त की कुछ बूंदें महज खून हैं, लेकिन जरूरतमंद मरीज के लिए यही बूंदें जिंदगी बचाने का जरिया बन जाती हैं। इसी सोच के साथ कर्म क्रांति सेवा फाउंडेशन के चार साल पूरे होने पर जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में रक्तदान शिविर लगाया गया। शिविर में 46 लोगों ने रक्तदान के लिए अपना पंजीकरण कराया, जिसमें जांच के बाद 31 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। शिविर में युवाओं के साथ विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। रक्तदान करने वालों का उत्साह देखते ही बना। संस्था की ओर से रक्तदाताओं को सम्मानित कर उन्हें आगे भी इस मुहिम से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया गया।
सांसद ने किया शिविर का उद्घाटन
सांसद डॉ. सच्चिदानंद हरि साक्षी जी महाराज ने शिविर का उद्घाटन किया। उन्होंने रक्तदान को समाज सेवा का ऐसा कार्य बताया, जिसका सीधा लाभ किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने में मिलता है। इस दौरान बीएसएफ कमांडर अंकित माहेश्वरी और उपनिरीक्षक महेंद्र सिंह तोमर को रक्तदान के लिए सम्मानित किया गया। सांसद ने संस्था के सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए रक्तदाताओं के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना की।
चार साल की सामाजिक यात्रा का जिक्र
संस्था के संस्थापक अध्यक्ष चेतन मिश्रा ने कहा कि कर्म क्रांति सेवा फाउंडेशन ने चार साल की यात्रा में समाजसेवा से जुड़े कई काम किए हैं। रक्तदान शिविर उसी कड़ी का हिस्सा है। उन्होंने शिविर में पहुंचे अतिथियों, रक्तदाताओं और सहयोगियों का स्वागत करते हुए संस्था की अब तक की गतिविधियों की जानकारी दी। सदर विधायक पंकज गुप्ता, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष अरुण सिंह, सीएमएस डॉ. सुनील कुमार शुक्ला और सांसद प्रतिनिधि अमितेश सिंह ने भी रक्तदान के महत्व पर लोगों को जागरूक किया। वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति का रक्तदान किसी अनजान व्यक्ति के लिए भी जीवन की उम्मीद बन सकता है।
सम्मान पाकर खिले रक्तदाताओं के चेहरे
रक्तदान करने वाले लोगों को संस्था की ओर से अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह, गिफ्ट पैक और स्वल्पाहार की टोकरी देकर सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने के बाद रक्तदाताओं का उत्साह और बढ़ गया। संस्थापक सदस्य हर्ष कुमार तिवारी और रक्तदानी कमल सिंह ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए लोगों को रक्तदान के लिए आगे आने का संदेश दिया। शिविर की व्यवस्थाओं में संरक्षक अजय शुक्ला, रक्तदान प्रभारी अम्बुज मिश्रा, सह महामंत्री हरदेवेंद्र सहाय, अविनीश राय, कुलदीप पाण्डेय और रवि नारायण वर्मा समेत संस्था के पदाधिकारियों ने सहयोग किया। महिला मंडल से रेनू वर्मा, आरती वर्मा और सविता शुक्ला, नीतू तिवारी, आयुष श्रीवास्तव, विशाल मिश्रा आदि ने भी व्यवस्थाओं में भूमिका निभाई। शिविर में आशीष दीक्षित, शिव शंकर प्रजापति, मोहित मौर्या और एसआई रजनेश शुक्ला समेत बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर रक्तदान के प्रति अपना उत्साह दिखाया। संस्था के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंह सेंगर ने कार्यक्रम का संचालन किया और सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार जताया। 31 लोगों का रक्तदान सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन 31 संभावित जिंदगियों के लिए उम्मीद है, जिन्हें जरूरत पड़ने पर इस रक्त का सहारा मिल सकता है।
तीन साल से पानी में डूबा प्रेमगंज : पालिका की व्यवस्था बेअसर
Sat, Aug 22, 2026
लोगो का आरोप; शिकायतों के बाद भी नहीं बदली तस्वीर, गलियों से घर और स्कूल तक पहुंच रहा गंदा पानी
उन्नाव। बांगरमऊ नगर पालिका की जल निकासी व्यवस्था पर प्रेमगंज मोहल्ले के हालात सवाल खड़े कर रहे हैं। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि करीब तीन साल से जलभराव की समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक ऐसा इंतजाम नहीं हो सका जिससे लोगों को इस परेशानी से स्थायी राहत मिल सके। बारिश के दिनों में हालात बिगड़ते हैं, जबकि सामान्य दिनों में भी कई स्थानों पर पानी जमा रहता है। जलभराव से परेशान मोहल्लेवासियों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। रविवार को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर सेवा संस्था के अध्यक्ष आकाश के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग नगर पालिका कार्यालय पहुंचे। लोगों ने चेयरमैन और पालिका प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जताई और अधिशासी अधिकारी गुंजन गुप्ता को ज्ञापन सौंपकर समस्या के स्थायी समाधान की मांग की।
पालिका कार्यालय तक पहुंची मोहल्ले की परेशानी
