20 साल से भगवंतनगर में सेवा का सफर : अब बच्चों के सपनों का सहारा
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Sun, Sep 6, 2026
फीस के लिए नहीं रुके कदम, सात होनहार बच्चों की पढ़ाई में 5.27 लाख रुपये की मदद

अंकित परिहार बोले, किसी बच्चे का सपना पैसे की कमी से नहीं टूटना चाहिए
उन्नाव। किसी बच्चे की आंखों में डॉक्टर, इंजीनियर या अधिकारी बनने का सपना हो और उसके माता-पिता फीस की चिंता में परेशान हों, तो उस चिंता को अपना समझकर मदद के लिए आगे आना आसान नहीं होता। लेकिन भगवंतनगर में पिछले करीब 20 वर्षों से लोगों के बीच रहकर सेवा कार्यों से जुड़े अंकित सिंह परिहार के लिए यह केवल मदद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का हिस्सा है। उनका मानना है कि समाज में बदलाव की शुरुआत तभी होगी, जब बच्चों को पढ़ने और आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। इसी सोच के साथ उन्होंने परिवार क्षेत्र के सात प्रतिभाशाली बच्चों की उच्च शिक्षा में आर्थिक सहयोग किया है। गरिमा निषाद, अनेन्द्र सिंह चौहान, आस्था रावत, अनुजा पटेल, अखिल अवस्थी, सुनिधि गौतम और अंशिका यादव की मेडिकल, इंजीनियरिंग, एमबीए समेत अन्य उच्च शिक्षा की फीस में उन्होंने कुल 5 लाख 27 हजार रुपये का सहयोग किया।
20 साल में बदली मदद की तस्वीर
भगवंतनगर में लंबे समय से सक्रिय अंकित परिहार का कहना है कि सेवा का मतलब केवल किसी जरूरतमंद को तत्काल मदद पहुंचाना नहीं है। असली बदलाव तब होगा, जब किसी बच्चे को इस तरह सक्षम बनाया जाए कि वह भविष्य में खुद अपने पैरों पर खड़ा हो सके। इसी सोच ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए प्रेरित किया। करीब दो दशक के इस सफर में उन्होंने कई बच्चों की पढ़ाई में अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग किया। समय के साथ उन बच्चों में से कई ने अपनी पढ़ाई पूरी कर अलग-अलग क्षेत्रों में पहचान बनाई। कोई डॉक्टर बना तो किसी ने इंजीनियरिंग और प्रबंधन के क्षेत्र में कदम रखा। बच्चों की ऐसी सफलता को वह अपने लिए किसी सम्मान से कम नहीं मानते।
एक फीस, पूरे परिवार की चिंता कम
अंकित परिहार कहते हैं कि जब किसी परिवार का बच्चा उच्च शिक्षा में पहुंचता है तो उसके साथ माता-पिता की उम्मीदें भी जुड़ी होती हैं। लेकिन पढ़ाई का खर्च कई बार उन उम्मीदों पर भारी पड़ने लगता है। ऐसे समय में यदि किसी बच्चे की फीस की चिंता कम हो जाए तो परिवार को सिर्फ आर्थिक राहत नहीं मिलती, बल्कि बच्चे को भी आगे बढ़ने का भरोसा मिलता है।उनके मुताबिक, मदद की असली खुशी उस दिन मिलती है जब वही बच्चा मेहनत करके अपनी मंजिल हासिल करता है। उनके लिए रुपये की राशि से ज्यादा महत्वपूर्ण वह भविष्य है, जो किसी बच्चे की पढ़ाई पूरी होने के बाद बदल सकता है।
राजनीति से आगे सेवा की सोच
अंकित सिंह परिहार का कहना है कि युवाओं को सिर्फ राजनीति या सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना पर्याप्त नहीं है। उन्हें शिक्षा, हुनर और रोजगार के रास्ते पर आगे बढ़ाना भी जरूरी है। उनकी कोशिश है कि क्षेत्र के युवा अपनी प्रतिभा के दम पर आगे आएं और किसी के सहारे के बजाय अपने पैरों पर खड़े हों।उन्होंने कहा कि मेरी राजनीति का उद्देश्य भी यही है कि हमारे युवाओं की ऊर्जा शिक्षा, हुनर और स्वावलंबन की दिशा में लगे। उनका मानना है कि पढ़ा-लिखा और आत्मनिर्भर युवा न केवल अपने परिवार को मजबूत करता है, बल्कि पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है।
बच्चों की कामयाबी को मानते हैं अपनी खुशी
अंकित परिहार कहते हैं कि उन्हें सबसे ज्यादा संतोष तब मिलता है, जब किसी ऐसे बच्चे को सफलता मिलती है जिसकी पढ़ाई में कभी उन्होंने सहयोग किया था। बच्चे की सफलता के पीछे उसकी मेहनत और परिवार का संघर्ष सबसे बड़ा कारण है, लेकिन अगर रास्ते में छोटी सी मदद भी काम आ जाए तो वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं। उनका कहना है कि भगवंतनगर में सेवा का यह सफर 20 साल पहले शुरू हुआ था और आगे भी जारी रहेगा। लक्ष्य यही है कि क्षेत्र का कोई प्रतिभाशाली बच्चा केवल आर्थिक परेशानी के कारण पढ़ाई से दूर न हो। बच्चे पढ़ें, अपने सपने पूरे करें और अपने परिवार के साथ भगवंतनगर का नाम भी रोशन करें, यही उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।
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