मोहल्लेवासियों के मुताबिक जल निकासी के लिए पर्याप्त नालियां नहीं होने से पानी के निकलने का रास्ता ही नहीं है। बारिश होते ही गलियां जलमग्न हो जाती हैं। कई स्थानों पर पानी घरों और विद्यालय परिसर तक पहुंच जाता है। ऐसे में बच्चों को स्कूल जाने, महिलाओं को जरूरी काम से निकलने और बुजुर्गों को आवाजाही में दिक्कत होती है। लोगों का सवाल है कि जब समस्या लंबे समय से पालिका के संज्ञान में है तो अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं कराया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार सिर्फ पानी जमा होने की समस्या नहीं है, बल्कि लंबे समय तक गंदा पानी ठहरने से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ रहा है। इससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बना रहता है।
तहसील दिवस से आईजीआरएस तक शिकायत, फिर भी नहीं निकला रास्ता
मोहल्लेवासियों ने बताया कि जलभराव को लेकर कई बार शिकायतें की गईं। तहसील दिवस में मामला उठाने के साथ नगर पालिका और आईजीआरएस के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। लोगों का कहना है कि शिकायतें दर्ज होने के बाद यदि मौके का निरीक्षण कराकर जल निकासी का स्थायी इंतजाम किया गया होता तो तीन साल तक उन्हें यह परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। इससे नगर पालिका की शिकायत निस्तारण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
नाला नहीं तो पानी कहां से निकले
प्रेमगंज के लोगों की सबसे बड़ी मांग नाला निर्माण की है। उनका कहना है कि जब तक पानी की निकासी के लिए पर्याप्त नाला नहीं बनाया जाएगा, तब तक बारिश के बाद जलभराव की समस्या खत्म होना मुश्किल है। लोगों ने पालिका अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखने और जल निकासी की पूरी व्यवस्था तैयार कराने की मांग की है।
तीन साल में स्थायी इंतजाम नहीं
मोहल्लेवासियों का कहना है कि तीन साल का समय किसी भी समस्या के समाधान के लिए कम नहीं होता। इसके बावजूद प्रेमगंज में जलभराव की समस्या बनी रहना नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। लोगों ने मांग की है कि सिर्फ कागजी शिकायतों के निस्तारण के बजाय मौके पर काम कराया जाए, ताकि गलियों, घरों और विद्यालय को जलभराव से राहत मिल सके। लोगों की मांग है कि पालिका प्रशासन अब सिर्फ आश्वासन तक सीमित न रहे, बल्कि स्थलीय निरीक्षण कर जल निकासी की ठोस योजना बनाए और नाला निर्माण कराकर समस्या का स्थायी समाधान करे।
शंखचूड़ के अंत की कथा ने बांधा समां : हर-हर महादेव से गूंजा मंदिर
Sat, Aug 22, 2026
रामकृष्ण दुर्गा मंदिर में चल रही एक माह की शिव महापुराण कथा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
उन्नाव। गांधी नगर स्थित रामकृष्ण दुर्गा मंदिर में चल रही एक माह की शिव महापुराण कथा में शुक्रवार को शंखचूड़ वध की कथा सुनाई गई। कथा के दौरान भगवान शिव और दैत्यराज शंखचूड़ के बीच हुए युद्ध का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा के बीच मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और भोलेनाथ के जयकारे गूंजते रहे। कथा प्रवक्ता शशांक शुक्ला ने बताया कि दैत्यराज शंखचूड़ को भगवान विष्णु से प्राप्त कवच और उसकी पत्नी तुलसी के पतिव्रत धर्म का ऐसा बल मिला था कि उसे पराजित करना देवताओं के लिए भी मुश्किल हो गया था। शंखचूड़ ने अपनी शक्ति के बल पर तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया और देवताओं को परेशान करने लगा। देवताओं ने ब्रह्मा और भगवान विष्णु से सहायता मांगी। तब उन्हें बताया गया कि शंखचूड़ का अंत भगवान शिव के हाथों ही संभव है। इसके बाद महादेव ने देवताओं की रक्षा के लिए दैत्यराज से युद्ध किया। दोनों के बीच लंबे समय तक घमासान युद्ध चलता रहा। शंखचूड़ पर भगवान शिव के अस्त्र-शस्त्र भी तब तक प्रभावी नहीं हो सके, जब तक उसके पास विष्णु कवच और पत्नी के पतिव्रत का संरक्षण था। कथा के अनुसार, शंखचूड़ के कवच को अलग करने के लिए भगवान विष्णु ब्राह्मण का रूप धारण कर उसके पास पहुंचे और उससे कवच मांग लिया। इसके बाद भगवान विष्णु ने शंखचूड़ का रूप धारण किया। इससे तुलसी के पतिव्रत धर्म का प्रभाव समाप्त हुआ। जैसे ही शंखचूड़ का सुरक्षा कवच और पतिव्रत का संरक्षण समाप्त हुआ, भगवान शिव ने त्रिशूल से उसका वध कर दिया। शंखचूड़ वध का प्रसंग सुनते ही श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के जयकारे लगाए। पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूब गया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने आरती और पूजन में भी हिस्सा लिया। मंदिर प्रबंधिका चंद्रावती देवी ने श्रद्धालुओं से एक माह तक चलने वाली शिव महापुराण कथा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। कथा आयोजन में डॉ. मनीष सिंह सेंगर, सत्येंद्र सिंह सचिन, शैलेंद्र सिंह चंदेल, आचार्य पंकज शुक्ला, सूरज शुक्ला, मोनी सिंह और राहुल कश्यप समेत अन्य व्यवस्थापक मौजूद रहे।